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Dehradun News: छठ महापर्व के लिए महिलाएं बना रहीं चूल्हे और अन्य सामान
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Iकल से नहाए खाए के साथ शुरू होगा छठI
दिवाली के समापन के साथ महापर्व छठ की तैयारी शुरू हो गई है। पूर्वांचल समाज की महिलाएं मिट्टी का चूल्हा, मटके आदि तैयार कर रही हैं। पहले महिलाएं कुम्हारों से व्रत में प्रयोग होने वाले मिट्टी के चूल्हे और अन्य सामान बनवाती थीं। सामान की बनवाई के दाम अधिक होने के चलते इस बार महिलाएं स्वयं ही चूल्हा और अन्य सामान तैयार कर रही हैं।
17 नवंंबर को नहाए खाए के साथ चार दिन का छठ महापर्व शुरू हो जाएगा। बुधवार को विकासनगर, सहसपुर और सेलाकुई में पूर्वांचल समाज की महिलाओं ने व्रत के लिए चूल्हा और मिट्टी के अन्य सामान बनाना शुरू किया। कैनाल रोड बाईपास निवासी पूर्वांचली समाज की महिला प्रभा देवी, सरिता, सोनी, गीता, मीना, अल्का और संगीता ने बताया कि पहले वह कुम्हार से चूल्हा और अन्य मिट्टी के सामान खरीदते थे। इस बार कुम्हारों ने समान के दाम 2100 रुपये प्रति परिवार कर दिए है। उन्होंने बताया कि इसलिए वह स्वयं चूल्हे और अन्य सामान बना रहे हैं।
पूर्वांचल नागरिक परिषद के पदाधिकारी एके सिंह ने बताया कि छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है। बताया कि कार्तिक शुक्ल सप्तमी पर्व का समापन होता है। छठ महापर्व के दौरान छठव्रती महिलाएं 36 घंटे का निर्जल व्रत रखतीं हैं। मिट्टी के नए चूल्हे पर प्रसाद बनाया जाता है।
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दिवाली के समापन के साथ महापर्व छठ की तैयारी शुरू हो गई है। पूर्वांचल समाज की महिलाएं मिट्टी का चूल्हा, मटके आदि तैयार कर रही हैं। पहले महिलाएं कुम्हारों से व्रत में प्रयोग होने वाले मिट्टी के चूल्हे और अन्य सामान बनवाती थीं। सामान की बनवाई के दाम अधिक होने के चलते इस बार महिलाएं स्वयं ही चूल्हा और अन्य सामान तैयार कर रही हैं।
17 नवंंबर को नहाए खाए के साथ चार दिन का छठ महापर्व शुरू हो जाएगा। बुधवार को विकासनगर, सहसपुर और सेलाकुई में पूर्वांचल समाज की महिलाओं ने व्रत के लिए चूल्हा और मिट्टी के अन्य सामान बनाना शुरू किया। कैनाल रोड बाईपास निवासी पूर्वांचली समाज की महिला प्रभा देवी, सरिता, सोनी, गीता, मीना, अल्का और संगीता ने बताया कि पहले वह कुम्हार से चूल्हा और अन्य मिट्टी के सामान खरीदते थे। इस बार कुम्हारों ने समान के दाम 2100 रुपये प्रति परिवार कर दिए है। उन्होंने बताया कि इसलिए वह स्वयं चूल्हे और अन्य सामान बना रहे हैं।
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पूर्वांचल नागरिक परिषद के पदाधिकारी एके सिंह ने बताया कि छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है। बताया कि कार्तिक शुक्ल सप्तमी पर्व का समापन होता है। छठ महापर्व के दौरान छठव्रती महिलाएं 36 घंटे का निर्जल व्रत रखतीं हैं। मिट्टी के नए चूल्हे पर प्रसाद बनाया जाता है।
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