Uttarakhand Weather Update : पहाड़ी इलाकों में मानसून बरपा रहा कहर, कहीं नदी-नाले उफान पर तो कहीं उड़ी घर की छत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में भी बारिश का दौर जारी है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में मानसून अभी से कहर बरपा रहा है। यहां नदी और बरसाती नाले उफान पर हैं। और आंधी-तूफान से घरों को नुकसान पहुंच रहा है।
यह भी पढ़ें... Uttarakhand Weather Update : पहाड़ी इलाकों में मानसून बरपा रहा कहर, कहीं नदी-नाले उफान पर तो कहीं उड़ी घर की छत
वहीं राजधानी देहरादून की बात करें तो यहां उमस ने बेहाल कर रखा है। जहां बरसात के दिनों में यहां पंखे तक बंद करने की नौबत आ जाती थी। इस बार अभी तक लोगों को कूलर का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं देर रात देहरादून के राजपुर क्षेत्र में तेज बारिश से एक घर क्षतिग्रस्त हो गया है।
बोल्डर गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त, एक व्यक्ति चोटिल
ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे तोता घाटी, साकणीधार, कौड़ियाला आदि कई जगहों पर बाधित रहा। इससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइन लग गई। मुसीबत तब और बढ़ गई, जब तोताघाटी में जाम में फंसे वाहनों पर अचानक पहाड़ी से पत्थर आ गिरे। ज्यादातर हल्के पत्थर वाहनों से टकराकर खाई में लुढ़क गए, लेकिन एक वाहन भारी बोल्डर गिरने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इससे उसमें सवार एक व्यक्ति के हाथ-पैर में चोट आई है। सिर में भी कांच के टुकड़े धंस गए हैं।
वाहन में सवार बच्चे और दो महिलाएं पत्थरों की चपेट में आने से बाल बाल बचे हैं। थाना प्रभारी एमएस रावत के अनुसार वाहन में दिल्ली से पहुंचा एक परिवार सवार था, जो नारायणबगड़ जा रहा था। नारायणबगड़ निवासी रविंद्र बिष्ट पुत्र बलवीर चोटिल है।
हाईवे को मलबा हटाने के बाद शनिवार सुबह करीब नौ बजे यातायात के लिए खोला जा सका। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम को जाम खुलवाने में काफी पसीना पहाना पड़ा। प्रोजेक्ट मैनेजर इंद्रमोहन सिंह ने बताया कि बारिश लगातार चलने से मलबा लगातार सड़क पर आता रहा।
भनेरपाणी में बदरीनाथ हाईवे 13 घंटे बाधित
पीपलकोटी में भनेरपाणी में चट्टान से मलबा और बोल्डर आने की वजह से बदरीनाथ नेशनल हाईवे करीब 13 घंटे बाधित रहा। लोगों को अपने वाहनों में ही दिन बिताने को मजबूर होना पड़ा। इससे बदरीनाथ धाम की यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं का शेड्यूल भी बिगड़ गया।
ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत जगह जगह हिल कटिंग का काम चल रहा है। शुक्रवार देर रात करीब 11 बजे बारिश के दौरान चट्टान से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर हाईवे पर आ गए। इसके चलते शनिवार की सुबह से ही वाहनों की आवाजाही ठप रही। सूचना मिलने पर शनिवार सुबह छह बजे से एनएच की जेसीबी मशीनों ने हाईवे पर आए मलबे और बोल्डरों को हटाना शुरू किया।
