फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarkashi Cloudburst debris of rocks will test the technology in Dharali too like Silkyara

उत्तरकाशी आपदा: 15 फीट नीचे दबे लोगों को तलाशना चुनौती, सिलक्यारा की तरह धराली में भी तकनीक की परीक्षा

Sat, 09 Aug 2025 02:26 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 09 Aug 2025 02:26 PM IST
सार

धराली आपदा में 15 फीट नीचे दबे लोगों को तलाशना बड़ी चुनौती है। 12 नवंबर 2023 को उत्तरकाशी में ही सिलक्यारा सुरंग में आए मलबे में 41 मजदूर फंस गए थे। इन्हें वहां से निकालने के लिए देश दुनिया की लगभग हर तकनीक का सहारा लिया गया था।

विज्ञापन
Uttarkashi Cloudburst debris of rocks will test the technology in Dharali too like Silkyara
उत्तरकाशी आपदा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सिलक्यारा सुरंग हादसे की तरह धराली में भी चट्टानों का मलबा आधुनिक तकनीकों की परीक्षा लेगा। आपदाग्रस्त क्षेत्र से अधिकांश जीवित लोगों को तो निकाल लिया गया है। मलबे में भी विभिन्न उपकरणों के सहारे जिंदगी की तलाश चल रही है मगर जो लोग कई फीट नीचे दब गए हैं उन्हें तलाशना बड़ी चुनौती है।

विज्ञापन

विशेषज्ञ मानते हैं कि 15 से 20 फीट नीचे मलबे में दबे लोगों को तलाशने में तकनीक भी ज्यादा कारगर साबित नहीं होगी। ऐसे में केवल मैन्युअली खोदाई करने के बाद ही लोगों को मलबे से निकाला जा सकता है। दरअसल, 12 नवंबर 2023 को उत्तरकाशी में ही सिलक्यारा सुरंग में आए मलबे में 41 मजदूर फंस गए थे। इन्हें वहां से निकालने के लिए देश दुनिया की लगभग हर तकनीक का सहारा लिया गया था। विश्व प्रसिद्ध ऑगर मशीन का भी सहारा लिया गया।

विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन



विदेश से विशेषज्ञों की एक टीम भी उत्तरकाशी पहुंची जिन्होंने अपने अनुभव से उस अंधेरी सुरंग में जिंदगियों को बचाने में अहम भूमिका निभाई। करीब 15 दिन चली जद्दोजहद के बाद आखिरकार कोयला खदानों को खोदने वाले हाथों की याद आई। रैट माइनर्स ने हाथों से खोदकर सुरंग के मलबे में रास्ता बनाया और सभी 41 मजदूरों को सकुशल बाहर निकाल लिया।

इसके बाद रैट मानइर्स की न सिर्फ भारत में बल्कि दुनियाभर में खूब चर्चाएं हुईं। इसी तरह धराली में मलबे में फंसे लोगों को खोजने के लिए कुछ अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग हो रहा है। इनमें थर्मल इमेजिंग कैमरा, रडार आदि शामिल हैं। ये सब तकनीकें जीवित लोगों को तलाशने में कारगर साबित होती हैं। मसलन थर्मल इमेजिंग कैमरा शरीर की गर्मी का पता लगाकर तस्वीरें बनाता है।

15 से 20 फीट मलबा पूरे मैदान पर फैला हुआ
इसी तरह कुछ ऐसे उपकरण भी हैं जो सांस, दिल की धड़कन, ऑक्सीजन आदि की पहचान कर मलबे में जीवित लोगों का पता लगा सकते हैं। धराली में अब चुनौतियां इससे अलग हैं। 15 से 20 फीट मलबा पूरे मैदान पर फैला हुआ है। गत मंगलवार को चंद सेकेंड के लिए आए 15 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से लाखों टन मलबे में बहुत से लोग पलक झपकते ही समा गए। अब यहां एक मैदान की तरह दिखता है जिस पर पानी भी बह रहा है।

ये भी पढ़ें...Chamoli News: मौसम साफ होने पर दो दिन बाद खुली फूलों की घाटी, घांघरिया में रुके 299 पर्यटक पहुंचे

विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने नीचे दबे लोगों को तलाशने के लिए ये तकनीकें बेहद कम कारगर साबित होंगी। इसके लिए वहां पर मशीनों और मजदूरों की मदद से थोड़ी-थोड़ी खोदाई कर ही मलबा हटाकर दबे लोगों को निकाला जा सकता है। डीआईजी एनडीआरएफ गंभीर सिंह चौहान ने बताया कि एनडीआरएफ और अन्य फोर्स के पास उपकरण काफी हैं लेकिन ये कितने कारगर साबित होते हैं इसका पता अभी कुछ समय बाद ही लग सकता है। यहां पर 15 से 20 फीट मलबा है। ऐसे में यहां इनके सफल होने की संभावना न के बराबर है। फिलहाल खोजी डॉग के माध्यम से वहां पर सर्च ऑपरेशन चल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed