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Dehradun: महिलाओं में सबसे घातक साबित हो रहा सर्वाइकल कैंसर, हर महीने आ रहे चार मरीज सामने, पहाड़ से ज्यादा

Mon, 24 Mar 2025 10:35 AM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Mon, 24 Mar 2025 10:35 AM IST
सार

सीएमआई अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमिता प्रभाकर ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि के कारण होता है। भारत में हर साल 60 से 70 हजार महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर के कारण होती है।
 

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Cervical cancer is proving to be the most fatal among women four patients coming forward every month
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik

विस्तार

स्तन कैंसर के बाद दून की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर सबसे घातक साबित हो रहा है। दून के सीएमआई अस्पताल में हर महीने इसके चार मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाएं अधिक हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। इससे बचने के लिए 9 से 15 साल की उम्र में टीकाकरण सबसे अधिक असरदार है।

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भारत में गार्डेसिल 9 और सर्वेरिक्स टीका प्रचलित हैं। सीएमआई अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमिता प्रभाकर ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि के कारण होता है। भारत में हर साल 60 से 70 हजार महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर के कारण होती है।
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महिलाएं सर्वाइकल कैंसर का टीका लगवा सकती हैं
वहीं, दून अस्पताल के स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीतू मागो ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर को विकसित होने में 10 से 15 साल लगते हैं, इसलिए यदि सही समय पर जांच और टीकाकरण किया जाए तो इसे रोका जा सकता है। जागरूकता ही कैंसर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। अगर समय पर कदम उठाए जाएं, तो यह बीमारी जानलेवा साबित नहीं होगी।
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उन्होंने बताया कि नौ से 45 साल तक की महिलाएं सर्वाइकल कैंसर का टीका लगवा सकती हैं, लेकिन सबसे प्रभावी उम्र 9 से 15 साल होती है। विषेशज्ञों के अनुसार महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक रूप से एचपीवी वायरस पाया जाता है, लेकिन कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाली महिलाओं में यह वायरस बढ़कर कैंसर का खतरा पैदा करता है।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण
- यौन क्रिया के दौरान या बाद में रक्तस्राव होना।
- असामान्य व दुर्गंधयुक्त सफेद पानी आना।
- थकान और कमजोरी महसूस होना।
- वजन का अचानक घटना।
- गुप्तांग में बार-बार संक्रमण होना।

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ऐसे करें बचाव
- 9 से 15 साल की उम्र में एचपीवी टीका जरूर लगवाएं।
- 25 साल व इससे अधिक उम्र की महिलाएं हर तीन साल में पैपस्मियर टेस्ट करवाएं।
- अंतरंग सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- असुरक्षित यौन संबंधों से बचें।
- धूम्रपान और अस्वस्थ जीवनशैली से बचें।
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