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पति ने 10 रु. के शपथपत्र पर लिखकर भेजा तीन तलाक, सुप्रीम कोर्ट पहुंची पीड़िता

Wed, 01 Feb 2017 07:43 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 01 Feb 2017 07:43 PM IST
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wife reached supreme court against teen talaq
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : SELF

देशभर में तीन तलाक को लेकर छिड़ी बहस के बीच हरिद्वार के सुल्तानपुर की एक पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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मामले में ससुराल पक्ष सहित केंद्रीय कानून, महिला एवं बाल कल्याण, अल्पसंख्यक मंत्रालय और दारुल उलूम देवबंद को पक्षकार बनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर 16 फरवरी तक सभी पक्षकारों को तलब किया है। तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाला उत्तराखंड से यह पहला मामला है।
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सुल्तानपुर निवासी मजहर हसन ने अपनी बेटी अतिया साबरी की शादी 25 मार्च 2012 में जसोदरपुर गांव निवासी वाजिद अली पुत्र नसीर अहमद के साथ की थी। अतिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि ससुराल पक्ष शादी के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित कर रहा था। दो बेटियां सादिया और सना के पैदा होने पर उनका अत्याचार और बढ़ गया।

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ससुराल पक्ष ने मारपीट कर घर से निकाल दिया

wife reached supreme court against teen talaq
beaten - फोटो : demo pic

आरोप है कि 13 नवंबर 2015 को ससुराल पक्ष ने अतिया के साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया। इसके बाद से वह अपने मायके में रहती आ रही है। दो महीने पहले अतिया के भाई रिजवान साबरी की संस्था साबरी फरीदी विकास समिति के सुल्तानपुर स्थित कार्यालय में एक तलाकनामा भेजा गया।

जिसमें दो नवंबर 2015 की तारीख में एक 10 रुपये के शपथ पत्र पर तीन बार तलाक लिखकर भेजा गया। दारुल उलूम देवबंद का एक फतवा भी तलाकनामें के साथ लगाया गया। अचानक पिछले साल तलाक की जानकारी मिलने पर अतिया साबरी ने अपने अधिवक्ता राजेश पाठक, अभिषेक चक्रवर्ती और मुकेश जैन के जरिये सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की।
       
अतिया साबरी का कहना है कि जब निकाह के वक्त पति पत्नी दोनों की सहमति जरूरी है तो तलाक एक तरफ कैसे हो सकती है। अतिया ने कहा कि यह तलाकनामा उसे रिसीव तक नहीं हुआ है।       

दारुल उलूम देवबंद ने भी नहीं जाना पक्ष      
तीन तलाक को लेकर ससुराल पक्ष के अलावा दारुल उलूम देवबंद ने भी पीड़िता का पक्ष नहीं जाना और तलाक को वैध ठहरा दिया। दरअसल ससुराल पक्ष ने दारुल उलूम को भेजी गई चिट्ठी में कुछ शर्मनाक आरोप लगाए थे, लेकिन दो नवंबर 2015 को ही तलाकनामा और इसी तारीख को देवबंद का तलाकनामा जारी होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट को दारुल उलूम से भी अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।

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