Uttarakhand Weather Update News: भारी बारिश का अलर्ट, केदारनाथ यात्रा और ट्रैकिंग रोकी, पूर्णागिरि-रीठा साहिब यात्रा पर भी रोक
मौसम विभाग द्वारा 17 अक्तूबर से दो-तीन दिन तक चारधाम सहित अधिकांश पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। जिसको देखते हुए प्रशासन ने केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा रोक दी है।
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विस्तार
मौसम विभाग के अलर्ट के बीच रविवार काे राजधानी देहरादून सहित ज्य के अधिकतर इलाकों में रविवार को मौसम खराब बना हुआ है। वहीं मौसम विभाग द्वारा 17 अक्तूबर रविवार से दो-तीन दिन तक चारधाम सहित अधिकांश पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
केदारनाथ यात्रा पर रोक
खराब मौसम के कारण केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से सोमवार तक के लिए रोक दिया गया है। धाम में दर्शन करने के लिए आने वाले यात्रियों को वापस भेजा जा रहा है। साथ ही सोनप्रयाग और गौरीकुंड में श्रद्धालुओं को रोक दिया गया। उनके यहां से आगे जाने पर रोक लगा दी गई है।
रविवार को पूर्वाह्न 11.30 बजे तक सोनप्रयाग से केदारनाथ के लिए यात्री रवाना किए गए, लेकिन मौसम का मिजाज बिगड़ते ही गौरीकुंड में यात्रियों को रोक दिया गया। उप जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार वर्मा व पुलिस उपाधीक्षक विजेंद्र डोभाल ने गुप्तकाशी से सोनप्रयाग में यात्रियों से आगे न जाने की अपील की। उधर, केदारनाथ में सुबह से मंदिर क्षेत्र में हजारों संख्या में यात्री मौजूद थे, जिन्हें दर्शन कर प्राथमिकता के साथ वापस भेजा गया।
वहीं, गौरीकुंड व सोनप्रयाग में जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बताया कि मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। सोमवार को मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यात्रा संचालन का निर्णय लिया जाएगा। केदारघाटी में गुप्तकाशी से गौरीकुंड तक लॉज, रेस्टोरेंट व होटल फुल हो गए हैं। वहीं केदारनाथ में भी गढ़वाल मंडल विकास निगम के कॉटेज सहित टेंट की बुकिंग फुल हो गई है। वहीं शनिवार व रविवार को जाम के कारण गुप्तकाशी से सोनप्रयाग तक 30 किमी के सफर को तय करने में यात्रियों को तीन से चार घंटे का समय लगा। वहीं, सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक पांच किमी क्षेत्र को पार करना मुश्किल बना हुआ है।
गंगोत्री व यमुनोत्री यात्रा पर रोक नहीं, एहतियात जरूरी: डीएम
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा पर रोक नहीं है। बारिश के मद्देनजर एहतियातन तीर्थयात्रियों को रोका जा रहा है। धामों में भाड़ न हो, इसके लिए तीर्थयात्रियों को दर्शन कराकर जल्द लौटाया जा रहा है। साथ ही उनसे सुरक्षित स्थानों पर बने रहने को कहा गया है। डीएम ने कहा कि मौसम खराब होने से तीर्थयात्रियों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए चेक पोस्टों पर भी आने-जाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है। यमुनोत्री धाम तक पहुंचने के लिए जानकीचट्टी से छह किमी के पैदल ट्रेक पर बारिश में भूस्खलन व पहाड़ी से पत्थर गिरने का का खतरा रहता है। वहीं गंगोत्री हाईवे पर भी नगुण गाड के पास, धरासू, रतूड़ीसेरा में कई जगह भूस्खलन जोन होने से आवाजाही जोखिमभरी हो सकती है। ऐसे में प्रशासन ने रविवार दोपहर बाद एहतियातन कई जगह तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका। बड़कोट एसडीएम शालिनी नेगी ने बताया कि यमुनोत्री धाम से दोपहर तक करीब 300 तीर्थयात्री दर्शन कर लौट चुके हैं। वहीं यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों को बड़कोट, खरादी, स्यानाचट्टी, रानाचट्टी, जानकीचट्टी आदि पड़ावों पर रोका गया है। उन्हें मौसम ठीक होने पर यमुनोत्री धाम के लिए रवाना किया जाएगा।
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ट्रेकिंग व पर्वतारोहण पर रोक
चमोली जिले के सभी वन क्षेत्रों में 17 से 19 अक्टूबर तक ट्रेकिंग व पर्वतारोहण पर रोक लगा दी है। नंदा देवी बायोस्फियर के निदेशक अमित कंवर ने वन अधिकारियों कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई दल वन क्षेत्रों में गया है तो उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों पर लाएं।
