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उत्तराखंडः एंबुलेंस और डॉक्टर नहीं, तड़पकर मरीज की मौत

Mon, 02 Feb 2015 08:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंगलौर
ब्यूरो/अमर उजाला, मंगलौर Updated Mon, 02 Feb 2015 08:30 PM IST
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women death waiting ambulance

उत्तराखंड में रुड़की के मोहल्ला पठानपुरा में एक महिला ने समय से उपचार नहीं मिल पाने के कारण तड़पते-तड़पते दम तोड़ दिया। पहले तो करीब दो घंटे तक 108 एंबुलेंस नहीं आई।

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किसी तरह निजी अस्पताल पहुंचाई गई तो डॉक्टरों ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद परिजन रुड़की में अस्पताल दर अस्पताल भटकते रहे। जब डॉक्टर मिला तो पता चला कि महिला की मौत हो चुकी थी। यह वाकया रविवार की रात मंगलौर के पठानपुरा निवासी कर्रार हुसैन उर्फ भोला की पत्नी सादाब जहरा (40 वर्ष) के साथ गुजरा।
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रविवार देर रात करीब साढ़े सात बजे घर में कपड़ों पर प्रेस कर रही सादाब जहरा बानों के पेट में अचानक दर्द हुआ। उसकी तबियत बिगड़ती ही चली गई। उन्हें पास में ही एक डॉक्टर के पास ले जाया गया। प्राथमिक इलाज में डॉक्टर ने हालत गंभीर देखी तो उन्हें हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी।
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परिजनों का आरोप है कि इसके लिए वह 108 एंबुलेंस सेवा को फोन करते रहे, लेकिन दो घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। जब भी 108 को फोन किया तो कर्मचारी ने यही पूछते रहे कहां पहुंचना है कौन बीमार है।

डॉक्टर बाहर नहीं आए

women death waiting ambulance

जब 108 एंबुलेंस नहीं आई तो एक परिचित की कार से महिला को मंगलौर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। कर्रार हुसैन के मुताबिक काफी देर तक अस्पताल का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन डॉक्टर बाहर नहीं आए। इसके बाद महिला को रुड़की लाए।

यहां दो प्राइवेट नर्सिंग होम में ले गए, लेकिन वहां भी इमरजेंसी केस बताते हुए डॉक्टरों ने नहीं देखा। इसके बाद तीसरे नर्सिंगहोम में ले गए। डॉक्टर ने जब इलाज करना शुरू किया तो पता चला की महिला की मौत हो चुकी है।

कर्रार हुसैन का कहना है कि यदि समय पर 108 आ जाती, मंगलौर या फिर रुड़की में भी समय से इलाज हो जाता, उसकी पत्नी की जान बच जाती। गमगीन माहौल में सोमवार को महिला के शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। सीएचसी मंगलौर के प्रभारी डा. प्रदीप कुमार का कहना है कि रात को उनके अस्पताल में कोई मरीज नहीं आया। यदि कोई आता तो वह उसका इलाज जरूर करते।

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