माइनस आठ डिग्री तापमान में सीमा की निगहबानी कर रहे जवान, लिपुपास और नाभिढांग में जमने लगा पानी
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में हल्का हिमपात शुरू होने से कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। रात को तापमान माइनस आठ डिग्री तक पहुंच रहा है। तापमान में गिरावट आने से नलों का पानी भी जमने लगा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के जवान सीमा पर मुस्तैदी के साथ डटे हुए हैं।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में अक्तूबर से हल्का हिमपात होने लगता है। पिछले वर्षों तक चीन सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के जवान अक्तूबर-नवंबर तक अग्रिम चौकियों से निचली चौकियों में शिफ्ट हो जाते थे। इस बार चीन से चल रही तनातनी को देखते हुए शीतकाल में भी जवान अग्रिम चौकियों में तैनात रहेंगे।
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सूत्रों के अनुसार लिपुपास, नाभिढांग सहित अन्य क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह में तापमान में भारी गिरावट आई है। इन क्षेत्रों का तापमान माइनस 8 डिग्री तक पहुंचने लगा है। इसके चलते नलों का पानी भी जमने लगा है।
धूप निकलने के बाद नलों से पानी बहना शुरू होता है। शीतकाल में अग्रिम चौकियों में जवानों के लिए रसद की आपूर्ति कर दी गई है। हाड़ कंपाने वाली ठंड से सुरक्षा के लिए जवानों को खास पोशाकें भी उपलब्ध कराई गई हैं।
पंचाचूली सहित ऊंची चोटियों में तीसरा हिमपात
दिसंबर और जनवरी में उच्च हिमालयी क्षेत्र में तापमान माइनस 25 डिग्री तक चला जाता है। अभी मिलम से लिपुलेख तक सुरक्षा बलों के जवान नियमित गश्त कर सीमा पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
बृहस्पतिवार को जिले की ऊंची चोटियों हंसलिंग, नग्निधूरा, पंचाचूली आदि पर इस मौसम का तीसरा हिमपात हुआ। दिन में हिमालय बादलों से ढंका रहा। बादल छाए रहने, हिमपात और निचले इलाकों में ठंडी हवाएं चलने से ठंड महसूस की गई।
मुनस्यारी में लोगों ने गर्म कपड़े निकाल लिए हैं। इधर जिला मुख्यालय सहित जनपद के अन्य हिस्सों में दिन में धूप खिली रही। पिथौरागढ़ सहित डीडीहाट में सुबह-शाम तापमान में गिरावट आने से ठंड महसूस होने लगी है।