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उत्तराखंड मौसम: पहाड़ों में झमाझम बरस रहे मेघ, हरिद्वार में सात सालों में सबसे कम बारिश 

Sat, 28 Aug 2021 05:12 PM IST
अलका त्यागी निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार
निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 28 Aug 2021 05:12 PM IST
सार

हरिद्वार से कुछ ही दून देहरादून और ऋषिकेश में झमाझम बारिश हो रही है। दूसरी तरफ हरिद्वार के लोगों को उमस झेलनी पड़ रही है।

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Uttarakhand Weather Update: Haridwar receives lowest rainfall in seven years
उत्तराखंड में बारिश - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

झमाझम बारिश ने पर्वतीय जिलों में तबाही मचाई हुई है। कहीं बादल फट रहे हैं तो कहीं भूस्खलन से सड़कों पर आवाजाही बंद है। पहाड़ों की बारिश से गंगा भी उफान पर है। हरिद्वार में मौसम का मिजाज एकदम बदला हुआ है। धर्मनगरी में बीते सात सालों में अगस्त में सबसे कम बारिश हुई है। मौसमी बदलाव से मौसम एवं कृषि वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ता भी चिंतित हैं। 

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हरिद्वार गंगा के तट पर बसा है। गन्ना उत्पादन में प्रदेश में सबसे अग्रणी जिला है। हरिद्वार के मौसम में बीते कुछ सालों से बदलाव हो रहा है। गर्मियों, जाड़ों और बारिश में इसका असर भी दिख रहा है। बरसात में पर्वतीय इलाकों में बारिश हर तरफ कहर बरपा रही है।
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हरिद्वार से कुछ ही दून देहरादून और ऋषिकेश में झमाझम बारिश हो रही है। दूसरी तरफ हरिद्वार के लोगों को उमस झेलनी पड़ रही है। कभी कभार बारिश होती है, लेकिन बहुत कम समय के लिए। अगस्त का आखिरी सप्ताह चल रहा है। हरिद्वार में अगस्त माह में अब तक केवल 190 एमएम बारिश रिकार्ड हुई है। अब 31 अगस्त तक बारिश होने के आसार भी नहीं हैं। 
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बहादराबाद स्थित ऋतु आलोकशाला के शोध पर्यवेक्षक नरेंद्र रावत के मुुताबिक पिछले साल अगस्त में 350 एमएम बारिश रिकार्ड हुई थी। पिछले साल जनवरी से अगस्त तक 800 एमएम बारिश हुई थी, जबकि इस साल 734 एमएम बारिश हुई है। मौसम विभाग के शोध पर्यवेक्षक रमाकांत शर्मा के मुताबिक 2014 में अगस्त माह में सबसे कम मात्र 99 एमएम बारिश हुई थी। जबकि 2011 में सर्वाधिक 580 एमएम बारिश रिकार्ड हुई।

2014 के बाद से 2020 तक अगस्त माह में हर साल औसतन 350 से 400 एमएम बारिश हुई। मौसम विभाग के शोध कर्ताओं का कहना है कि बीते सात साल में हरिद्वार में अगस्त माह में सबसे कम बारिश हुई है। ग्लोबल वार्मिंग का असर चिंताजनक है। इसका असर आगामी जाड़ों और गर्मियों पर भी पड़ेगा। 

- गर्मी हो या ठंड या फिर बारिश मौसम का मिजाज बदल रहा है। बीते सात सालों में अगस्त महीने में सबसे कम 190 एमएम बारिश हुई है। बारिश कम होने से खेतीबाड़ी के अलावा भूजल रिचार्ज में कमी आ रही है। 
- रमाकांत शर्मा, शोध पर्यवेक्षक, मौसम विभाग

31 अगस्त तक बादल छाए रहेंगे। बारिश की संभावना कम है। आंद्रता का स्तर 60 से 90 के बीच रहेगा। आंद्रता अधिक होने से अधिकतम तापमान भी 31 से 34 डिग्री और न्यूनतम 24-25 डिग्री सेल्सियस बना रहेगा। 
- नरेंद्र रावत, शोध पर्यवेक्षक मौसम विभाग

भीमगोड़ा बैराज की क्षमता 294 मीटर की है। 293 मीटर जलस्तर पहुंचने पर अलर्ट जारी हो जाता है। पहाड़ों में लगातार होने वाली बारिश से गंगा का जलस्तर 292.30 मीटर से अधिक चल रहा है। गंगा की मुख्य धारा में सिल्ट की मात्रा अत्यधिक आने पर बैराज के गेट खोले जा रहे हैं। 

 - निर्भय भारद्वाज, वाटर असिस्टेंट बैराज

 बादल छाए रहने से धान की फसल पर पत्ती लपेटक और ब्राउन प्लांट हॉपर कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। कीटों से बचाव के लिए किसानों को जागरूक होने की जरूरत है। खरपतवार हटाएं। गन्ने की फसल में अनावश्यक पत्तियों को हटाएं।
- डा. पुरुषोत्तम शर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी

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