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Dehradun News: केंद्र की मदद से उत्तराखंड बनेगा नवीकरणीय ऊर्जा का नेचुरल कैपिटल
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- संसद में हरिद्वार सांसद के पूछे गए सवाल पर केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री ने दिया जवाब
- उत्तराखंड में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में केंद्र की कई क्रांतिकारी योजनाएं जारी
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि केंद्र की मदद से उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा का नेचुरल कैपिटल बनेगा। उनके एक सवाल पर संसद में केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपाद येसो नाईक ने इस दिशा में हो रहे केंद्रीय प्रयासों की जानकारी दी।
हरिद्वार सांसद के सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राज्य में तीन महत्वपूर्ण हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। जिसमें विष्णुगाड़ पीपलकोटी (444 मेगावाट), तपोवन विष्णुगाड़ (520 मेगावाट) और लखवाड़ बहुउद्देश्यीय परियोजना (300 मेगावाट), पीएम सूर्यघर योजना के तहत 7,196 सोलर रूफटॉप सिस्टम अब तक हरिद्वार में स्थापित किए जा चुके हैं। 31 अक्तूबर तक उत्तराखंड को आवंटित 3,685 सोलर पंप में से 1,636 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने लगभग 250 मेगावाट के लक्ष्य के साथ एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, जिसके अंतर्गत 20 किलोवाट, 25 किलोवाट, 50 किलोवाट, 100 किलोवाट और 200 किलोवाट क्षमताओं वाले सोलर प्लांट व्यक्तियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्तर के बड़े निर्णय ऐसे हैं, जिनका लाभ उत्तराखंड को भी मिलेगा। इसमें सौर-पवन परियोजनाओं के लिए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली मानक, 2030 तक के लिए अक्षय उपभोग बाध्यता (आरसीओ), सौर-पवन परियोजनाओं पर 2032 तक आईएसटीएस चार्ज माफी, सौर उत्पादों पर गुणवत्ता नियंत्रण आदेश, ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस नियम, ग्रीन टर्म अहेड मार्केट (जीटीएएम) और राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन शामिल हैं। सांसद रावत ने कहा कि उत्तराखंड की जल, सौर और पर्वतीय परिस्थितियां प्रदेश को नवीकरणीय ऊर्जा का नेचुरल कैपिटल बनाती हैं। केंद्र सरकार के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य तेजी से ग्रीन एनर्जी हब की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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- उत्तराखंड में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में केंद्र की कई क्रांतिकारी योजनाएं जारी
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि केंद्र की मदद से उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा का नेचुरल कैपिटल बनेगा। उनके एक सवाल पर संसद में केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपाद येसो नाईक ने इस दिशा में हो रहे केंद्रीय प्रयासों की जानकारी दी।
हरिद्वार सांसद के सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राज्य में तीन महत्वपूर्ण हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। जिसमें विष्णुगाड़ पीपलकोटी (444 मेगावाट), तपोवन विष्णुगाड़ (520 मेगावाट) और लखवाड़ बहुउद्देश्यीय परियोजना (300 मेगावाट), पीएम सूर्यघर योजना के तहत 7,196 सोलर रूफटॉप सिस्टम अब तक हरिद्वार में स्थापित किए जा चुके हैं। 31 अक्तूबर तक उत्तराखंड को आवंटित 3,685 सोलर पंप में से 1,636 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने लगभग 250 मेगावाट के लक्ष्य के साथ एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, जिसके अंतर्गत 20 किलोवाट, 25 किलोवाट, 50 किलोवाट, 100 किलोवाट और 200 किलोवाट क्षमताओं वाले सोलर प्लांट व्यक्तियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्तर के बड़े निर्णय ऐसे हैं, जिनका लाभ उत्तराखंड को भी मिलेगा। इसमें सौर-पवन परियोजनाओं के लिए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली मानक, 2030 तक के लिए अक्षय उपभोग बाध्यता (आरसीओ), सौर-पवन परियोजनाओं पर 2032 तक आईएसटीएस चार्ज माफी, सौर उत्पादों पर गुणवत्ता नियंत्रण आदेश, ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस नियम, ग्रीन टर्म अहेड मार्केट (जीटीएएम) और राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन शामिल हैं। सांसद रावत ने कहा कि उत्तराखंड की जल, सौर और पर्वतीय परिस्थितियां प्रदेश को नवीकरणीय ऊर्जा का नेचुरल कैपिटल बनाती हैं। केंद्र सरकार के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य तेजी से ग्रीन एनर्जी हब की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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