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उत्तराखंड: हरीश रावत ने उठाए सवाल, कहा- क्या सरकार को शर्मसार नहीं करता कर्मकार बोर्ड घटनाक्रम
Sun, 03 Oct 2021 02:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 03 Oct 2021 02:28 PM IST
सार
हरीश रावत ने कहा कि कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष के सत्याल ने अपनी ही सरकार के मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यदि उनके आरोप गलत हैं तो पार्टी को सत्याल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।
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हरीश रावत और हरक सिंह रावत
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कर्मकार बोर्ड में लगे आरोपों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड में लगे आरोप क्या प्रदेश भाजपा सरकार को शर्मसार नहीं करते? उन्होंने बोर्ड में लगे आरोपों की जांच एसआईटी या विधानसभा समिति से कराने की मांग उठाई है।
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उन्होंने कहा कि बोर्ड के अध्यक्ष के सत्याल ने अपनी ही सरकार के मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यदि उनके आरोप गलत हैं तो पार्टी को सत्याल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। यदि पार्टी जांच या कार्रवाई नहीं करती है तो साफ है कि केंद्र सरकार की शह पर सरकार बोर्ड में लगे आरोपों पर पर्दा डालने का काम कर रही है। मजदूरों का हक मारकर कमीशन डकारने वालों को संरक्षण दे रही है।
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कर्मकार बोर्ड के कोष में जमा एक-एक पैसा मजदूरों व श्रमिकों का
हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर इस संबंध में एक पोस्ट लिखी। उन्होंने कहा कि कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाए गए सत्याल ने कई गंभीर आरोप कर्मकार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष, बोर्ड की सचिव और राज्य सरकार के श्रम मंत्री के ऊपर लगाए। कर्मकार बोर्ड के कोष में जमा एक-एक पैसा मजदूरों व श्रमिकों का है। कांग्रेस के शासनकाल में एक कानून बनाकर सैस के माध्यम से भवन निर्माण, पुल और दूसरे कार्यों में लगे हुये श्रमिकों की भलाई के लिए कोष एकत्र किये जाने का प्रावधान बनाया गया। हमारे राज्य में जहां केवल एक पंजीकृत व्यक्ति था।
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मेरी सरकार ने अभियान चलाकर दो लाख से ज्यादा श्रमिकों को पंजीकृत किया। लगभग 500 करोड़ रुपया इस कोष में एकत्र किया। जिसमें से 200 करोड़ रुपये तत्कालीन बोर्ड ने विभिन्न योजनाओं में खर्च किया। जिनमें श्रमिकों को कई तरीके की सुविधाएं, भवन व मकान निर्माण के लिए, साइकिल आदि खरीदने के लिए, चिकित्सा व बच्चों के विवाह आदि के लिए अनुदान की राशि के रूप में दिए गए। एक बड़ी राशि इस कोष में अवशेष थी। एक बार जब कोष इकट्ठा करने का विधान बन गया तो लगातार कोष में वृद्धि भी होती गई। उन्होंने अखबारों की खबरों के आधार पर कहा कि घटिया साइकिलें, घटिया सामग्री खरीदी गई।
उससे और गंभीर आरोप बोर्ड के अध्यक्ष सत्याल ने लगाए हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भी उस पर जांच आदि की बात कही। अब एक घटनाक्रम के तहत सत्याल को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है तो क्या कर्मकार बोर्ड में कोई घोटाले की यहीं पर इतिश्री मान ली जाए? क्या सत्याल के आरोप गलत सिद्ध हुए? यदि ऐसा कुछ नहीं हुआ है तो भाजपा की वर्तमान सरकार को या तो उन आरोपों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करनी चाहिए।
सत्याल कोर्ट गए तो सीएम और संगठन को देखना चाहिए : हरक
श्रम एवं ऊर्जा मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि कर्मकार बोर्ड के पुनर्गठन से अध्यक्ष पद से हटाए गए शमशेर सिंह सत्याल कोर्ट गए तो मुख्यमंत्री और पार्टी संगठन को देखना चाहिए। इसमें वे (हरक सिंह) कुछ नहीं कर सकता है। कोर्ट जाने का अधिकार सबका है। लेकिन सरकार ने ही सत्याल को अध्यक्ष पद नामित किया और सरकार ने ही बोर्ड का पुनर्गठन किया।
शनिवार को ऊर्जा भवन में आयोजित कार्यक्रम में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में श्रम एवं ऊर्जा मंत्री ने कहा कि मैंने सत्याल के खिलाफ कुछ नहीं कहा है। बोर्ड में जहां गलत हुआ है, उस पर मैंने बोल था। प्रदेश में पार्टी की सरकार है। पूर्व में सरकार ने सत्याल को बोर्ड अध्यक्ष पद नामित किया। सत्याल इस पद पर चुनाव जीत कर या परीक्षा पास कर नहीं आए हैं। अब सरकार ने बोर्ड का पुर्नगठन किया है। ऐसे में सरकार के फैसले के खिलाफ सत्याल कोर्ट गए तो इस पर मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को देखना चाहिए।