फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarkashi Disaster Despite restrictions of eco-sensitive zone construction is not stopping on river banks

Uttarkashi: ईको सेंसटिव जोन की बंदिशों के बाद भी नदियों किनारे हो रहा निर्माण, आपदाओं से हर वर्ष जूझना पड़ रहा

Mon, 15 Sep 2025 10:53 AM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 15 Sep 2025 10:53 AM IST
सार

नदी के 200 मीटर क्षेत्र के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं हो सकता है। लेकिन नदियों के किनारे होटल, रिजॉर्ट आदि के निर्माण पर किसी प्रकार की रोक नहीं लग पाई। ऐसे में हर साल आपदाओं की मार झेल पड़ रही है।

विज्ञापन
Uttarkashi Disaster Despite restrictions of eco-sensitive zone construction is not stopping on river banks
उत्तरकाशी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से गंगोत्री धाम तक 100 किमी लंबा क्षेत्र ईको सेंसटिव जोन के तहत अंतर्गत आता है। इसके तहत भागीरथी नदी और उसकी सहायक नदियों के जोन के नियम के तहत 200 मीटर के दायरे में किसी प्रकार का निर्माण नहीं हो सकता है। लेकिन इस क्षेत्र में अंधाधुंध निर्माण भी बड़ी आपदाओं का कारण बन रहा है।

विज्ञापन


मानसून सीजन में नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण इन निर्माणों पर खतरा मंडराने लगता है। लेकिन उसके बावजूद भी इस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होती है। वर्ष 2013 में गंगोत्री धाम से जनपद मुख्यालय तक के क्षेत्र को ईको सेंसटिव जोन घोषित किया गया था। इसका स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया था, लेकिन उसके बावजूद भी भी इसे इस क्षेत्र में लागू किया गया।
विज्ञापन


नदी के 200 मीटर क्षेत्र के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं हो सकता
उसके बाद नियमानुसार भागीरथी नदी के 200 मीटर क्षेत्र के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं हो सकता है। लेकिन नदियों के किनारे होटल, रिजॉर्ट आदि के निर्माण पर किसी प्रकार की रोक नहीं लग पाई। बड़े-बड़े आश्रमों से लेकर होटलों के साथ कई निर्माण होते रहे। यही कारण है कि भूकंप और आपदाओं के दृष्टिकोण से संवेदनशील उत्तरकाशी जनपद को हर वर्ष किसी न किसी आपदा से जूझना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें...Uttarakhand Politics: भाजपा की नई टीम; मंथन से बनाया गया संतुलन, युवा चेहरों पर किया गया भरोसा

धराली, हर्षिल क्षेत्र में आई आपदा के बाद उच्च न्यायालय ने भी जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग से ईको सेंसटिव जोन के नियमों के पालन पर जवाब तलब किया था। आपदाओं के बाद भी हर्षिल क्षेत्र से लेकर जनपद मुख्यालय तक कई स्थानों पर ऐसे निर्माण हो रहे हैं, जो कि नदी से 50 मीटर की दूरी पर भी नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed