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हिमालय की आदम जनजाति की महिलाओं और बच्चों को नहीं लग रहे टीके

Fri, 28 Apr 2017 09:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट (पिथौरागढ़)
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट (पिथौरागढ़) Updated Fri, 28 Apr 2017 09:16 AM IST
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Van rawat tribes do not know about Immunization
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हिमालय की आदम जनजाति वनरावतों को टीकाकरण के बारे में न तो कोई चेतना है और न ही वह इसका कोई महत्व जानते हैं। स्वास्थ्य के प्रति अज्ञानता और स्वास्थ्य विभाग की उपेक्षा के कारण वनरावतों के ज्यादातर बच्चे कुपोषण और बीमारी से ग्रसित हैं। देशव्यापी अभियान के बावजूद वनरावत गर्भवती महिलाएं और बच्चों को अब तक टीके नहीं लगाए जा सके हैं।

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वनरावतों के बच्चों और महिलाओं को टीकाकरण में बड़ी व्यावहारिक कठिनाई यह है कि कई गांवों से एएनएम सेंटर और अस्पतालों की दूरी 14 किलोमीटर तक है। वहीं, सेंट्रल हिमालया इनवायरमेंट एसोसिएशन (चिया) ने वनरावतों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाया है, इसमें चिया ने टीकाकरण को भी शामिल किया है।
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चिया ने तीन माह पहले जौलजीबी क्षेत्र के किमखोला, कुलेख में स्वास्थ्य शिविर लगाया था। इसमें उन्होंने यहां के लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर दवाएं बांटी थी। अब चिया ने वनरावतों के दो गांवों कूटाचौरानी और मदनपुरी में टीकाकरण के प्रति जागरूक करने का अभियान चलाया है। इन दोनों गांवों में महिलाओं की संख्या 30 और बच्चों की संख्या 60 है। गर्भवती महिलाओं की संख्या आठ है। इनमें से किसी को भी टीका नहीं लगा है। प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत की घटनाएं वनरावतों में ज्यादा होती हैं।
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वनरावतों के साथ विडंबना यह है कि उनमें शिक्षा का अभाव है। गरीबी बहुत अधिक है। रोज दो रोटी की चिंता में डूबे इन परिवारों को राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जाने वाले कार्यक्रमों की जानकारी नहीं रहती। वनरावत शेर सिंह स्वीकारते हैं कि अशिक्षा के कारण ही स्वास्थ्य की समस्याएं खड़ी होती हैं। वह मानते हैं कि यदि सरकारी तौर पर टीकाकरण के लिए घर पर ही सुविधा मिलती तो शायद लोग खुद ही इसके लिए आगे आ जाते। चिया के अध्यक्ष गिरीश जोशी का कहना है कि वनरावतों को टीकाकरण का महत्व बताया गया है। क्षेत्र में सर्वे कार्य किया जा रहा है। जल्दी ही टीकाकरण की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने कुटाचौरानी में वनरावतों की बैठक ली। उसमें मदनपुरी के लोग भी शामिल हुए। जल्दी ही चिया संस्था स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से इन गांवों में कैंप लगाएगी।

उपमुख्य चिकित्साधिकारी डा. उषा गुंज्याल ने बताया कि प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में हर हफ्ते टीकाकरण दिवस होता है। शिक्षा के अभाव में वनरावत स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं आते, इस कारण उनका टीकाकरण नहीं हो पाता।   

पोलियो खुराक बच्चों को घर पर मिलती है

Van rawat tribes do not know about Immunization
वनरावत जनजाति - फोटो : amarujala

वनरावतों को पोलियो खुराक पीने का महत्व मालूम नहीं है। यही कारण है कि वनरावत अपने बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए किसी बूथ पर नहीं ले जाते। बाद में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डोर-टू-डोर खुराक पिलाने का कार्यक्रम चलाया जाता है, उसका फायदा वनरावत बच्चों को भी मिल जाता है। 

95 फीसदी लोगों को टीकाकरण की सुविधा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जिले में गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों के टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। आशा कार्यकर्त्रियों, एएनएम के माध्यम से यह जागरूकता फैलाई जाती है। गर्भवती महिलाओं को अनिवार्य रूप से टिटनेस के दो टीके लगते हैं। पांच वर्ष की उम्र से नीचे के बच्चों को पोलियो खुराक दी जाती है। डेढ़ से पांच वर्ष की उम्र में बीजीसी, पांच वैक्सीन, पेंटावेलेंट, बूस्टर डोज लगाई जाती है। खसरा का टीका भी बच्चों को लगाया जाता है।

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