वीरों के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करे उत्तराखंड सरकार : वेंकैया नायडू
- कुंजा बहादरपुर पहुंचकर बोले उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू- मैं वीरों की धरती पर आकर धन्य हो गया
- कहा- वीरों के बलिदान को देश कभी नहीं भूलेगा, राजा विजय सिंह की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
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विस्तार
‘आज मैं वीरों की धरती पर आकर धन्य हो गया। राजा विजय सिंह और यहां के ग्रामीणों के बलिदान को देश कभी भुला नहीं सकता है। मैं ऐसे वीरों को नमन करता हूं, जिन्होंने सबसे पहले देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया। इनके बिना देश का इतिहास अधूरा है। ऐसे वीरों के इतिहास को उत्तराखंड सरकार पाठ्यक्रम में शामिल करे ताकि आनी वाली पीढ़ी को इनके बारे में पता लग सके।’ ये बातें शनिवार को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने देश की आजादी के लिए सबसे पहले बिगुल फूंकने वाले कुंजा बहादरपुर गांव पहुंचकर कहीं।
यहां श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की आजादी के लिए कुंजा बहादरपुर गांव का इतिहास सबसे पुराना है। वर्ष 1822 में शहीद राजा विजय सिंह और उनके सेनापति ने ग्रामीणों के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका था। राजा विजय सिंह ने आजादी की लड़ाई शुरू करने के दौरान ही आजादी की घोषणा कर दी थी।
कहा कि जब मैंने यह वीरगाथा सुनी तभी यहां आने का मन बना लिया था। यह मेरा सौभाग्य है कि मैं आज यहां हूं। यह हमारा सौभाग्य है कि देश को ऐसे वीर मिले। देश में कहीं भी जाऊंगा तो वीरों के गांव और राजा विजय सिंह समेत सभी वीरों की बहादुरी के किस्से लोगों को जरूर बताऊंगा। कहा कि राजा विजय सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी की लड़ाई के लिए ग्रामीणों की फौज तैयार की थी। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों के साथ आजादी के लड़ाई लड़ी।
अंग्रेजों ने क्रूरता के साथ सभी वीरों को सुनहरा गांव स्थित पेड़ पर फांसी पर लटका दिया था। देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूल सकता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि शहीदों के परिवार के लिए उत्तराखंड सरकार को उनको सम्मानित करना चाहिए। उत्तराखंड वीरों की भूमि है। यहां के कई वीरों ने देश की आजादी में अपना बलिदान दिया है।
आज भी यहां के वीर सेना में भर्ती होकर बॉर्डर पर अपनी वीरता का परिचय दे रहे हैं। राज्य सरकार को इनकी वीरगाथा कॉलेज और स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए ताकि नई पीढ़ी को मातृभाषा और वीरों की कहानी का ज्ञान हो सके। इसके बाद उपराष्ट्रपति ने शहीद राजा विजय सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया।
अंग्रेजी नहीं बुरी, लेकिन मातृभाषा भी जरूरी
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि अंग्रेजी भाषा बुरी नहीं है, लेकिन हमें अपनी मातृभाषा जरूरी आनी चाहिए। मातृभाषा ही हमारी पहचान है। आज देश बदल रहा है। भारतीय और क्षेत्रीय पारंपरिक खाने को भुलाया जा रहा है। इनकी जगह फास्टफूड ने ले ली है। पर हमें अपने पारंपरिक व्यंजनों को भूलना नहीं चाहिए। हमें राष्ट्र के प्रति समर्पित रहकर महिलाओं को सम्मान देना चाहिए।
अयोध्या फैसले पर बोले- देश ने एकता की मिसाल पेश की
उपराष्ट्रपति ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इसे हटाकर एक अच्छा कार्य किया है। इससे वहां रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। अयोध्या में रामंदिर के फैसले पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का देश की जनता ने सम्मान किया है। देश की जनता ने फैसले पर एकता की मिसाल पेश की है। देश के लिए ऐसी एकता जरूरी है।
राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री और सीएम रहे मौजूद
इस दौरान मंच पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, उच्च शिक्षा एवं सहकारिता राज्यमंत्री धन सिंह रावत, विधायक प्रदीप बत्रा, देशराज कर्णवाल, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, ममता राकेश के अलावा स्वामी कर्मवीर, शहीद राजा विजय सिंह स्मारक एवं कन्या शिक्षा प्रसार समिति के अध्यक्ष धर्मपाल सिंह मौजूद रहे।
शहीद राजा विजय सिंह के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ेगी प्रदेश सरकार : सीएम
श्रद्धाजंलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि शहीद राजा विजय सिंह और 152 शहीदों के सम्मान में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। सड़कों का जाल बिछाकर क्षेत्र में विकास के मार्ग खोले जाएंगे। कुछ सड़कों को केंद्र सरकार से मांगा जाएगा। जल्द ही तीन नई सड़कों के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा जबकि अन्य सड़कें प्रदेश सरकार अपनी ओर से बनाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा विजय सिंह और उनके सेनापति ने पहली बार वर्ष 1822 में आजादी के लिए सेना बनानी शुरू कर दी थी। राजा विजय सिंह ने सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, बिजनौर तक घूमकर एक हजार जवान तैयार किए थे। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया। तीन अक्तूबर 1824 को अंग्रेजों ने सुनहरा गांव में 152 शहीदों को बरगद के पेड़ पर फांसी पर लटका दिया था। उनके इस बलिदान को देश कभी भुला नहीं सकता है।
