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जल निगम ने नहीं ली सुध तो लोगों ने सुधारी पेयजल लाइन
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साहिया में क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन और चैंबर की मरम्मत करते लोग।
- फोटो : VIKAS NAGAR
साहिया। जल निगम ने साहिया नेवी में सालों से बदहाल पड़ी पेयजल लाइन की सुध नहीं ली तो ग्रामीण खुद ही रिंच, फावड़ा और प्लास्टिक के पाइप लेकर निकल पड़े। ग्रामीणों ने पांच घंटे की मेहनत से पेयजल लाइन को दुरुस्त कर दिया। इससे गांव के नलों में फिर से पानी आना शुरू हो गया।
ग्रामीणों ने बताया कि 20 साल पूर्व जल निगम ने जवाबा खड्ड से गांव के लिए पेयजल लाइन बिछाई थी, जो मरम्मत के अभाव में खस्ताहाल हो चुकी है। वर्तमान में पेयजल लाइन ग्राम पंचायत के हैंडओवर है, लेकिन ग्राम पंचायत ने भी लाइन की मरम्मत नहीं कराई। बीते तीन साल में ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों के साथ लाइन मरम्मत के लिए कई बार पत्राचार किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तीन दिन पूर्व गांव में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। ग्रामीणों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा था। वहीं, निवर्तमान ग्राम प्रधान मोहन शर्मा का कहना है कि ग्राम पंचायत के पास इतनी धनराशि नहीं कि लाइन की मरम्मत करा सके।
ऐसे में ग्रामीणों ने खुद के खर्चे पर पेयजल लाइन की मरम्मत करने की ठानी। रविवार सुबह 7 बजे से ही ग्रामीण श्रमदान में जुट गए। ग्रामीणों ने वाटर टैंक में जमा मिट्टी को निकालने के साथ ही पांच घंटे की मेहनत से क्षतिग्रस्त लाइन को प्लास्टिक के पाइपों से बदल दिया। इसके बाद गांव में फिर से पेयजल आपूर्ति सुचारु हो गई। श्रमदान करने वालों में नारायण दत्त शर्मा, नरेश शर्मा, संजय शर्मा, शुभम, प्रियांशु, अमीर चंद, मातवर आदि शामिल रहे।
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ग्रामीणों ने बताया कि 20 साल पूर्व जल निगम ने जवाबा खड्ड से गांव के लिए पेयजल लाइन बिछाई थी, जो मरम्मत के अभाव में खस्ताहाल हो चुकी है। वर्तमान में पेयजल लाइन ग्राम पंचायत के हैंडओवर है, लेकिन ग्राम पंचायत ने भी लाइन की मरम्मत नहीं कराई। बीते तीन साल में ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों के साथ लाइन मरम्मत के लिए कई बार पत्राचार किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तीन दिन पूर्व गांव में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। ग्रामीणों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा था। वहीं, निवर्तमान ग्राम प्रधान मोहन शर्मा का कहना है कि ग्राम पंचायत के पास इतनी धनराशि नहीं कि लाइन की मरम्मत करा सके।
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ऐसे में ग्रामीणों ने खुद के खर्चे पर पेयजल लाइन की मरम्मत करने की ठानी। रविवार सुबह 7 बजे से ही ग्रामीण श्रमदान में जुट गए। ग्रामीणों ने वाटर टैंक में जमा मिट्टी को निकालने के साथ ही पांच घंटे की मेहनत से क्षतिग्रस्त लाइन को प्लास्टिक के पाइपों से बदल दिया। इसके बाद गांव में फिर से पेयजल आपूर्ति सुचारु हो गई। श्रमदान करने वालों में नारायण दत्त शर्मा, नरेश शर्मा, संजय शर्मा, शुभम, प्रियांशु, अमीर चंद, मातवर आदि शामिल रहे।
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