फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand Weather News: Rainfall without season creates disaster in state whole year

उत्तराखंड: कहर बरपा रही मौसम की उलटबांसी, जून में जल प्रलय, फरवरी में बाढ़ और अक्तूबर में बारिश मूसलाधार

Thu, 21 Oct 2021 02:15 AM IST
अलका त्यागी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 21 Oct 2021 02:15 AM IST
सार

Uttarakhand Weather News: दो दिन की बारिश में तबाही का जो मंजर दिखा है, उसके लिए बेशक जलवायु परिवर्तन को एक बड़ी वजह बताया जा रहा है। लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ताओं की निगाह में यह मानव जनित तबाही है, जो बेढंगे और बेतरतीब विकास की कोख से निकली है।

विज्ञापन
Uttarakhand Weather News: Rainfall without season creates disaster in state whole year
उत्तराखंड में तबाही - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड में मौसम की उलटबांसी कहर बरपा रही है। दो दिन की रिकाॅर्ड तोड़ बारिश ने जून 2013 की आपदा के जख्मों को हरा कर दिया। फरवरी में ऋषिगंगा की बाढ़ और अक्तूबर के महीने में अत्यधिक बारिश ने हुक्मरानों, नीति नियंताओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं को चिंता में डाल दिया। दो दिन की बारिश से मची तबाही में 55 हंसती खेलती जिंदगी मौत के आगोश में समा चुकी हैं।

विज्ञापन


उत्तराखंड आपदा: कुमाऊं में सात और लोगों के शव हुए बरामद, मृतकों की संख्या 55 पहुंची
विज्ञापन


दो दिन में राज्य को जानमाल की बहुत अधिक हानि हुई है। सरकारी तंत्र यदि अतिरिक्त चौकसी नहीं दिखाता तो नुकसान कई गुना अधिक हो सकता था। चारधाम यात्रा को तत्काल रोकर हजारों की संख्या में उत्तराखंड पहुंचे पर्यटकों को हिफाजत हो सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन


उत्तराखंड आपदा: मलबे में दबने से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत, 18 घंटे बाद बरामद हुए शव

बेमौसम आपदा ने हमेशा बरपाया कहर
उत्तराखंड में बेमौसम आपदा ने हमेशा कहर ही बरपाया है। मानसून के दौरान भी भूस्खलन, बाढ़ और वज्रपात की घटनाएं हुईं। इन आपदाओं से निपटने के लिए पूरे सिस्टम की तैयारियां भी दिखीं, लेकिन अचानक आई आपदाओं के आगे पूरा तंत्र बेबस नजर आया। इसकी सबसे ताजा बानगी 16 जून 2013 में आपदा थी, जिसमें केदारनाथ जलप्रलय में हजारों लोग मारे गए। 

किसने सोचा था फरवरी में बाढ़ आएगी

इसके बाद किसी ने नहीं सोचा था कि अचानक बाढ़ से भयंकर तबाही का एक और मंजर देखने को मिलेगा, लेकिन सात फरवरी 2021 ऋषिगंगा में बाढ़ से जोशीमठ स्थित एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना में 204 लोग मारे गए या लापता हो गए। मानसून की विदाई के बाद जब पूरा प्रदेश शीत ऋतु में दाखिल हो चुका है, ऐसे में रिकार्ड तोड़ बारिश से मची तबाही ने अब तक 55 लोगों को मौत की नींद सुला दिया है।

आपदाएं आती रहेंगी, विकास का मॉडल बदलना होगा : सुरेश भाई
पर्यावरण कार्यकर्ता सुरेश भाई का मानना है कि आपदा के कहर को जलवायु परिवर्तन मानकर हम अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उनका कहना है कि उत्तराखंड आपदाओं की लिहाज से बेहद संवेदनशील है और अत्यधिक बारिश, भूकंप, बाढ़, भूस्खलन की घटनाएं हमेशा आती रहेंगी। उनकी नजर में आपदाओं में होने वाले नुकसान की वजह बेतरतीब विकास है। वह विकास के मॉडल के बदलने की वकालत करते हैं।

दिखावटी नहीं टिकाऊ विकास हो : नौटियाल
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने विकास के मॉडल पर सवाल खड़े किए हैं। अरबों रुपये की योजनाओं में दिखावे पर ज्यादा फोकस है। जबकि हमारा जोर टिकाऊ विकास पर होना चाहिए। नैनीताल के हालात इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अंग्रेज जो ड्रेनेज सिस्टम तैयार कर गए थे, वह खत्म हो चुका है। अब थोड़ी बारिश में ही शहरों और कस्बों में जलभराव आम बात है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed