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Dehradun News: किशोऊ बांध के विरोध में तहसील पर गरजे ग्रामीण, 24 को चक्का जाम की चेतावनी
Sat, 19 Sep 2026 11:30 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Sat, 19 Sep 2026 11:30 PM IST
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किशोऊ बांध निर्माण के विरोध में प्रभावित ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। किशोऊ बांध प्रभावित जनकल्याण संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों ने तहसील मुख्यालय कालसी में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान समिति ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर आगामी 24 सितंबर को कोटी-क्वानू-मीनस मार्ग पर चक्का जाम और विशाल धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
प्रदर्शनकारियों ने बांध निर्माण को लेकर छह राज्यों के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर कड़ी आपत्ति जताई है। ग्रामीणों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जन्मभूमि नहीं छोड़ना चाहते हैं और सरकार को बांध का निर्माण स्थल बदलना ही होगा।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष सूर्य प्रताप सिंह चौहान और संरक्षक मुन्ना सिंह राणा ने एसडीएम को बताया कि पूर्व में क्वानू से त्यूनी की ओर सर्वे करने पर सहमति बनी थी, लेकिन शासन-प्रशासन ने उस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की। अब सरकार क्वानू में ही बांध बनाने पर अड़ी हुई है। यदि यहां बांध बनता है, तो ग्रामीणों की उपजाऊ कृषि भूमि, खेत-खलिहान और पुश्तैनी घर पूरी तरह से डूब क्षेत्र (सबमर्जेंस जोन) में आ जाएंगे।
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संस्कृति और पहचान बचाने की गुहार
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, उनकी मुख्य मांग सिर्फ बांध का स्थल बदलने की है। ऐसा होने से उनकी पौराणिक संस्कृति, जौनसारी धरोहर और पहचान सुरक्षित रहेगी। ग्रामीण अपनी जीवनभर की कमाई और परिसंपत्तियों को यूं ही पानी में डूबने नहीं दे सकते। इस विरोध प्रदर्शन में समिति के तमाम पदाधिकारियों और ग्रामीणों के साथ रुद्र सेना के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी भी मुख्य रूप से शामिल रहे।
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प्रदर्शनकारियों ने बांध निर्माण को लेकर छह राज्यों के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर कड़ी आपत्ति जताई है। ग्रामीणों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जन्मभूमि नहीं छोड़ना चाहते हैं और सरकार को बांध का निर्माण स्थल बदलना ही होगा।
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संघर्ष समिति के अध्यक्ष सूर्य प्रताप सिंह चौहान और संरक्षक मुन्ना सिंह राणा ने एसडीएम को बताया कि पूर्व में क्वानू से त्यूनी की ओर सर्वे करने पर सहमति बनी थी, लेकिन शासन-प्रशासन ने उस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की। अब सरकार क्वानू में ही बांध बनाने पर अड़ी हुई है। यदि यहां बांध बनता है, तो ग्रामीणों की उपजाऊ कृषि भूमि, खेत-खलिहान और पुश्तैनी घर पूरी तरह से डूब क्षेत्र (सबमर्जेंस जोन) में आ जाएंगे।
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संस्कृति और पहचान बचाने की गुहार
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, उनकी मुख्य मांग सिर्फ बांध का स्थल बदलने की है। ऐसा होने से उनकी पौराणिक संस्कृति, जौनसारी धरोहर और पहचान सुरक्षित रहेगी। ग्रामीण अपनी जीवनभर की कमाई और परिसंपत्तियों को यूं ही पानी में डूबने नहीं दे सकते। इस विरोध प्रदर्शन में समिति के तमाम पदाधिकारियों और ग्रामीणों के साथ रुद्र सेना के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी भी मुख्य रूप से शामिल रहे।