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Weather Today : यमुनोत्री धाम में सीजन का पहला हिमपात, केदारनाथ में भी गिरी बर्फ

Mon, 26 Oct 2020 10:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, बड़कोट/रुद्रप्रयाग। 
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, बड़कोट/रुद्रप्रयाग।  Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 26 Oct 2020 10:28 PM IST
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Weather Forecast Today Update in Uttarakhand News: snowfall in yamunotri dham
यमुनोत्रीधाम में सीजन की पहली बर्फबारी - फोटो : amar ujala

सोमवार को अचानक मौसम बदला और यमुनोत्री धाम में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। बर्फबारी होने से तीर्थ पुरोहितों और यहां पहुंचे यात्रियों के चेहरे खिल गए। बर्फ गिरने से धाम में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वहीं केदारनाथ में भी दोपहर बाद हल्की बर्फबारी हुई।

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सोमवार सुबह चटक धूप खिली लेकिन दोपहर बाद मौसम बदला और साढ़े बारह बजे यमुनोत्री धाम में बर्फबारी शुरू हो गई। अचानक बर्फबारी होने पर तीर्थयात्रियों और तीर्थ पुरोहितों के चेहरे खिल उठे।
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यात्रियों ने बर्फबारी का खूब लुत्फ उठाया। तीर्थ पुरोहित अनोज उनियाल, प्रदीप उनियाल आदि ने बताया कि इस सीजन में यह यमुनोत्री में पहला हिमपात है। धाम में करीब आधा घंटे तक बर्फबारी हुई।
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हालांकि बर्फ जमी नहीं लेकिन कड़ाके की ठंड होने लगी है। वहीं केदारनाथ में अपराह्न 3 बजे के बाद हल्की बर्फबारी शुरू हो गई, जो लगभग आधा घंटे तक रही। शीत हवा के कारण धाम में ठंड बढ़ गई है।

पुनर्निर्माण कार्य कर रही वुड स्टोन कंस्ट्रक्शन कंपनी के टीम प्रभारी कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट ने बताया कि दस दिनों से ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। सुबह के समय तापमान कम होने और शीतलहर से ठंड अधिक है। शाम होते ही पाला गिरने से तापमान कम हो रहा है। 

चीन सीमा से लगे बुग्यालों से लौटने लगे भेड़पालक

धारचूला (पिथौरागढ़) में शीतकाल शुरू होते ही भेड़पालक चीन सीमा से सटे बुग्यालों से घाटियों की ओर लौटने लगे हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों से लौटकर भेड़पालक भेड़ों को लेकर अब तराई भाबर के जंगलों में जाएंगे। धारचूला के व्यास और दारमा घाटियों के 21 गांवों के लोग हर साल माइग्रेशन पर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित अपने मूल गांवों में जाते हैं।

इन गांवों में से अधिकांश ग्रामीणों का व्यवसाय ऊनी कारोबार से जुड़ा होने के कारण भेड़ पालन भी करते है। भेड़पालक हर साल बर्फ पिघलते ही प्रवास पर उच्च हिमालयी क्षेत्रों का रुख करते हैं। इसके बाद अक्तूबर तक प्रवास पर हिमालयी क्षेत्रों में स्थित बुग्यालों में भेड़ें चराते हैं। इस दौरान भेड़पालक चीन सीमा के निकटवर्ती बुग्यालों तक जाते हैं। व्यास घाटी में ज्योलिंगकांग और दारमा घाटी में पंचाचूली की तलहटी तक पहुंच जाते हैं।

जैसे ही अक्तूबर से बर्फबारी शुरू होती है भेड़पालक भेड़ों के साथ निचले इलाकों को लौटने लगते हैं। शीतकाल में सभी भेड़ पालक तराई भाबर के जंगलों में रहते हैं। भेड़पालक मान सिंह ने बताया कि वह तिदांग के ढाबे बुग्याल से भेड़ों के साथ 10 दिन में धारचूला पहुंचे हैं। अब एक माह में तराई के जंगलों में पहुंच जाएंगे। भेड़पालक हाइवे में ट्रैफिक कम होने पर रात में चलना अधिक पसंद करते हैं।

हल्द्वानी की रातें नैनीताल और मुक्तेश्वर से भी ज्यादा सर्द

मौसम में परिवर्तन की वजह से मैदानी इलाकों में रात के समय सामान्य से ज्यादा ठंड हो रही है। न्यूनतम तापमान में भी असामान्य रूप से गिरावट दर्ज की जा रही है। आलम यह है कि रात के समय तापमान मैदानी इलाकों में पहाड़ी इलाकों से भी नीचे चला जा रहा है।

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार, हल्द्वानी में सोमवार को न्यूनतम तापमान 10.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री कम है। वहीं अधिकतम तापमान 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा। इधर, नैनीताल में सोमवार को न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रहा और मुक्तेश्वर में न्यूनतम तापमान 10.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हल्द्वानी का न्यूनतम तापमान मुक्तेश्वर और नैनीताल से भी कम है। हल्द्वानी और अन्य मैदानी इलाकों में रात के समय ठंडी हवाएं चल रहीं हैं।

राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि मौसम साफ होने की वजह से दिन में तापमान अधिक हो रहा है। रात और दिन के तापमान में काफी अंतर है। दिन और रात के तापमान में 18 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा का अंतर सामान्य अंतर नहीं होता, जिसे मानव शरीर ज्यादा जल्दी स्वीकार नहीं कर पाता और हम बीमार पड़ जाते हैं। 

इधर, जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक आरके सिंह ने बताया कि पश्चिम से आ रही हवाओं और ला नीना के शुरुआती दौर की वजह से तापमान में गिरावट आई है। इसलिए मैदानी इलाकों में दिन और रात के तापमान में गिरावट चल रही है।

बुजुर्ग रखें ज्यादा ख्याल
डॉ. संदीप राज सक्सेना का कहना है कि इस समय दिन में गर्मी और रात को ज्यादा ठंड पड़ रही है, इसलिए बुजुर्गों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। सुबह टहलने के  दौरान हल्के गर्म कपड़े जरूर पहनें। साथ ही गर्म सूप आदि का सेवन करें।

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