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संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों को वार्डवार सौंपी गई जिम्मेदारियां
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देहरादून। राजधानी दून समेत पूरे उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के इलाज के लिए तैयारियों तेज कर दी हैं। राजकीय दून अस्पताल और महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में तैयार किए गए कोविड-केयर सेंटर में भर्ती संक्रमित मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सभी वार्डों में अलग-अलग डॉक्टरों की अगुवाई में पैरामेडिकल और स्टाफ नर्स की तैनाती कर दी गई है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुुतोष सयाना ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के सभी प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों और सीनियर रेजीडेंट को अलग-अलग वार्डों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दून अस्पताल में संचालित आयुष्मान वार्ड, प्राइवेट वार्ड समेत सभी 17 कोरोना वार्डों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को अलग-अलग वार्ड की जिम्मेदारियां सौंपी गई है। इन वार्डों में भर्ती सभी कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी संबंधित वार्ड के डॉक्टर की होगी। डॉ. एनएस खत्री की अगुवाई में डॉक्टरों का एक विशेषज्ञ पैनल भी गठित किया गया है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए नए डॉक्टरों की भर्ती के लिए निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अनुमति मांगी गई है। जैसे ही निर्वाचन आयोग से अनुमति जाती है तत्काल में डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी। ताकि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दून किया जा सके।
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुुतोष सयाना ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के सभी प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों और सीनियर रेजीडेंट को अलग-अलग वार्डों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दून अस्पताल में संचालित आयुष्मान वार्ड, प्राइवेट वार्ड समेत सभी 17 कोरोना वार्डों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को अलग-अलग वार्ड की जिम्मेदारियां सौंपी गई है। इन वार्डों में भर्ती सभी कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी संबंधित वार्ड के डॉक्टर की होगी। डॉ. एनएस खत्री की अगुवाई में डॉक्टरों का एक विशेषज्ञ पैनल भी गठित किया गया है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए नए डॉक्टरों की भर्ती के लिए निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अनुमति मांगी गई है। जैसे ही निर्वाचन आयोग से अनुमति जाती है तत्काल में डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी। ताकि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दून किया जा सके।
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