{"_id":"598174ae4f1c1bc93b8b466a","slug":"women-empowerment-and-child-welfare-department-dinai-to-take-over-section-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"शासन में लटका महिला सशक्तीकरण और बाल विकास!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शासन में लटका महिला सशक्तीकरण और बाल विकास!
विपिन बनियाल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 02 Aug 2017 12:14 PM IST
विज्ञापन
rekha arya
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
समाज कल्याण विभाग के सेक्शन-2 को महिला सशक्तीकरण और बाल विकास विभाग ने टेकओवर करने से मना कर दिया है। इस सेक्शन की 495 फाइलों को भी विभाग स्वीकार नहीं कर रहा है।
विज्ञापन
हरीश रावत सरकार में इस सेक्शन को महिला सशक्तीकरण और बाल विकास विभाग के हैंडओवर करने का शासनादेश जारी हुआ था। मकसद यही था कि महिला कल्याण से संबंधित मामले दो की जगह एक ही महकमे से संचालित हों। मगर एक साल से दोनों महकमों के बीच यह मामला लटका हुआ है। इस वजह से महिला कल्याण से संबंधित योजनाओं पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
विज्ञापन
इन स्थितियों के बीच अब महिला सशक्तीकरण विभाग इस सेक्शन को वापस समाज कल्याण विभाग में ही रखने के लिए कैबिनेट प्रस्ताव तैयार कर रहा है। उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद समाज कल्याण विभाग से अलग होकर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग बनाया गया। मगर महिलाओं से संबंधित योजनाओं का संचालन दोनों जगह से होता रहा।
विज्ञापन
संबंधित मामलों को शासन में देखने वाले समाज कल्याण विभाग के सेक्शन-2 की स्थिति में भी कोई अंतर नहीं आया। 2016 में नारी निकेतन में अव्यवस्था के मामले को जब ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, उसके बाद हरीश रावत सरकार ने सेक्शन-2 को शिफ्ट करने का अहम फैसला किया था। मगर नौकरशाही की आपसी खींचतान के कारण इस पर कार्रवाई नहीं हो पाई।
इन योजनाओं पर पड़ रहा असर
निराश्रित विधवा पेंशन भरण पोषण अनुदान
गौरा देवी कन्या धन योजना
विधवा से विवाह करने पर दंपत्ति को पुरस्कार योजना
परित्यक्त विवाहित, महिला, निराश्रित महिला भरण पोषण
सामान्य जाति महिला, बालिका छात्रवृत्ति योजना
दहेज से पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता योजना
दहेज से पीड़ित महिलाओं को आर्थिक सहायता
अफसरों की मंशा पर गहरे सवाल
साल भर पहले इस निर्णय पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, मगर मामला लटका रहा। समाज कल्याण विभाग के जिम्मेदार अफसर इस मामले में लापरवाह बने रहे। एक अफसर के मुताबिक, साल भर से ये फाइलें ज्यादातर समय गठरी में बंधकर ही रहीं हैं। केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए कभी जरूरी हुआ, तो ही इन फाइलों को खोला गया। पिछले दिनों, सेक्शन-टू की सारी फाइलें जब महिला सशक्तीकरण विभाग में भेजी गईं, तो वहां से उन्हें लौटा दिया गया।
तकनीकी तौर पर सेक्शन-2 अब भी समाज कल्याण विभाग के पास ही है, हालांकि इसे मेरे विभाग में मर्ज हो जाना चाहिए था। इस मामले में अब सीएम ही कोई निर्णय ले सकते हैं। उनके सामने ये मामला रखा जाएगा।
- रेखा आर्या, राज्य मंत्री, महिला सशक्तीकरण विभाग