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VPDO Recruitment: पेपर लीक की दागी कंपनी को आरबीएस रावत ने दी थी आयोग में एंट्री, विवादों से घिरा रहा कार्यकाल

Sun, 09 Oct 2022 04:23 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 09 Oct 2022 04:23 PM IST
सार

वीपीडीओ भर्ती गड़बड़ी में जेल जाने वाले पूर्व अध्यक्ष आरबीएस रावत के बतौर अध्यक्ष कार्यकाल में कई विवाद सामने आए। उन्होंने राजधानी के एक होटल में प्रेस वार्ता कर बाकायदा अपने इस्तीफे की जानकारी दी। बावजूद इसके अध्यक्ष की कुर्सी पर वह करीब सात महीने तक जमे रहे।
 

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VPDO Recruitment RBS Rawat gave entry in commission to tainted company of paper leak Uttarakhand news in hindi
आरबीएस रावत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वन विभाग के पूर्व मुखिया आरबीएस रावत का अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। पेपर लीक की दागी कंपनी आरएमएस की एंट्री आरबीएस रावत ने ही आयोग में अध्यक्ष रहते कराई थी। वहीं, वीपीडीओ भर्ती पर विवाद होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया था लेकिन स्वीकार न होने के चलते वह सात महीने तक कुर्सी पर जमे रहे।

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वीपीडीओ भर्ती गड़बड़ी में जेल जाने वाले पूर्व अध्यक्ष आरबीएस रावत के बतौर अध्यक्ष कार्यकाल में कई विवाद सामने आए। 2014 में आयोग की स्थापना के साथ ही आरबीएस रावत को अध्यक्ष बनाया गया। 2016 में आयोग ने पहली बड़ी परीक्षा वीपीडीओ भर्ती की कराई थी, जिसमें गड़बड़ी सामने आई।
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विवाद बढ़ा तो सरकार के दबाव में अध्यक्ष आरबीएस रावत ने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राजधानी के एक होटल में प्रेस वार्ता कर बाकायदा अपने इस्तीफे की जानकारी दी। बावजूद इसके अध्यक्ष की कुर्सी पर वह करीब सात महीने तक जमे रहे।

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विभिन्न भर्तियों में पेपर लीक की दागी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन कंपनी को भी आरबीएस रावत के कार्यकाल में ही आयोग और उत्तराखंड में एंट्री दी गई थी। बताया जाता है कि इससे पहले कंपनी का क्या प्रोफाइल था, वह कितना काम कर चुकी थी या नहीं, इस पर ध्यान ही नहीं दिया गया। आयोग के सदस्यों के साथ ही विवाद के चलते भी वह चर्चाओं में रहे।

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सचिव-परीक्षा नियंत्रक की भूमिका भी थी संदेह में
अधीनस्थ सेेवा चयन आयोग के सचिव एमएस कन्याल और परीक्षा नियंत्रक राजेंद्र पोखरियाल की भूमिका शुरू से ही संदेह के घेरे में थी। जिस जगह पर ओएमआर शीट की स्कैनिंग की गई थी, वहां न तो कोई कैमरा था और न ही कोई गोपनीयता। जबकि स्कैनिंग की पूरी जानकारी सीसीटीवी में होनी चाहिए थी। परीक्षा के आयोजन पर सचिव व परीक्षा नियंत्रक सवालों के घेरे में आए थे। उसी दौरान यह चर्चा भी आम होती थी कि एक अधिकारी झोले में ओएमआर शीट लेकर घूमता था।

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