मिस्त्री पति ने दिया साथ, पत्नी बनी KV में टीचर
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17 साल की उम्र में जब राजकुमारी की शादी हुई तो वह महज दसवीं पास थीं। डर था कि गरीब परिवार में शादी के बाद पढ़ाई का सपना पूरा नहीं कर पाएंगी।
साइकिल मिस्त्री पति ने साथ दिया तो परिवार संभालने के साथ राजकुमारी के सपने परवान चढ़ने लगे। अब वह केंद्रीय विद्यालय में बतौर संविदा शिक्षिका पढ़ाती हैं और परिवार का सहारा बनी हैं।
देहरादून की बलबीर रोड स्थित एसबीआई कॉलोनी में एक कोठी में बतौर केयरटेकर रहने वाले राजकुमारी के परिवार को फख्र है कि उनकी बहू उनके जीवन का सहारा बन गई है।
राजकुमारी ने बताया कि वर्ष 1999 में जब शादी हुई थी तो पति सत्यनारायण पाल सीएमआई अस्पताल के बाहर साइकिल ठीक करने का काम करते थे।
शादी के बाद उन्होंने पत्नी को पढ़ाने का फैसला लिया। राजकुमारी ने एमकेपी इंटर कालेज में 11वीं में दाखिला लिया। 12वीं के बाद उन्होंने एमकेपी महाविद्यालय से मनोविज्ञान में एमए किया।
इसके बाद दृष्टि बाधित बच्चों के लिए विशेष बीएड किया। नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स करने के बाद वह केंद्रीय विद्यालय आईडीपीएल में संविदा शिक्षिका हैं।
प्रसव के 20 घंटे बाद दी बोर्ड परीक्षा
पति सत्यनारायण का कहना है कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उन्होंने जिस लगन से पत्नी को पढ़ने के लिए प्रेरित किया, वह उतनी ही कामयाब हुई और उनका सहारा बन गई।
राजकुमारी में पढ़ने का जज्बा इतना था कि प्रसव के 20 घंटे बाद ही परीक्षा देने चली गई। जब उनका बेटा पैदा हुआ तो उनकी 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं। प्रसव के बावजूद राजकुमारी ने परीक्षा नहीं छोड़ी। बताया कि बेटा पैदा होने के बाद अगले दिन उन्होंने परीक्षा दी और पास हुई।
बीमारी के कारण पति का काम छुड़वाया
राजकुमारी के पति सत्यनारायण पाल को साइकिल मिस्त्री का काम करते-करते एग्जिमा हो गया। इस वजह से राजकुमारी ने उनका काम छुड़वा दिया। अब दोनों फुर्सत मिलने पर रंगोली डेकोरेशन का काम करते हैं।
पीसीएस अफसर बनना चाहती हैं राजकुमारी
राजकुमारी पीसीएस अफसर बनना चाहती हैं। इन दिनों एक संस्थान में इसकी तैयारी कर रही हैं। बताया कि वह दिन-रात मेहनत करती हैं।
एक बेटा और बेटी की पढ़ाई भी देखती हैं और पढ़ाती एवं पढ़ती भी हैं। गर्मियों की छुट्टियों में समर कैंप लगाती हैं। इन सबके बावजूद वह पीसीएस की तैयारी कर रही हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी।