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Silkyara Tunnel: आठ महीने में भी नहीं हटा भूस्खलन का मलबा, अब बनाई जा रही सुरंग के अंदर तीन और सुरंग

Fri, 26 Jul 2024 08:06 PM IST
अलका त्यागी अजय कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
अजय कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 26 Jul 2024 08:06 PM IST
सार

पिछले साल 12 नवंबर को चारधाम सड़क परियोजना में निर्माणाधीन 4.5 किमी लंबी सिलक्यारा पोलगांव सुरंग में भूस्खलन हुआ था, जिससे सुरंग के अंदर काम कर रहे 41 श्रमिक फंस गए थे।

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Uttarkashi three more tunnels are being built in Silkyara Tunnel for Remove Landslide debris
सिलक्यारा सुरंग के अंदर सुरंग बनाते कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में आठ माह बाद भी भूस्खलन का मलबा पूरी तरह नहीं हट पाया है। सुरंग के अंदर मलबा हटाने के लिए अब छोटी-छोटी सुरंगें बनाई जा रही है, जिनसे मलबे को बाहर निकाला जाएगा। कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि यह काम बेहद सावधानी के साथ विशेषज्ञों की निगरानी में किया जा रहा है।

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बता दें कि पिछले साल 12 नवंबर को चारधाम सड़क परियोजना में निर्माणाधीन 4.5 किमी लंबी सिलक्यारा पोलगांव सुरंग में भूस्खलन हुआ था, जिससे सुरंग के अंदर काम कर रहे 41 श्रमिक फंस गए थे। जिन्हें 17 दिन बाद सकुशल बाहर निकाला गया, लेकिन हादसे के बाद अभी तक सुरंग में आया मलबा नहीं हटाया जा सका है।
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मलबे को रसायनों की मदद से ठोस में बदलने के बाद इसी में छोटी-छोटी तीन सुरंगें बनाई जानी है। मलबे के दायीं तरफ से एक मीटर चौड़ी सुरंग बनाने का काम करीब 25 से 30 मीटर तक पूरा कर लिया गया है। इसके बाद बायीं ओर से भी निकासी सुरंग बनाई जाएगी। फिर मलबे के बीचोंबीच भी इसी तरह की सुरंग का निर्माण होगा।

एनएचआईडीसीएल के निदेशक अंशु मनीष खलको ने बताया कि इन निकासी सुरंगों को बनाने के लिए एक विशेष फ्रेम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे लगाने के बाद उतने हिस्से की कटिंग के बाद आगे बढ़ा जाता है। बताया कि तीनों सुरंगें एक साथ नहीं बनाई जा सकती है, इसलिए एक-एक कर सावधानी से काम किया जा रहा है।

ड्रिफ्ट टनल बनाने का काम सावधानी से किया जा रहा है। अब तक मलबे के दायीं ओर से ड्रिफ्ट टनल की खोदाई 25 से 30 मीटर तक कर ली गई है, जिसे करीब 62 मीटर तक खोदा जाएगा। इसके बाद बायीं ओर के साथ एक टनल मलबे के बीचोंबीच भी बनाई जाएगी।
-अंशु मनीष खलको, निदेशक, एनएचआईडीसीएल।

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