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पुलिस, एसडीआरएफ अलर्ट पर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में हो रही भारी बारिश को देखते हुए मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु से फोन पर प्रदेश की स्थिति की जानकारी ली है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य संबंधित कार्मिकों को संवेदनशील स्थानों पर हाई अलर्ट रखा जाए। कहीं भी कोई घटना होती है तो रिस्पोंस टाईम कम से कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरत होने पर प्रभावितों को तत्काल राहत मिले। चार धाम यात्रा मार्ग पर भी विशेष ध्यान रखा जाए। कहा कि चारधाम यात्रियों और पर्यटकों से भी सावधानी बरतने की अपील की जाए।
आगामी दो दिनों तक बदरीनाथ न आएं यात्री : डीएम
भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन ने बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को आगामी दो दिनों तक तीर्थयात्रा टालने की अपील की है। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिले में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा के लिए जो तीर्थयात्री पांडुकेश्वर तक पहुंच गए हैं, वे जोशीमठ व अन्य सुरक्षित स्थानों में शरण लें। उन्होंने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि आगामी दो दिनों तक के लिए यात्रा को टाल दें। जिला प्रशासन की ओर से जोशीमठ क्षेत्र के सरकारी विद्यालय भवनों में भी तीर्थयात्रियों को ठहरने की व्यवस्था की गई है। वहीं भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए पुलिस और नगर पंचायत बदरीनाथ की ओर से यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहरने की सलाह दी जा रही है।
पूर्णागिरि-रीठा साहिब यात्रा पर रोक
भारी बारिश के बीच जहां बनबसा में नगर पंचायत कार्यालय के पीछे वार्ड संख्या पांच में स्थित एक झाले पर सूखे पेड़ के गिरने से राम सिंह (68) की मौत हो गई। अलर्ट के मद्देनजर मां पूर्णागिरि धाम और रीठा साहिब सहित सभी धार्मिक यात्राओं को अगले आदेश तक प्रशासन ने प्रतिबंधित कर दिया है। मां पूर्णागिरि धाम की यात्रा पर रोक के बाद प्रशासन ने रविवार की शाम पूर्णागिरि दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं को बूम से लौटा दिया।
वहीं, रविवार शाम छह बजे से टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद करने के आदेश दिए गए हैं। सोमवार को एनएच आवाजाही के लिए खोला जाएगा या नहीं, इस पर मौसम और सड़क के हालात को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा। शारदा नदी के तटीय इलाकों को खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। नालों और नदी क्षेत्र में जाने पर रोक लगाई गई है।
सीएम ने दिए यात्रियों के रहने, खाने-पीने की उचित व्यवस्था करने के आदेश
प्रदेश में भारी बारिश को देखते हुए तीन दिन के अलर्ट के बीच तमाम स्थानों पर यात्रियों को रोका गया है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को ताकीद किया है कि यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराते के साथ उनके रहने और भोजन आदि की उचित व्यवस्था की जाए। ताकि यात्री उत्तराखंड से अच्छा संदेश लेकर जाएं। यह बात उन्होंने सचिवालय में सभी जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए कही।
बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारियों से उनकी तैयारियों, बारिश की स्थिति आदि के बारे में विस्तार से जानकारी ली। कहा कि राज्य, जिलों और तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित किए जाएं। जिलों से इन दो दिन, हर घंटे रिपोर्ट भेजी जाए। कोई घटना होने पर इसकी सूचना तुरंत दी जाए। रिस्पांस टाइम कम से कम होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जाए। आईटीबीपी, सीडब्ल्यूसी, बीआरओ, एसडीआरएफ, राजस्व, पुलिस आदि आपसी समन्वय से काम करें। ट्रेकर्स के बारे में पूरी सूचना रखी जाए और उनसे संपर्क रखें। लैंडस्लाइड जोन पर विशेष ध्यान रखा जाए। रास्ते बंद होने पर तुरंत खोलने की व्यवस्था हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि भूस्खलन आदि की स्थिति में लोग कहीं फंसे नहीं रहें। वह सुरक्षित स्थानों पर ठहरें। आपदा बचाव और राहत संबंधी उपकरण सुचारु स्थिति में हों। इसके साथ ही यात्रियों और पर्यटकों से भी सावधानी रखने की अपील की जाए, लेकिन इस दौरान किसी तरह का पैनिक न फैलने पाए। जिलाधिकारी और एसएसपी स्वयं मॉनिटरिंग करें।
बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक संजय गुप्ता, मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरुगेशन, आईजी वी मुरुगेशन, आईजी एसडीआरएफ पुष्पक ज्योति, एसीईओ आपदा प्रबंधन रिद्धिम अग्रवाल, सहित वीडियो कांफ्रेंसिग से सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, बीआरओ, आईएमडी, आईटीबीपी, सीडब्ल्यूसी, उत्तराखंड सब एरिया, सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।