{"_id":"b03d06e098e2677a8324adafee0ea5c6","slug":"vehicle-registration-in-rto-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपके वाहन पर रहेगी दिल्ली की नजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपके वाहन पर रहेगी दिल्ली की नजर
मनमीत रावत / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 05 Feb 2015 12:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपके वाहनों पर दिल्ली की नजर रहेगी। आप देश के किसी भी आरटीओ दफ्तर में अपने वाहन पंजीकृत कराएं, लेकिन उसके डाटा दिल्ली में मौजूद महा सर्वर में मौजूद रहेंगे।
विज्ञापन
जरूरत पड़ने पर यहीं से पूरा डाटा खंगाल लिया जाएगा। यहीं से देश भर के सभी 1008 संभागीय परिवहन कार्यालयों पर केंद्र की नजर रहेगी। योजना मार्च से शुरू हो जाएगी। आतंकवाद से सुरक्षा के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने यह योजना शुरू की है।
विज्ञापन
सभी स्थानीय आरटीओ कार्यालयों को अपना सर्वर समाप्त करने का आदेश दिया गया है। आरटीओ कार्यालयों को साफ्टवेयर डाउनलोड करने के साथ ही कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए एक मार्च तक का समय दिया गया है।
विज्ञापन
वाहन का पंजीकरण समेत ड्राइविंग लाइसेंस का डाटा
अभी तक स्थानीय आरटीओ कार्यालयों में किसी भी वाहन का पंजीकरण समेत ड्राइविंग लाइसेंस का डाटा सर्वर में रखा जाता है। इसमें मॉनिटरिंग (निगरानी) की समस्या होती है। मसलन, अगर कोई फर्जी दस्तावेजों से वाहनों का पंजीकरण कराता है या डीएल बनवाता है तो उसके पकड़े जाने की संभावना कम होती है।
अगर यही व्यक्ति भविष्य में कोई अपराध करता है या आतंकवादी गतिविधि में शामिल हो जाता तो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बने डीएल या पंजीकरण प्रमाण पत्र से उसकी तलाशी नहीं हो पाती। इसीलिए अब केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने तय किया है कि मुख्य सर्वर दिल्ली में रहेगा।
देश के किसी भी आरटीओ कार्यालय में जिस भी दस्तावेज का डाटा अपलोड किया जाएगा वह सीधे दिल्ली के सर्वर में आ जाएगा। अगर कोई दस्तावेज संदिग्ध लगेगा तो उसके बारे में संबंधित आरटीओ को बताया जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट का साफ्टवेयर स्थानीय आरटीओ कार्यालय में पहुंच गया है।
साफ्टवेयर के बारे में एक मार्च से पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाना है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) संदीप सैनी ने बताया कि परिवहन मुख्यालय की तरफ से कुछ ही दिनों में प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। आशा है कि दून आरटीओ कार्यालय मार्च से इस प्रोजेक्ट से जुड़ जाएगा।
अब नहीं खोजनी पड़ेगी फाइल
दून आरटीओ कार्यालय में भी अब डिजिटल डाटा बैंक बनाया जाएगा। चंडीगढ़ का मॉडल देखकर लौटे आरटीओ अधिकारियों ने डाटा बेस तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
यह व्यवस्था लागू होने से सालों पुराने दस्तावेज सुरक्षित हो जाएंगे और किसी दस्तावेज को कभी भी आसानी से खोजा जा सकेगा। अभी तक कई ऐसे दस्तावेज हैं, जिनको कंप्यूटर में अपलोड ही नहीं किया जाता है। लेकिन अब दस्तावेजों को स्कैन कर कंप्यूटर में अपलोड किया जाएगा।