उन्होंने कहा कि झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल ने देश की पहली क्रांति को इतिहास में दर्ज कराने का विधानसभा में प्रश्न लगाया था। इस पर कार्रवाई शुरू हो गई है। इसके साथ प्रदेश सरकार ने सुनहरा में वट वृक्ष के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 54 लाख रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि उत्तराखंड वीरों की भूमि है।
राजा विजय सिंह ने देश की रक्षा और आजादी के लिए सेना तैयार की और अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया। इसलिए यह इतिहास में दर्ज होना चाहिए। ऐसे वीरों से हमें सीख लेनी चाहिए। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि कुंजा बहादरपुर से आजादी की पहली क्रांति शुरू हुई थी। वीरों ने मातृभूमि पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इसके लिए देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
शहीदों के परिवार के सदस्य रहे मौजूद
श्रद्धांजलि सभा के दौरान शहीदों के परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उपराष्ट्रपति ने शहीदों के परिवार के सदस्यों समेत अन्य लोगों से भी मुलाकात की।
समिति ने भेंट किया गंगाजल
स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति की ओर से उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, राज्यापाल बेबी रानी मौर्य, उच्च शिक्षा एवं सहकारिता राज्यमंत्री धन सिंह रावत को गंगाजल भेंट किया गया। साथ ही कुंजा बहादरपुर की क्रांति की पुस्तक भी उपराष्ट्रपति को भेंट की गई। मौके पर समिति के अनिल कुमार, टीटू, रामकुमार, कुलदीप, शिवकुमार, तेजपाल, आजाद, प्रमोद, ओमकुमार, जितेंद्र मौजूद रहे।
उपराष्ट्रपति ने 32 मिनट दिया संबोधन
उपराष्ट्रपति कुंजा बहादरपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम स्थल पर 10:16 बजे पर पहुंचे। यहां उन्होंने 10:42 बजे मंच से सभा को संबोधित करना शुरू किया। उन्होंने मंच से 11:10 बजे तक अपना संबोधन दिया। इसके बाद वह 11:15 बजे से मंच से नीचे आए और लोगों से मुलाकात की। 11:22 बजे वह सभा स्थल से रवाना हो गए।
दो बार हुआ राष्ट्रगान
कार्यक्रम की शुरुआत उपराष्ट्रपति के मंच पर पहुंचने से हुई। कार्यक्रम शुरू होने से पूर्व राष्ट्रगान गाया गया। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद दोबारा राष्टगान गाया गया।
यूपीईएस के दीक्षांत समारोह में पहुंचे उपराष्ट्रपति
इसके बाद दोपहर तीन बजे उपराष्ट्रपति देहरादून स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज के दीक्षांत समारोह में पहुंचे। विवि के 17वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावतद भी समारोह में मौजूद रहे।
समारोह में 13 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल से नवाजा गया। आज कुल 80 कोर्स के 3741 स्टूडेंट्स को डिग्री दी गई। इसमें 29 पीएचडी, 1215 ग्रेजुएट और 2497 पोस्ट ग्रेजुएट शामिल हैं। कुल 85 को मेडल और ट्रॉफी दी गई।
सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम
उनके आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। डीआईजी अजय रौतेला, डीएम दीपेंद्र चौधरी, एसएसपी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस ने अधिकारियों की बैठक लेकर सुरक्षा संबंधी दिशा निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने बीईजी परिसर में बने हेलीपैड से कुंजा बहादरपुर गांव तक फुल ड्रेस रिहर्सल किया। इस बीच सुरक्षा व्यवस्था में खामियां होने पर उन्हें दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।
कहा कि उपराष्ट्रपति की सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसका विशेष ध्यान रहे। इसके बाद अधिकारियों ने बीईजी परिसर स्थित हेलीपैड का जायजा लिया। इस दौरान दिल्ली से आए सुरक्षा अधिकारियों ने भी हेलीकॉप्टर से लैंडिंग का रिहर्सल कर सुरक्षा का जायजा लिया।
एक शिक्षण संस्थान के दीक्षांत समारोह में भी भाग लेंगे
उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू के शनिवार को प्रस्तावित आगमन को लेकर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार की अगुवाई में शुक्रवार को मिनट टू मिनट फुल ड्रेस रिहर्सल हुई। डीजी ने कहा कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी सतर्क और सजग रहें। लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उपराष्ट्रपति के भ्रमण के दौरान प्रेमनगर और बल्लूपुर आने और जाने वाला यातायात डायवर्ट रहा।
हेलीकॉप्टर से आईएमए परिसर में उतरने के बाद उपराष्ट्रपति का वीवीआईपी काफिला सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल तक गया। डीजी अशोक कुमार ने शुक्रवार को ड्यूटी पर लगाए गए पुलिस बल को ब्रीफ किया।
डीजी ने कहा कि रूट प्रभारी सुनिश्चित कर लें कि वीवीआईपी फ्लीट के मार्ग पर किसी भी प्रकार की निर्माण सामग्री न पड़ी हो, ताकि मूवमेंट के दौरान किसी तरह की दिक्कत न आने पाए। इसके बाद पुलिस बल की मिनट टू मिनट फुल ड्रेस रिहर्सल कराई गई। शाम को पुलिस बल की डी ब्रीफिंग की गई। उप राष्ट्रपति के भ्रमण के दौरान प्रेमनगर और बल्लूपुर का यातायात डायवर्ट रहा।