दोपहर लगभग दो बजे हाईवे को आवाजाही के लिए खोला जा सका। कर्णप्रयाग, सिमली, लंगासू, गौचर, आदिबदरी, गैरसैंण, थराली, देवाल, नारायणबगड़ आदि स्थानों पर शनिवार तड़के मूसलाधार बारिश हुई, जिससे सुबह करीब छह बजे ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर उमा माहेश्वर आश्रम (कर्णप्रयाग) के पास पहाड़ी से मलबा आ गया। हाईवे के दोनों तरफ कई वाहन फंस गए। दो घंटे तक हाईवे पर आवाजाही ठप रही। सूचना पर आलवेदर रोड परियोजना की जेसीबी मौके पर पहुंची। सुबह करीब आठ बजे मलबा हटाकर वाहनों की आवाजाही शुरू की जा सकी। इसके अलावा सिमली-शैलेश्वर, जेकिंडी-मैखुरा सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के मोटर मार्गों पर भी पत्थर गिरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
भारी बारिश से दुकानों और घरों में घुसा पानी
शुक्रवार की रात लगभग छह घंटे की बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। पहाड़ियों से मलबा आ गया। वहीं, करीब एक दर्जन दुकानों और घरों में पानी घुस गया। व्यापारियों का हजारों का माल खराब हो गया। उन्होंने सामान के मुआवजे के साथ ही पानी की निकासी की व्यवस्था की भी मांग की है।
श्रीकोट, श्रीनगर और भक्तियाना सभी जगह यही हाल रहा। बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर कई स्थानों में एक से डेढ़ फीट गहरे गड्ढों में पानी भर गया। श्रीकोट में मुकेश नेगी, मानेंद्र नेगी, कैलाश कपरुवाण और विकास शर्मा तथा भक्तियाना में प्रदीप नेगी की दुकान में रखा सामान मलबे और पानी से खराब हो गया। श्रीकोट पेट्रोल पंप के नजदीक हाईवे बीच में धंस गया।
उत्तरकाशी के बड़कोट के यमुनोत्री घाटी में तेज आंधी-तूफान के बाद झमाझम बारिश से दूरस्थ गांव करनाली में एक घर की छत उड़ गई। गांव के सुरेंद्र रावत ने बताया कि अतर सिंह के मकान की छत तेज हवा से उड़ गई। गनीमत रही कि घटना के वक्त कोई घर के अंदर नहीं था।
सरयू नदी उफान पर
मूसलाधार बारिश ने पिथौरागढ़ जिले के कुछ इलाकों और बागेश्वर के कपकोट में भारी तबाही मचाई है। सात से ज्यादा सड़कें बंद है, जबकि मुनस्यारी में पानी की योजनाएं ध्वस्त हो गईं और बांसबगड़ में सुरक्षा दीवार गिरने से झूला पुल को खतरा हो गया है। खेतभराड़ में नदी के कटाव से पंचायत घर खतरे की जद में है।
सुरिंगगाड़ में बनाया लकड़ी का अस्थायी पुल तेज बहाव में बह गया। इससे पांच हजार से अधिक की आबादी अलग-थलग पड़ गई है। उधर, कपकोट के खटगड़ा गधेरे में पुलिया ध्वस्त होने से तीन गांवों की करीब साढ़े तीन हजार की आबादी का तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया है। खेत और पैदल रास्ते बह गए हैं। भूस्खलन से मकानों को खतरा पैदा हो गया है।
शुक्रवार रात हुई मुनस्यारी तहसील क्षेत्र में शुक्रवार रात 96 मिमी बारिश हुई। इससे कई स्थानों पर भूस्खलन हो गया। मलबा गिरने से थल-मुनस्यारी सड़क रातापानी, बनिक, पातलथोड़ और मुनस्यारी-जौलजीबी मार्ग मदकोट से बरम के बीच बंद हो गई है। लगातार हो रही बारिश से भूकटाव होने से झूला पुल की सुरक्षा दीवार भी ध्वस्त हो गई। इससे पुल को खतरा पैदा हो गया है। यह झूलापुल राया, बजेता, डुंगरी तीन गांवों को जोड़ता है।
