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उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के पूर्व कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा को विजिलेंस टीम ने किया गिरफ्तार

Mon, 03 Dec 2018 05:25 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 03 Dec 2018 05:25 PM IST
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Vigilance Team Arrested  Uttarakhand ayurved university Ex registrar Mrityunjay mishra 
डा. मृत्युंजय मिश्रा

आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कई घोटालों और वित्तीय अनियमितताओें के आरोप में सोमवार को बहुचर्चित पूर्व कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा को विजिलेंस ने गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही हमेशा विवादों में रहने के बावजूद हर जांच में पाक-साफ साबित होने वाले मृत्युंजय के अजेय रहने का भ्रमजाल भी टूट गया।

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मिश्रा के खिलाफ इसी साल जुलाई में शासन के आदेश पर विजिलेंस ने खुली जांच की थी। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद विजिलेंस ने मृत्युंजय मिश्रा के खिलाफ पिछले माह मुकदमा दर्ज किया था।
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विजलेंस के मुताबिक जांच में फर्जी यात्रा बिल, खरीद फरोख्त में गड़बड़ी के जरिए करीब एक करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और जालसाजी के आरोपों की पुष्टि हुई है। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम ने उनके घर और विवि में भी छानबीन की। मिश्रा को मंगलवार को अदालत में पेश किया जाएगा। 

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कुलसचिव रहते मृत्युंजय मिश्रा कई आरोपों से घिरे थे

गौरतलब है कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव रहते मृत्युंजय मिश्रा कई आरोपों से घिरे थे। इनमें ज्यादातर मामले वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ही थे। इस पर विवि के कुलपति के आदेश पर अप्रैल माह में एक आंतरिक जांच की गई, जिसमें आरोपों की पुष्टि हुई थी।

इस पर उन्होंने शासन को वैधानिक जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद शासन ने जुलाई में विजिलेंस के देहरादून सेक्टर को मृत्युंजय मिश्रा से जुड़े इन मामलों की जांच सौंपी और तीन माह में रिपोर्ट भेजने को कहा था।

विजिलेंस के देहरादून सेक्टर एसपी प्रमोद कुमार ने बताया कि जांच में आरोप सही पाए गए। जांच में पाया गया कि उन्होंने साल 2013 से 2017 तक कुलसचिव रहते कई फर्जी यात्राएं दिखाईं और उनका धन अपने खातों में ले लिया।

देर रात तक चली तलाशी

इसके अलावा उन्होंने विवि के लिए जो सामान मंगवाया, उसके भुगतान के लिए आपूर्तिकर्ताओं के फर्जी खाते खुलवाए। इन खातों में सामान के बिल का पैसा बढ़ा-चढ़ाकर मंगाया गया। इन खातों में जमा हुई राशि में से 32 लाख 15 हजार रुपये बाद में मिश्रा के खातों में ट्रांसफर हुए। इसके साथ ही सामान के आपूर्तिकर्ताओं के साथ सांठगांठ कर अपने परिवार वालों के खातों में नगद व बैंक चेक के माध्यम से 68.02 लाख रुपये जमा कराए। कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले का आरोप है।

एसपी प्रमोद कुमार ने बताया कि जांच पूरी करने के बाद नवंबर के प्रथम सप्ताह में शासन को रिपोर्ट सौंपकर मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने के बाद मिश्रा व अन्य के खिलाफ 17 नवंबर को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षडयंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 व 471 (कूटरचना से संबंधित) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। शासन के आदेश पर ही सोमवार शाम चार बजे मिश्रा को ईसी रोड स्थित एक कैफे से गिरफ्तार कर लिया गया। विजिलेंस टीम ने उनके घर पर भी छापेमारी की है। समाचार लिखने तक घर में तलाशी चल रही थी। 

घर से कई पासबुक व दस्तावेज मिले

विजिलेंस टीम ने ईसी रोड स्थित उनके घर पर छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हासिल किए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें कई बैंकों की पासबुक और संपत्ति से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। हालांकि, यह संपत्ति किसकी है और कब कब खरीदी गई?  इनका जांच के बाद ही पता चल पाएगा। एसपी विजिलेंस प्रमोद कुमार ने बताया कि उनके कई और ठिकानों पर भी छापेमारी की जाएगी।

गोपनीयता का फार्मूला फिर कारगर
राज्य सरकार को अस्थिर करने के मामले में एक चैनल संचालक उमेश शर्मा को गिरफ्तार करने में दून पुलिस ने गोपनीयता के जिस फार्मूले का इस्तेमाल किया था, विजलेंस ने मृत्युंजय को गिरफ्तार करने में भी यही फार्मूला अपनाया। हर जगह तक पहुंच बनाने में कामयाब मृत्युंजय इस बार विजलेंस क्या कर रही है, भांप ही नहीं पाए।

रविवार को वे किसी से पूरे भरोसे से कह रहे थे कि विजलेंस की जांच तीन महीने में पूरी होनी थी, अभी तक नहीं हो पाई। उस वक्त तक उन्हें नहीं पता था कि जांच पूरी हो गई और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। जब वे पूरे भरोसे से यह कहते फिर रहे थे कि उनकी गिरफ्तारी का कोई ग्राउंड नहीं है, उसी वक्त विजलेंस ने उन्हें धर दबोचा। 

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