उत्तराखंड: देवदूत बनकर आए सेना के जवान, लुम्ती में फंसे बच्चों-महिलाओं को ड्रम में बैठाकर सुरक्षित निकाला
- आफत की बारिश : पिथौरागढ़ में 40, बागेश्वर में 17 और चंपावत में सात सड़कें बंद
- नदियां उफान पर, तटीय क्षेत्रों में दहशत में लोग, मार्ग बंद होने से आवागमन ठप
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पिथौरागढ़ में बंगापानी तहसील के लुम्ती गांव में फंसे बच्चों और महिलाओं को बृहस्पतिवार को देवदूत बनकर आए सेना के जवानों ने उफनाती नदी के आरपार तार बांधकर प्लास्टिक के ड्रमों के भीतर बिठाकर सुरक्षित निकाल लिया है।
कुमाऊं के सीमांत पर्वतीय जिले पिथौरागढ़ और बागेश्वर में बारिश ने पिछले करीब एक सप्ताह से लोगों की नींद उड़ाई हुई है। पिथौरागढ़ जिले में 40, बागेश्वर में 17 और चंपावत में सात सड़कें बंद होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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भारी बारिश के कारण पिथौरागढ़ जिले में नदियां उफान पर हैं। इनके तटीय इलाकों में रह रहे लोग सहमे हुए हैं। आपदा के कारण बंगापानी तहसील के लुम्ती गांव में बच्चे और महिलाएं फंसी हुई थीं।
उफान पर नदियां
उफनती नदी के पार फंसे इन लोगों को सुरक्षित निकालने का और कोई उपाय न होने पर सेना के जवान उतारे गए। जिलाधिकारी के दिशा निर्देशन में जवानों ने नदी के आरपार तार बांधकर प्लास्टिक के ड्रमों के जरिये महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया।
बागेश्वर की 17 सड़कों पर मलबा और बोल्डर गिरने से आवाजाही ठप है। उधर चंपावत में टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बृहस्पतिवार शाम धौन-स्वांला के बीच आए मलबे से करीब डेढ़ घंटे तक बंद रहा। मार्ग बंद होने से वाहनों की लंबी कतार लग गई। जिले में सात ग्रामीण मार्ग बंद हैं। नैनीताल में बुधवार देर रात एरीज और मनोरा को जोड़ने वाले मार्ग पर भूस्खलन से यातायात ठप हो गया।