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Dehradun News: सतर्कता आयोग की जांच आरटीआई के दायरे में नहीं
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देहरादून। उत्तराखंड सूचना आयोग ने कहा है कि सतर्कता आयोग पूरी तरह सूचना के अधिकार के अंतर्गत नहीं आता। इससे केवल वही सूचनाएं आरटीआई कानून के अंतर्गत मांगी जा सकती हैं जो भ्रष्टाचार या मानवाधिकार के मामलों से जुड़ी हुई हैं।
सूचना आयुक्त कुशलानंद कोठियाल ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सतर्कता आयोग को सूचना अधिकार की धारा 24 के अंतर्गत विशेष छूट प्राप्त है। अदालतों के कुछ निर्णयों से भी यह स्पष्ट हुआ है कि सतर्कता आयोग के जरिए चल रही जांच के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि कोई मामला सुरक्षा विभाग के किसी अधिकारी के भ्रष्टाचार या मानवाधिकार से जुड़ा हुआ है तो इससे संबंधित सूचना दी जा सकती है।
ऊधमसिंह नगर के एक व्यक्ति ने सतर्कता आयोग के जरिये अपने ही विरुद्ध चल रही जांच के बारे में कुछ जानकारी मांगी थी। विभाग में आरटीआई डालकर उन्होंने अब तक हुई कार्रवाई के बारे में कुछ सूचनाएं मांगी थी लेकिन सतर्कता आयोग ने अपनी गोपनीयता को आधार बताकर सूचना देने से इनकार कर दिया।
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अपीलकर्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि उन्होंने जो जानकारी मांगी थी, वह स्वयं उनसे संबंधित हैं और यह राष्ट्र की सुरक्षा या किसी गोपनीयता को भंग नहीं करता है, इसलिए यह जानकारी आरटीआई के माध्यम से उन्हें दी जा सकती है। हालांकि, आयोग ने अपीलकर्ता के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
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कानून को निष्प्रभावी नहीं बना सकते
राज्य सूचना आयुक्त कुशलानंद कोठियाल ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आसूचना संगठनों से केवल मानवाधिकार उल्लंघन और भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में ही जानकारी मांगी जा सकती है। अन्य सूचनाओं को सार्वजनिक करने से सतर्कता आयोग जैसे संगठनों को आसूचना संगठन घोषित करने वाली अधिसूचना निष्प्रभावी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, इसलिए अपीलकर्ता को मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं।
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सूचना आयुक्त कुशलानंद कोठियाल ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सतर्कता आयोग को सूचना अधिकार की धारा 24 के अंतर्गत विशेष छूट प्राप्त है। अदालतों के कुछ निर्णयों से भी यह स्पष्ट हुआ है कि सतर्कता आयोग के जरिए चल रही जांच के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि कोई मामला सुरक्षा विभाग के किसी अधिकारी के भ्रष्टाचार या मानवाधिकार से जुड़ा हुआ है तो इससे संबंधित सूचना दी जा सकती है।
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ऊधमसिंह नगर के एक व्यक्ति ने सतर्कता आयोग के जरिये अपने ही विरुद्ध चल रही जांच के बारे में कुछ जानकारी मांगी थी। विभाग में आरटीआई डालकर उन्होंने अब तक हुई कार्रवाई के बारे में कुछ सूचनाएं मांगी थी लेकिन सतर्कता आयोग ने अपनी गोपनीयता को आधार बताकर सूचना देने से इनकार कर दिया।
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अपीलकर्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि उन्होंने जो जानकारी मांगी थी, वह स्वयं उनसे संबंधित हैं और यह राष्ट्र की सुरक्षा या किसी गोपनीयता को भंग नहीं करता है, इसलिए यह जानकारी आरटीआई के माध्यम से उन्हें दी जा सकती है। हालांकि, आयोग ने अपीलकर्ता के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
कानून को निष्प्रभावी नहीं बना सकते
राज्य सूचना आयुक्त कुशलानंद कोठियाल ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आसूचना संगठनों से केवल मानवाधिकार उल्लंघन और भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में ही जानकारी मांगी जा सकती है। अन्य सूचनाओं को सार्वजनिक करने से सतर्कता आयोग जैसे संगठनों को आसूचना संगठन घोषित करने वाली अधिसूचना निष्प्रभावी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, इसलिए अपीलकर्ता को मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं।