Weather Today: कुमाऊं में 53 सड़कें बंद, घरों में घुसा बाढ़ का पानी, करीब 80 परिवार प्रभावित
- खटीमा में करंट की चपेट में आने से राजमिस्त्री की मौत
- बागेश्वर में सड़कों के बंद होने से बढ़ने लगी राशन की किल्लत
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बारिश के कहर से पहाड़ के लोग सहमे हुए हैं। मलबा आने से जहां-तहां सड़कें बंद हैं। इससे बागेश्वर में राशन की किल्लत भी होने लगी है। तराई में बैगुल समेत कई नदियां उफान पर हैं। बाढ़ का पानी लोगों में घरों में घुस गया है। खटीमा में करंट की चपेट में आने से एक राजमिस्त्री की मौत हो गई। खटीमा क्षेत्र में बीते 24 घंटों के दौरान रिकॉर्ड 153 एमएम बारिश हुई। बृहस्पतिवार रात से शुक्रवार सुबह तक हुई झमाझम बारिश से बैगुल नदी उफान पर है।
इससे सितारगंज नगर और शक्तिफार्म के अरविंदनगर ग्राम सभा के सात नंबर और आठ नंबर गांवों के करीब 80 परिवारों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। सूखी नदी का पानी आने से टैगोरनगर गांव के करीब 20 परिवारों के घर जलमग्न हो गए। निकासी न होने के कारण नगर क्षेत्र के वार्ड तीन और चार के 40 परिवार प्रभावित हैं। तहसीलदार जगमोहन त्रिपाठी ने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ अरविंदनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर वहां के 80 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा।
खटीमा के वार्ड संख्या 13 खेतलसंडा खाम में तेज बारिश के दौरान शुक्रवार सुबह एलटी लाइन पर सागौन का पेड़ गिर गया। इससे टूटे तार में दौड़ रहे करंट की चपेट में आने से राजमिस्त्री कालू शाना (35) पुत्र मोहम्मद शाना की मौत हो गई। हादसे के वक्त वह पेड़ की टहनी को हटा रहा था।
सड़कों के बंद होने से बागेश्वर जिले में कपकोट विकासखंड के कीमू, गोगिना क्षेत्र में आवश्यक सामान की किल्लत होने लगी है। हालांकि, इन इलाकों में सितंबर तक का राशन पहले ही पहुंचा दिया गया था। बागेश्वर जिले में मूसलाधार बारिश के दौरान सिमाली, कज्यूली तथा हरिनगरी में तीन मकान ध्वस्त हो गए। वहीं, सिलंगतोली में एक मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया।
जिले में 40 गांवों में बिजली आपूर्ति ठप है। तीन दिन पहले पिथौरागढ़ जिले में लाइन क्षतिग्रस्त होने से इन गांवों की आपूर्ति भंग हो गई थी। उधर, सोमेश्वर घाटी और आसपास के क्षेत्रों में विद्युत विभाग नौ घंटे बाद आपूर्ति सुचारु कर सका। यहां बृहस्पतिवार सुबह 10:40 बजे करीब चार दर्जन से अधिक गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। गरुड़ गंगा, गोमती और लाहुर नदी के उफान में आने से कई गांवों की पेयजल योजनाएं ठप हो गईं हैं। रानीखेत में गनियाद्योली से कुछ आगे एक कल्वर्ट क्षतिग्रस्त हो गया है। कलवर्ट के नीचे की दीवार पूरी तरह से बह गई है। खग्यार में एक मकान को क्षति पहुंची है।
इधर, भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार सुबह खैरना में एक बोलेरो की छत पर पत्थर गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। वाहन स्वामी गरमपानी से खैरना टैक्सी स्टैंड की तरफ आ रहा था। कोसी में सिल्ट आने से पंप नहीं चले। इस कारण अल्मोड़ा शहर की 20 हजार की आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कुमाऊं में 53 सड़कें बंद, दिन भर कटा रहा धारचूला का पिथौरागढ़ से संपर्क
कुमाऊं में बारिश और मलबे से करीब 53 सड़कें बंद हैं। इमें 17 सड़कें बागेश्वर, 30 पिथौरागढ़ और 6 सड़कें चंपावत जिले की हैं। पिथौरागढ़ में लखनपुर के पास सड़क बंद होने से धारचूला का जिला मुख्यालय से दिनभर संपर्क कटा रहा।
इस कारण कुमाऊं कमिश्नर अरविंद सिंह ह्यांकी पिथौरागढ़ नहीं आ पाए। शाम करीब छह बजे सड़क खुल पाई। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग शुक्रवार को पांच घंटे बंद रहा। मार्ग बंद होने से टनकपुर से पिथौरागढ़ जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जा रहे शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय भी दस मिनट के लिए चल्थी से स्वांला के बीच में फंसे रहे। इस दौरान 30 से अधिक वाहन भी मार्ग पर फंसे रहे।
वहीं, घाट-पिथौरागढ़ सड़क बृहस्पतिवार रात से 12 घंटे से अधिक समय तक बंद रही। शुक्रवार दिन में 12 बजे सड़क खुल पाई। थल-मुनस्यारी सड़क नया बस्ती में बृहस्पतिवार की रात मलबा आने से 12 घंटे बंद रही। सड़क शुक्रवार को नौ बजे खुली। बारिश के कारण अल्मोड़ा-घाट-पिथौरागढ़ मार्ग मकड़ाऊं के पास करीब चार घंटे तक बंद रहा, जबकि खैरना-रानीखेत-मोहान मार्ग भी बंद पड़ा है। लगातार पत्थर गिरने से इस मार्ग को नहीं खोला जा सका है। हालांकि खैरना से सीधे रानीखेत जाने वाला मुख्य मार्ग खुला है।