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उत्तराखंड में जमीन के नीचे मिले कुई अद्भुत जलकुंड

Wed, 19 Aug 2015 09:13 AM IST
गणेश उपाध्याय/ अमर उजाला, बागेश्वर
गणेश उपाध्याय/ अमर उजाला, बागेश्वर Updated Wed, 19 Aug 2015 09:13 AM IST
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water Reservoirs found in bageshwar uttarakhand.

उत्तराखंड में सड़क चौड़ीकरण के दौरान जमीन के नीचे अद्भुत जलकुंड मिले हैं। पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट स्थित पाताल भुवनेश्वर की गुफा की तरह ही बागेश्वर जिले के पैठाण ग्राम पंचायत के अठपैसिया तोक में भी सड़क चौड़ा करने के लिए की जा रही खुदाई के वक्त एक मनोरम गुफा मिली है।

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गुफा के भीतर जलकुंड और उसके बराबर में शिवलिंग का आभास कराती शिला भी है जिस पर पानी टपक रहा है। दीवारों पर भगवान गणेश और नागों समेत कई तरह की आकृतियां बनी हुई हैं। खुदाई के दौरान गुफा मिलने की खबर का पता चलते ही इसे देखने वालों का तांता लग गया। गुफा के सड़क से लगे होने के कारण पल्ला कमस्यार क्षेत्र में पर्यटन की नई उमीद जग गई है।
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बागेश्वर से करीब 50 किमी दूर अठपैसिया में कांडा रावतसेरा-बांस पटान सड़क के चौड़ीकरण का काम चल रहा है। रविवार को जेसीबी से पहाड़ की खुदाई हो रही थी। तभी वहां से गुजर रहे कपूरी गांव के हिमांशु राठौर की नजर पहाड़ी में बने एक बड़े से गड्ढे पर पड़ी। वह उस स्थान पर गया और वहां से कुछ पत्थर हटाए। उसे वहां एक गुफा नजर आई।

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शिवलिंग का आभास कराती शिला भी गुफा में मौजूद

water Reservoirs found in bageshwar uttarakhand.

हिमांशु के साथ जीप चालक नितिन रावत भी था। हिम्मत कर दोनों युवा अंदर पहुंचे तो उन्हें वहां 14 मीटर लंबी और चार मीटर चौड़ी मनोरम गुफा दिखाई दी। गुफा के भीतर करीब चार मीटर लंबा, तीन मीटर चौड़ा, तीन फीट गहरा जलकुंड और इसी के बराबर में शिवलिंग का आभास कराती शिला थी, जिस पर पानी टपक रहा है।

गुफा के भीतर गणेश, अन्य देवी-देवताओं, नाग और गाय के थन की आकृतियां बनी हुई थी। गुफा में जाने के लिए सड़क से चार मीटर नीचे उतरना पड़ता है। गुफा में एक साथ पांच से सात लोग आ-जा सकते हैं। बाहर आकर युवकों ने आसपास के लोगों को गुफा के बारे में बताया।

इसके बाद वहां लोगों का तांता लग गया और पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि यहां से भद्रकाली माता की गुफा एक किमी दूर है। यह स्थल पाताल भुवनेश्वर क्षेत्र की पहाड़ी से जुड़ा है।
 
विधायक ललित फर्स्वाण ने कहा कि उन्होंने पर्यटन अधिकारी को मौके पर जाकर पर्यटन की संभावनाओं का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। वह खुद भी मौके पर जाएंगे। गुफा को संवारने के हर संभव प्रयास होंगे।

संस्कृति विभाग के अन्वेषण सहायक चंद्र सिंह चौहान ने कहा कि वह गुफा को फिलहाल प्राकृतिक ही कह सकते हैं। जिला प्रशासन का निर्देश मिलते ही वह गुफा का मुआयना करेंगे।

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