उत्तराखंड: कहर बरपा रही मौसम की उलटबांसी, जून में जल प्रलय, फरवरी में बाढ़ और अक्तूबर में बारिश मूसलाधार
Uttarakhand Weather News: दो दिन की बारिश में तबाही का जो मंजर दिखा है, उसके लिए बेशक जलवायु परिवर्तन को एक बड़ी वजह बताया जा रहा है। लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ताओं की निगाह में यह मानव जनित तबाही है, जो बेढंगे और बेतरतीब विकास की कोख से निकली है।
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उत्तराखंड में मौसम की उलटबांसी कहर बरपा रही है। दो दिन की रिकाॅर्ड तोड़ बारिश ने जून 2013 की आपदा के जख्मों को हरा कर दिया। फरवरी में ऋषिगंगा की बाढ़ और अक्तूबर के महीने में अत्यधिक बारिश ने हुक्मरानों, नीति नियंताओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं को चिंता में डाल दिया। दो दिन की बारिश से मची तबाही में 55 हंसती खेलती जिंदगी मौत के आगोश में समा चुकी हैं।
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दो दिन में राज्य को जानमाल की बहुत अधिक हानि हुई है। सरकारी तंत्र यदि अतिरिक्त चौकसी नहीं दिखाता तो नुकसान कई गुना अधिक हो सकता था। चारधाम यात्रा को तत्काल रोकर हजारों की संख्या में उत्तराखंड पहुंचे पर्यटकों को हिफाजत हो सकी।
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बेमौसम आपदा ने हमेशा बरपाया कहर
उत्तराखंड में बेमौसम आपदा ने हमेशा कहर ही बरपाया है। मानसून के दौरान भी भूस्खलन, बाढ़ और वज्रपात की घटनाएं हुईं। इन आपदाओं से निपटने के लिए पूरे सिस्टम की तैयारियां भी दिखीं, लेकिन अचानक आई आपदाओं के आगे पूरा तंत्र बेबस नजर आया। इसकी सबसे ताजा बानगी 16 जून 2013 में आपदा थी, जिसमें केदारनाथ जलप्रलय में हजारों लोग मारे गए।
किसने सोचा था फरवरी में बाढ़ आएगी
इसके बाद किसी ने नहीं सोचा था कि अचानक बाढ़ से भयंकर तबाही का एक और मंजर देखने को मिलेगा, लेकिन सात फरवरी 2021 ऋषिगंगा में बाढ़ से जोशीमठ स्थित एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना में 204 लोग मारे गए या लापता हो गए। मानसून की विदाई के बाद जब पूरा प्रदेश शीत ऋतु में दाखिल हो चुका है, ऐसे में रिकार्ड तोड़ बारिश से मची तबाही ने अब तक 55 लोगों को मौत की नींद सुला दिया है।
आपदाएं आती रहेंगी, विकास का मॉडल बदलना होगा : सुरेश भाई
पर्यावरण कार्यकर्ता सुरेश भाई का मानना है कि आपदा के कहर को जलवायु परिवर्तन मानकर हम अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उनका कहना है कि उत्तराखंड आपदाओं की लिहाज से बेहद संवेदनशील है और अत्यधिक बारिश, भूकंप, बाढ़, भूस्खलन की घटनाएं हमेशा आती रहेंगी। उनकी नजर में आपदाओं में होने वाले नुकसान की वजह बेतरतीब विकास है। वह विकास के मॉडल के बदलने की वकालत करते हैं।
दिखावटी नहीं टिकाऊ विकास हो : नौटियाल
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने विकास के मॉडल पर सवाल खड़े किए हैं। अरबों रुपये की योजनाओं में दिखावे पर ज्यादा फोकस है। जबकि हमारा जोर टिकाऊ विकास पर होना चाहिए। नैनीताल के हालात इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अंग्रेज जो ड्रेनेज सिस्टम तैयार कर गए थे, वह खत्म हो चुका है। अब थोड़ी बारिश में ही शहरों और कस्बों में जलभराव आम बात है।