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वीपीडीओ भर्ती धांधली: UKSSSC के पूर्व परीक्षा नियंत्रक राजेंद्र पोखरिया की जमानत याचिका खारिज

Thu, 23 Feb 2023 09:51 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 23 Feb 2023 09:51 PM IST
सार

उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग की ओर से मार्च 2016 में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी चयन परीक्षा करवाई गई थी। परीक्षा का परिणाम 30 मार्च 2016 को घोषित किया गया था।

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VPDO Recruitment Scam: Uksssc former Controller of Examination Rajendra Pokharia Bail plea rejected
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) भर्ती धांधली के आरोपी उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग के पूर्व परीक्षा नियंत्रक राजेंद्र पोखरिया की जमानत याचिका स्पेशल विजिलेंस जज चंद्रमणि राय की अदालत ने खारिज कर दी है। आरोपी को जांच के बाद एसटीएफ ने आठ अक्तूबर 2022 को आयोग के पूर्व अध्यक्ष आरबीएस रावत, सचिव मनोहर कन्याल के साथ गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में बंद है।

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विदित है कि उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग की ओर से मार्च 2016 में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी चयन परीक्षा करवाई गई थी। परीक्षा का परिणाम 30 मार्च 2016 को घोषित किया गया था। विभिन्न शिकायतों के आधार पर परीक्षा में धांधली के मद्देनजर तत्कालीन अपर सचिव की अध्यक्षता में वर्ष 2017 में एक जांच समिति गठित की थी। जांच समिति की ओर से अनियमितताओं की पुष्टि करने के बाद भर्ती परीक्षा निरस्त कर दी गई और जांच विजिलेंस को सौंप दी गई थी।

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2022 में एसटीएफ को सौंपी थी जांच
इसके बाद अगस्त 2022 में विजिलेंस से जांच हटाकर एसटीएफ को सौंप दी गई। एसटीएफ ने जांच के बाद आठ मार्च को मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष आरबीएस रावत, सचिव मनोहर कन्याल और पूर्व परीक्षा नियंत्रक राजेंद्र पोखरिया को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

आरोपी पूर्व परीक्षा नियंत्रक राजेंद्र पोखरिया की ओर से अपने अधिवक्ता के माध्यम से विजिलेंस की स्पेशल कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोपी का कहना था कि उसका अपराध से कोई लेना देना नहीं है। उसके खिलाफ कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए हैं।

उसे केवल विवेचना के दौरान झूठे गवाह संकलित कर मात्र बयानों के आधार पर आरोपी बनाया गया है। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अपराध को गंभीर प्रवृति का बताया। कहा कि आरोपी के इस कृत्य से आयोग को संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है।

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