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नियम तोड़ने के बाद भोली बनीं हेलीकॉप्टर कंपनियां

Tue, 04 Aug 2015 10:19 AM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 04 Aug 2015 10:19 AM IST
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without permission heli services in kedarnath valley.

केदारनाथ वन्य जीव विहार से पलायन कर रहे वन्य जीवों के लिए दोषी कौन, यह जांच के बाद तय होगा। लेकिन हेलीकॉप्टर कंपनियां खुद को अनजान साबित करने के लिए अजीब तर्क गढ़ रही हैं।

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केदारनाथ वन्य विहार के ऊपर से उड़ान भरने वाली हेलीकॉप्टर कंपनियों का कहना है कि उन्हें पता ही नहीं कि इस क्षेत्र में उड़ान भरने के लिए वन विभाग से एनओसी लेने की जरूरत है। कंपनियों का कहना है कि अगर एनओसी जरूरी थी तो उड्डयन विभाग को बैठकों में बताना चाहिए था। उनका यह तर्क तब है जब डीएम चमोली के आदेश में स्पष्ट है कि वन्य जीव जंतु क्षेत्र तथा प्रतिबंधित क्षेत्र के ऊपर से उड़ान न भरी जाए।
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केदारनाथ वन्य विहार के ऊपर से उड़ान भरने वाली हेलीकॉप्टर कंपनियां भी मान रही हैं कि प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक उत्तराखंड से एनओसी नहीं ली।

उड्डयन विभाग के माथे पर डाल रहीं सारा दोष

without permission heli services in kedarnath valley.

हालांकि हेलीकॉप्टर कंपनियां अपनी सफाई में खुद को बचाते हुए पूरी जिम्मेदारी उड्डयन विभाग पर डाल रही हैं। खुद को एनओसी की जानकारी से अनजान बता रही हैं।

हालांकि हेलीकॉप्टर कंपनियों सफाई चाहे जो दें लेकिन यह स्पष्ट है कि इन कं पनियों ने शासनादेश के मद्देनजर जारी डीएम चमोली के आदेश को भी नहीं माना है।

आदेश की शर्त नंबर 11 में साफ लिखा है कि ‘यह भी स्पष्ट किया जाता है कि कंपनी द्वारा वन्य जीव जंतु क्षेत्र तथा प्रतिबंधित क्षेत्र के ऊपर से उड़ान न भरी जाए।’

चमोली के डीएम ने जिस भी हेलीकॉप्टर कंपनी को उड़ान के लिए अनुमति दी थी उसमें 11 शर्तें जुड़ी थीं। आखिरी शर्त वन्य जंतु क्षेत्र तथा प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान न भरने की थी। किसी हेलीकॉप्टर कंपनी ने इस शर्त पर ध्यान क्यों नहीं दिया।

सवालों के घेरे में शासन-प्रशासन

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सवालों के घेरे में सिर्फ हेलीकॉप्टर कंपनियां ही नहीं शासन प्रशासन भी है। शासनादेश के उल्लंघन पर इन कंपनियों के खिलाफ आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

किसी कंपनी से यह क्यों नहीं पूछा गया कि वह प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान तो नहीं भर रही हैं? प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक कार्यालय से एनओसी ली कि नहीं?

जब कंपनियों को उप वन संरक्षक ने नोटिस दी तो जवाब क्यों नहीं आया। जब वर्ष 2013 में उप वन संरक्षक, वन प्रभाग, गोपेश्वर आकाश वर्मा और अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव एसके दत्ता ने तत्कालीन प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक एसएस शर्मा को पत्र लिखा और कार्रवाई की मांग की तो इस पर भी कोई नोटिस क्यों नहीं लिया गया?

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पढ़िए, क्या है जिम्मेदार लोगों का कहना

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एनओसी की जरूरत ही नहीं थी। हमें पता नहीं कि उड़ान वाले क्षेत्र में एनओसी लेना जरूरी है। हमारी कंपनी पूरे उत्तराखंड में उड़ान भर रही है। इस संबंध में पूछना है तो उत्तराखंड सरकार से पूछिये।
-विकास तोमर, मैनेजर आर्यन एविएशन

हम तो नागरिक उड्डयन विभाग से अनुमति लेते हैं। हमें नहीं पता उड़ान वाला क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है कि नहीं। उड्डयन विभाग के साथ बैठकें होती हैं। वन उप संरक्षक की नोटिस के संबंध में नहीं पता।
-मनप्रीत अरोड़ा, डायरेक्टर आपरेशंस, पिनेक्लेयर

डिप्टी सेक्रेटरी को वर्ष 2013 और उसके बाद के आदेशों का ब्यौरा उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। उसके बाद अगली कार्रवाई तय की जाएगी।
-अक्षत गुप्ता, अपर सचिव, उड्डयन विभाग

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