Kotdwar: आमसौड़ के कटेला डांडा में हुआ भारी भूस्खलन, घर छोड़कर भागे लोग, कई गांव में ही फंसे, 14 परिवार शिफ्ट
आठ अगस्त और 13 अगस्त को आई आपदा के दौरान कटेला डांडा में गहरी दरारें पड़ गई थी, जिससे गांव में भूस्खलन का खतरा बना हुआ था। दिन भर बारिश के बाद बुधवार शाम को पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरना शुरू हुआ।
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कोटद्वार के दुगड्डा ब्लाॅक के आमसौड़ गांव में कटेला डांडा से भूस्खलन शुरू हो गया है। भूस्खलन होता देख कई लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर गए जबकि कुछ परिवार गांव में ही फंस गए। सूचना पर पहुंची पुलिस प्रशासन की टीम ने फंसे परिवारों को सुरक्षित निकाला और कुल 14 परिवारों को गांव के अन्य घरों में शिफ्ट कर दिया। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से गांव का पुनर्वास करने, पुनर्वास की व्यवस्था होने तक पहाड़ी का ट्रीटमेंट करने की मांग की। वहीं बीडीओ जयकृत सिंह बिष्ट और ब्लाॅक प्रमुख रुचि कैंत्यूरा ने गांव पहुंचकर मौका मुआयना किया।
ग्रामीण इंद्रमोहन जुयाल और गणेश जुयाल ने बताया कि विगत आठ अगस्त और 13 अगस्त को आई आपदा के दौरान कटेला डांडा में गहरी दरारें पड़ गई थी, जिससे गांव में भूस्खलन का खतरा बना हुआ था। दिन भर बारिश के बाद बुधवार शाम को पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरना शुरू हुआ। देखते ही देखते पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबे के साथ पेड़ नीचे गिरने लगे जिससे ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई। कुछ लोग भागकर नीचे सड़क पर आ गए, जबकि कुछ परिवार गांव में ही फंस गए। सूचना पर राजस्व उपनिरीक्षक संगीता राज और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला।
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प्रशासन की टीम ने प्रभावित परिवारों को दुगड्डा इंटर काॅलेज या नगर पालिका के सभागार में शिफ्ट करने की बात कही, लेकिन ग्रामीणों ने वहां जाने से मना कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि घर में उनका सारा सामान घर पड़ा है। साथ ही उनके पालतू पशु भी हैं। गांव से दुगड्डा की दूरी अधिक है। इसके बाद प्रभावित परिवारों को गांव के अन्य परिवारों के साथ शिफ्ट किया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि भूस्खलन के कारण झवाणा गांव का पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है और पूरा मलबा आमसौड-जमरगडडी मार्ग पर जमा हो गया है। बृहस्पतिवार को ब्लाॅक प्रमुख रुचि कैंत्यूरा और बीडीओ जयकृत सिंह बिष्ट ने गांव पहुंचकर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का मौका मुआयना किया। इस मौके पर कानूनगो राकेश डबराल, राजस्व उपनिरीक्षक राजेश राणा, संगीता राज, अवर अभियंता कुलविंदर सिंह पुलिस कर्मी मौजूद रहे। कानूनगो राकेश डबराल ने बताया कि अतिवृष्टि होने की दशा में गांव के 14 परिवारों और दो दुकानों को खतरा बना हुआ है। रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
मेयर और पूर्व मंत्री ने झंडीचौड़ में बाढ़ से हुए नुकसान का लिया जायजा
मेयर हेमलता नेगी और पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने उत्तरी झंडीचौड़ और पूर्वी झंडीचौड़ में बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। लोगों ने उन्हें उचित मुआवजा नहीं देने और बाढ़ सुरक्षा कार्य नहीं किए जाने की शिकायत की। जिसपर मेयर ने उन्हें हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने शासन और प्रशासन पर क्षेत्र में अनियंत्रित खनन कराने का आरोप लगाया। कहा कि प्रशासन की अनदेखी के कारण खननकारियों ने भाबर क्षेत्र में बनी बाढ़ सुरक्षा दीवार की नींव तक खोद डाली है। जिसके कारण अधिकतर सुरक्षा दीवार नदी मेें समा गई है। अब लोगों के खेत खलिहान नदी के कटाव की भेंट चढ़ रहे हैं और घरों में बाढ़ आ रही है। उन्होंने सरकार से बाढ़ सुरक्षा कार्यों में तेजी लाने और पीड़िताें को उचित मुआवजा देने की मांग की।