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पहचान की दरकार, नहीं बदले बुनकरों के हालात

Mon, 28 Dec 2015 11:08 AM IST
सुषमा पाठक/ अमर उजाला, देहरादून
सुषमा पाठक/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 28 Dec 2015 11:08 AM IST
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weavers facing problem.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारसी साड़ियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान दिलाने के वादे, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किए गए तमाम दावों के बाद भी बनारसी साड़ी उद्योग गति नहीं पकड़ रहा है।

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बनारसी साड़ियों के मंद होते बाजार से बुनकरों के हालात गहराते जा रहे हैं और बनारसी साड़ी को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की आस भी धुंधली होने लगी है। यह पीड़ा है बनारस से नेशनल हैंडलूम एक्सपो में दून आए बुनकरों की। सरकार की ओर से बुनकरों के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उनके हालात जस के तस हैं।
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बनारस के अलहुमा हैंडलूम के जुनैद बताते हैं कि अब बनारसी साड़ियों का चलन कम हो गया है। शादियों में अब जरदोजी, स्टोन इंब्रॉयडरी सिल्क के महंगे लहंगों का चलन बढ़ा है। इस कारण बनारसी साड़ी का कारोबार प्रभावित हुआ है। मॉर्डन दुल्हनों की पसंद को देखते हुए अब लहंगा स्टाइल डबल कलर में बनारसी साड़ियां व बनारसी सूट तैयार किए जा रहे हैं।
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पप्पू बनारसी ने कहा कि बनारसी साड़ियों के व्यवसाय को आज तक सही प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाया। बनारसी साड़ियों की सेल है, लेकिन इसमें खास प्रॉफिट नहीं है। जफीर भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं। बकौल, जफीर हम शो रूम का महंगा किराया नहीं दे सकते ऐसे में अपने उत्पाद को बाजार में लाने के लिए ऐसे एक्सपो का इंतजार करते हैं। उन्होंने कहा कि लोग नकली सिल्क के नाम से बनारसी सिल्क की सेल कर रहे हैं। ऐसे में बुनकरों का नुकसान होता है।

रविवार को उमड़ी खरीददारों की भीड़
परेड ग्राउंड में लगे नेशनल हैंडलूम एक्सपो के तीसरे दिन रविवार को काफी संख्या में लोग खरीददारी के लिए पहुंचे। राजस्थान की रजाई, कश्मीर की पश्मीना शॉल, बनारसी साड़ी और कांजीवरम साड़ियों को लोगों ने खूब पसंद किया।

वहीं, उत्तराखंड के हाथ के बुने हुए स्वेटर, होममेड नमकीन, मंडवे का आटा, लाल चावल और हिमाचली टोपी-मफलर भी लोगों को खूब भाए। एक्सपो में सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों के कुछ व्यापारी अभी अपनी स्टाल नहीं लगा पाए। बताया जा रहा है कि मौसम खराब होने से व्यापारी दून नहीं पहुंच पाए।

यह है खास

- स्टॉल नंबर 61, 56 और 25 पर बनारसी साड़ियों का स्टाल। यहां सिल्क ब्रोकेड, सिल्क पर पैच बॉर्डर, इंब्रॉयडरी स्टोन लगी बनारसी साड़ियों की ढेरों वैरायटी मौजूद हैं।
- स्टॉल नंबर 72 पर आर्टिफिशियल धागे से बने सिल्क की साड़ी और प्योर सिल्क की साड़ी महिलाओं को खूब भा रही है।
- स्टॉल नंबर 114 और सात पर कर्नाटक के रमेश बाबू नायडू व सैम ने उप्पाडा कांजीवरम सिल्क की डेढ़ और दो लाख की महंगी साड़ियां रखी हैं। इसमें डेढ़ लाख की सिलवर जरी की साड़ी और दो लाख की गोल्डन जरी की साड़ी खास है।  

- एक्सपो में चमोली से रमेश नेगी चौलाई (रामदाना) के बिस्कुट समेत कई क्षेत्रीय खाद्य सामग्री लेकर पहुंचे हैं। रामदाना के बिस्कुट की कीमत 200 रुपए प्रति किलोग्राम रखी गई है।

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