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उपनल: पूर्व सैनिकों और आश्रितों के अलावा अन्य की नियुक्ति पर लगेगी रोक, उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम में नियुक्ति का मामला
Fri, 18 Mar 2022 10:04 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 18 Mar 2022 10:04 AM IST
सार
प्रदेश सरकार की ओर से पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के लिए 2004 में उपनल का गठन किया गया था, ताकि इसके माध्यम से विभिन्न विभागों में उन्हें नियुक्तियां दी जा सके। लेकिन समय-समय पर इसमें गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों की भर्ती होती रही है। लेकिन अब पूर्व सैनिकों और आश्रितों के अलावा अन्य की नियुक्ति पर रोक लगेगी।
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पीपीएस पाहवा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम के माध्यम से विभिन्न विभागों में अगले महीने से पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के अलावा अन्य लोगों की नियुक्ति पर रोक लग जाएगी। उपनल के महाप्रबंधक ब्रिगेडियर पीपीएस पाहवा (सेवानिवृत्त) के मुताबिक उपनल को पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के लिए बनाया गया है। जिसमें अगले महीने से गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों की नियुक्तियां नहीं हो पाएगी।
प्रदेश सरकार की ओर से पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के लिए 2004 में उपनल का गठन किया गया था, ताकि इसके माध्यम से विभिन्न विभागों में उन्हें नियुक्तियां दी जा सके। लेकिन समय-समय पर इसमें गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों की भर्ती होती रही है।
पूर्व में वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्य सचिव ने पूर्व सैनिकों के अलावा गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों को भी उपनल से भर्ती का शासनादेश जारी किया था। पूर्व सैनिकों की नाराजगी के बाद इसे निरस्त किया गया। जबकि अब 2020 में कोविड की वजह से गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों के लिए फिर से इसके माध्यम से नियुक्ति का रास्ता खोल दिया गया।
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शुरुआत में एक साल के लिए नियुक्ति का रास्ता खोले जाने के बाद इसे कुछ और समय के लिए बढ़ाया गया, लेकिन अब 31 मार्च 2022 के बाद गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोग उपनल के माध्यम से नियुक्ति नहीं पा सकेंगे। पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों को उपनल के माध्यम से उनकी योग्यता के हिसाब से उन्हें विभिन्न विभागों में नियुक्त किया जाता है। इस समय प्रदेश में 21 हजार से अधिक उपनल कर्मचारी विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उपनल पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के लिए बना है। कोविड के दौरान अन्य लोगों को भी इसके माध्यम से नियुक्तियां दी गई, लेकिन अगले महीने से अन्य लोग इसके माध्यम से नियुक्तियां नहीं पा सकेंगे। - ब्रिगेडियर पीपीएस पाहवा (सेवानिवृत्त), महाप्रबंधक उपनल
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प्रदेश सरकार की ओर से पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के लिए 2004 में उपनल का गठन किया गया था, ताकि इसके माध्यम से विभिन्न विभागों में उन्हें नियुक्तियां दी जा सके। लेकिन समय-समय पर इसमें गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों की भर्ती होती रही है।
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पूर्व में वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्य सचिव ने पूर्व सैनिकों के अलावा गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों को भी उपनल से भर्ती का शासनादेश जारी किया था। पूर्व सैनिकों की नाराजगी के बाद इसे निरस्त किया गया। जबकि अब 2020 में कोविड की वजह से गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों के लिए फिर से इसके माध्यम से नियुक्ति का रास्ता खोल दिया गया।
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शुरुआत में एक साल के लिए नियुक्ति का रास्ता खोले जाने के बाद इसे कुछ और समय के लिए बढ़ाया गया, लेकिन अब 31 मार्च 2022 के बाद गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोग उपनल के माध्यम से नियुक्ति नहीं पा सकेंगे। पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों को उपनल के माध्यम से उनकी योग्यता के हिसाब से उन्हें विभिन्न विभागों में नियुक्त किया जाता है। इस समय प्रदेश में 21 हजार से अधिक उपनल कर्मचारी विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उपनल पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के लिए बना है। कोविड के दौरान अन्य लोगों को भी इसके माध्यम से नियुक्तियां दी गई, लेकिन अगले महीने से अन्य लोग इसके माध्यम से नियुक्तियां नहीं पा सकेंगे। - ब्रिगेडियर पीपीएस पाहवा (सेवानिवृत्त), महाप्रबंधक उपनल