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संतों के विश्राम कक्ष के बाहर लगा 'महिलाओं का प्रवेश निषेध' का बोर्ड
राजेश शर्मा / अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Thu, 05 Oct 2017 12:55 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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संतों पर लग रहे आरोपों के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी की सलाह का असर भी दिखने लगा है।
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सबसे पहले इस सलाह का असर हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ श्रीदक्षिण काली मंदिर के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी के यहां देखने को मिला। कैलाशानंद ब्रह्मचारी के विश्राम कक्ष के बाहर बाकायदा बोर्ड लगाया गया है कि गुरुजी के विश्राम कक्ष में महिलाओं का प्रवेश निषेध है। इस तरह कई अन्य संतों ने भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की सलाह का समर्थन किया हैं।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने मंगलवार को अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा था कि संतों ने जिस तरह से सुनियोजित तरीके से बदनाम किया जा रहा है, उसको देखते हुए संभल कर चलने की जरूरत है। उनका कहना था कि संत समाज नारियों का भारतीय संस्कृति के अनुरूप पूरा सम्मान करता है। ऐसे में संभलकर चलना समय की मांग है।
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काली मंदिर पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी के बताया कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की सलाह पूरी तरह तार्किक और समय की मांग के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि हालांकि उनके यहां तो विश्राम कक्ष के बाहर यह नोटिस बोर्ड काफी समय पहले से ही लगाया गया है। उन्होंने कहा कि उनके मंदिर में नारियों का पूरा सम्मान किया जाता है।
नारी पूज्य हैं और नारी की कोख से बेटा और बेटी जन्म लेते हैं कहीं कोई भेद नहीं है। संयुक्त परिवार के साथ कोई भी बहन बेटी आ सकती है। सभी का स्वागत है। उधर भारत साधु समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी ऋषिश्वरानंद महाराज ने बताया कि भारत साधु समाज भी सभी संतों से इस तरह की अपील पहले ही कर चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चुनिंदा लोग सोची समझी साजिश के तहत सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश करते रहते हैं। इसलिए एहतियात बरतना जरूरी है।