'खतरे' में हैं उत्तराखंड स्थित नेशनल पार्क

अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 20 Jan 2014 09:22 AM IST
wildlife protector not deploy in national park
वनों और वन्यजीवों के लिहाज से उत्तराखंड की गिनती देश के समृद्ध राज्यों में होती है। इनके संरक्षण के लिए प्रदेश का वन विभाग और सरकार जरा भी गंभीर नहीं है।

मानद वन्यजीव प्रतिपालक की तैनाती नहीं
राज्य के चार नेशनल पार्क और सात सेंचुरी भगवान भरोसे हैं। नियमों के बावजूद यहां राज्य गठन के 13 साल बाद भी मानद वन्यजीव प्रतिपालक की तैनाती नहीं की गई है। प्रदेश में सिर्फ कार्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी नेशनल पार्क में ही ये तैनात हैं।

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ऐसे में व्यवस्था पर सवाल तो उठ रहे हैं, लेकिन विभाग के पास इनका कोई जवाब नहीं। राजाजी और कार्बेट के पास बीते कुछ समय में रिजॉर्ट जिस तेजी से बने हैं और वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं हुई हैं, उससे माना जा रहा है कि पोल खुल जाने के डर से ही बाकी सेंचुरी और पार्क में प्रतिपालकों की तैनाती से बचा जा रहा है।

बस दो ही नाम विजेंद्र और राजीव

कार्बेट टाइगर रिजर्व में विजेंद्र सिंह दो दशक से अधिक समय बाद भी मानद वन्यजीव प्रतिपालक बने हुए हैं। राजाजी नेशनल पार्क में राजीव मेहता को दो साल पूर्व यह तैनाती दी गई थी। उनकी कार्य अवधि दो साल की थी।

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बीच में कुछ समय खाली रहने के बाद अब राजीव को फिर तैनाती दे दी गई है। इससे सवाल उठ रहा है कि विभाग के पास इन दो नामों के अलावा और कोई विकल्प आखिर क्यों नहीं है। यह हाल तब है, जबकि प्रदेश में कई लोग वन-वन्यजीव संरक्षण पर काम कर रहे हैं।

चहेतों के लिए मानक ताक पर
भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 के अनुसार किसी भी टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और सेंचुरी के लिए मानद वन्यजीव प्रतिपालक बनाने से पहले आवेदन आमंत्रित किया जाता है। वन्यजीव बोर्ड की बैठक में नामों पर चर्चा होती है।

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उसके बाद शासन तैनाती का आदेश जारी करता है। लेकिन उत्तराखंड में यह प्रक्रिया अपनाने के बजाय चहेतों को सीधे तैनाती दी जाती है।

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वन्यजीव संरक्षण सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में बेहतर काम करने वालों को यह पद दिया नहीं जाता। ऐसा किया गया तो डर रहता है कि वन विभाग की पोल न खुल जाए। कार्बेट में यह पद उस व्यक्ति को दिया गया है, जो दिल्ली में रहते हैं। ऐसे में वह कैसे वन्यजीव संरक्षण पर काम कर सकेंगे। यह चिंता का विषय है।
- गौरी मौलेखी, सदस्य सचिव पीएफए उत्तराखंड

नेशनल पार्क और सेंचुरी में मानद वन्यजीव प्रतिपालक की तैनाती के लिए निदेशक या उप निदेशक की ओर से प्रस्ताव भेजा जाता है। इन संस्तुतियों पर विचार करने के बाद इन्हें शासन को अग्रसारित करते हैं। जिन पार्कों में तैनाती नहीं हुई है, वहां के निदेशक या उप निदेशक ने आज तक ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है। फिर तैनाती का सवाल ही कहां से आता है।
- एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव/ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक

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