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Dehradun News: सूख रही फसल, फट रहा किसानों का कलेजा
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Iअमलावा नदी के उफान पर आने से क्षतिग्रस्त हुई थी नहरI
जडवाला खेड़े में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। फसल सूख रही है। चिंता से किसानों का कलेजा फट रहा है। किसान नई फसल के लिए बुवाई भी नहीं कर पा रहे हैं। बारिश में अमलावा नदी के उफान पर आने से जडवाला खेड़ा हाईड्रम योजना क्षतिग्रस्त हो गई थी। क्षेत्र के करीब 50 काश्तकार लगातार लघु सिंचाई विभाग से सिंचाई नहर की मरम्मत की मांग कर रहे हैं।
अमलावा नदी से जडवाला खेड़ा हाईड्रम योजना जुड़ी है। नहर से करीब 50 बीघा कृषि भूमि सिंचित होती है। पानुवा, मलेथा, अलसी चामडी आदि गांवों के 30 बड़े और 20 छोटे किसान खेतों में सिंचाई के लिए नहर के पानी पर ही निर्भर हैं। किसान आलू, प्याज, टमाटर, मूली, मटर, गोभी, हरा धनिया, धान, गेंहू, अदरक, सहित कई तरह की नगदी फसल और व मोटा अनाज उगाते हैं।
पिछले साल अमलावा नदी के रौद्र रूप धारण करने के बाद सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। सिंचाई विभाग ने नहर की मरम्मत कर पानी की आपूर्ति को सुचारू कर दिया था, लेकिन मानसून में एक बार फिर नहर का हेड क्षतिग्रस्त हो गया। अब नहर में पानी नहीं चढ़ने से किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। खेतों में खड़ी फसल सूख रही है। अदरक का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। किसान पानी न मिलने के चलते मटर और लहसुन की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं।
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Iवर्जन
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Iबारिश के दौरान नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से मरम्मत नहीं हुई है। खेतों में खड़ी फसल सिंचाई न होने से सूख रही है। नई फसल की बुवाई भी नहीं हो पा रही है। नहर समय से ठीक नहीं कराया गया तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
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Iराजेश राठौर, किसान
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Iसिंचाई के अभाव में फसल पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ेगा। नहर को ठीक करना बहुत जरूरी है। यदि समय से नहर की मरम्मत नहीं की गई तो किसानों पर संकट आ जाएगा।
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Iअर्जुन सिंह, किसान
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Iकिसान खेती के लिए पूरी तरह सिंचाई पर निर्भर है। फसल सूख रही है। नई फसल की बुवाई के लिए पानी जरूरत होगी। सिंचाई विभाग को परेशानी को समझते हुए जल्द नहर की मरम्मत करवानी चाहिए।
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Iभूपाल सिंह, किसानI
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जडवाला खेड़े में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। फसल सूख रही है। चिंता से किसानों का कलेजा फट रहा है। किसान नई फसल के लिए बुवाई भी नहीं कर पा रहे हैं। बारिश में अमलावा नदी के उफान पर आने से जडवाला खेड़ा हाईड्रम योजना क्षतिग्रस्त हो गई थी। क्षेत्र के करीब 50 काश्तकार लगातार लघु सिंचाई विभाग से सिंचाई नहर की मरम्मत की मांग कर रहे हैं।
अमलावा नदी से जडवाला खेड़ा हाईड्रम योजना जुड़ी है। नहर से करीब 50 बीघा कृषि भूमि सिंचित होती है। पानुवा, मलेथा, अलसी चामडी आदि गांवों के 30 बड़े और 20 छोटे किसान खेतों में सिंचाई के लिए नहर के पानी पर ही निर्भर हैं। किसान आलू, प्याज, टमाटर, मूली, मटर, गोभी, हरा धनिया, धान, गेंहू, अदरक, सहित कई तरह की नगदी फसल और व मोटा अनाज उगाते हैं।
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पिछले साल अमलावा नदी के रौद्र रूप धारण करने के बाद सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। सिंचाई विभाग ने नहर की मरम्मत कर पानी की आपूर्ति को सुचारू कर दिया था, लेकिन मानसून में एक बार फिर नहर का हेड क्षतिग्रस्त हो गया। अब नहर में पानी नहीं चढ़ने से किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। खेतों में खड़ी फसल सूख रही है। अदरक का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। किसान पानी न मिलने के चलते मटर और लहसुन की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं।
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Iबारिश के दौरान नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से मरम्मत नहीं हुई है। खेतों में खड़ी फसल सिंचाई न होने से सूख रही है। नई फसल की बुवाई भी नहीं हो पा रही है। नहर समय से ठीक नहीं कराया गया तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
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Iराजेश राठौर, किसान
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Iसिंचाई के अभाव में फसल पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ेगा। नहर को ठीक करना बहुत जरूरी है। यदि समय से नहर की मरम्मत नहीं की गई तो किसानों पर संकट आ जाएगा।
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Iअर्जुन सिंह, किसान
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Iकिसान खेती के लिए पूरी तरह सिंचाई पर निर्भर है। फसल सूख रही है। नई फसल की बुवाई के लिए पानी जरूरत होगी। सिंचाई विभाग को परेशानी को समझते हुए जल्द नहर की मरम्मत करवानी चाहिए।
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Iभूपाल सिंह, किसानI