इधर, बागेश्वर जिले में बारिश से कपकोट के खटगड़ा गधेरे में खटगड़ा, बसकूना, असों गांव को जोड़ने वाली पैदल पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। यह पुलिया तीनों गांवों को कपकोट तहसील, ब्लॉक मुख्यालय से जोड़ती थी। गधेरे के उफान में आने से गधेरे के दोनों छोरों पर भूस्खलन हुआ है। कई मकानों के लिए खतरा पैदा हो गया है। काफलीगैर में कलवर्ट बंद होने से गणेश रौतेला समेत तमाम लोगों की दुकानों में मलबा घुस गया। दफौट में कई पॉलीहाउस क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई घरों में मलबा घुस गया। रास्ते भी बह गए हैं। बसकूना में भी व्यापक तबाही मची है। घरों, खेतों में मलबा पट गया है।
बागेश्वर-कपकोट समेत कई सड़कें बंद
कपकोट-बागेश्वर मोटर मार्ग में दणू के पास नाला उफान पर आने से सड़क से आवागमन बंद हो गया। कांडा में ढालन-खुनौली सड़क भी मलबे से पट गई है। कपकोट के सुकुंडा सड़क और कपकोट-पोलिंग-गैरखेत-हरसीला मोटर मार्ग पर मलबा आने से यातायात बाधित है। बसकुना मोटर मार्ग करीब 200 मीटर हिस्से में क्षतिग्रस्त हो गई है। दोफाड़, कपकोट-गैरखेत, तोली, धरमघर-माजखेत, शामा-नाकुरी, कपकोट-लीली, बघर मोटर मार्ग मलबा आने से बंद हो गए हैं।
खटगड़ा में बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त, पोल उखड़े
अतिवृष्टि से कपकोट के खटगड़ा में बिजली के कई पोल उखड़ गए हैं। बिजली की लाइन को भी काफी क्षति पहुंची है। बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त होने और पोल उखड़ने से गांव की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। बिजली नहीं होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने तत्काल लाइन की मरम्मत कर बिजली बहाल करने की मांग की है।
कपकोट में 87.50 एमएम, बागेश्वर में 40 एमएम बारिश हुई
शुक्रवार की रात करीब साढ़े दस बजे से कपकोट और रात 11.4 बजे से बागेश्वर में मूसलाधार बारिश हुई। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कपकोट में 87.50 एमएम और बागेश्वर में 40 एमएम बारिश हुई। गरुड़ में 10 एमएम बारिश हुई। बारिश के कारण सरयू नदी उफान पर आ गई है। तट तक पानी भर गया है। गोमती का भी जलस्तर बढ़ा है। शुक्रवार को सरयू का जलस्तर 867.80 मीटर, गोमती का जलस्तर 862.50 मीटर था। दोनों नदियों का चेतावनी लेबल 869 मीटर और खतरनाक स्तर 870.70 मीटर है।
शारदा नदी का जलस्तर बढ़ा
पहाड़ों में हुई वर्षा से शारदा नदी का जलस्तर शनिवार को बढ़ गया है। इस सीजन में जलस्तर पहली बार 85 हजार क्यूसेक के पार पहुंच गया। बनबसा स्थित यूपी सिंचाई विभाग के शारदा बैराज के प्रभारी जेई संजय सिंह ने बताया कि शनिवार दोपहर 12 बजे नदी का जलस्तर 85012 क्यूसेक पहुंच गया जबकि मध्यरात्रि नदी का जलस्तर 38593 क्यूसेक था, जो सुबह आठ बजे 44239 क्यूसेक हो गया।
सुबह नौ बजे नदी का जलस्तर 46837 क्यूसेक पहुंच गया था। बताया कि पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में 17 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है। शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ बृजेश मौर्य ने बताया कि नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक पहुंचने पर सुरक्षा के तहत बैराज से वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ती है।
पिथौरागढ़ जिले की यह सड़कें बंद
मदकोट-दारमा, पौड़ी-घटकूना, बंगापानी-जाराजिबली, नाचनी-भैंसकोट, मसूरीकांडा-होकरा, बांसबगड़-गूठी, तेजम-शामा-कपकोट।