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Operation Silkyara: काम नहीं आया जीपीआर का फॉर्मूला, रिपोर्ट के बाद भी बाधाओं ने रोका रास्ता
Sat, 25 Nov 2023 09:43 PM IST
अलका त्यागी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
Published by: अलका त्यागी
Updated Sat, 25 Nov 2023 09:43 PM IST
सार
एनएचआईडीसीएल ने सुरंग के भीतर ऑगर मशीन को दोबारा शुरू करने से पहले जीपीआर मैपिंग का फार्मूला अपनाया। पारसन कंपनी के विशेषज्ञों को पाइप के माध्यम से मलबे के पास तक भेजा गया। उ
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सुरंग में बचाव अभियान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुरंग के भीतर की बाधाओं को देखने के लिए जियो फिजिकल तकनीक से मैपिंग का फार्मूला भी फेल हो गया। पारसन कंपनी ने जो रिपोर्ट दी थी, वह महज 1.5 से 2 मीटर बाद ही फेल हो गई। इससे जीपीआर पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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एनएचआईडीसीएल ने सुरंग के भीतर ऑगर मशीन को दोबारा शुरू करने से पहले जीपीआर मैपिंग का फार्मूला अपनाया। पारसन कंपनी के विशेषज्ञों को पाइप के माध्यम से मलबे के पास तक भेजा गया। उन्होंने 45 मिनट तक मैपिंग के बाद अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें बताया कि पांच मीटर तक कोई लोहे जैसी बाधा नहीं है।
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इस नाते बेफिक्री से मशीन चलाई गई जो आगे जाकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इससे जीपीआर मैपिंग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कहा जा रहा कि या तो मैपिंग ठीक से नहीं हुई या फिर मैपिंग का फार्मूला ही बेकार था। फिलहाल अधिकारी आगे की ऐसी किसी तकनीकी या विकल्प को लेकर खामोश हैं।
हैदराबाद से मशीन मंगाई
बचाव अभियान को और मजबूत बनाने के लिए मशीन मंगाने का सिलसिला जारी है। इस कड़ी में हैदराबाद से एक और ड्रिल मशीन मंगाई जा रही है। कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अभियान को परवान चढ़ाने के लिए ये मशीन मंगाई गई है।