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उत्तराखंड: नई 150 बसों के गीयर लीवर बदलने को टाटा कंपनी राजी

Fri, 29 Nov 2019 02:11 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 29 Nov 2019 02:11 PM IST
सार

  • परिवहन निगम प्रबंधन नहीं तैयार, सीआईआरटी की रिपोर्ट के बाद ही होगी कार्रवाई
  • तकनीकी खामियां मिलीं तो कंपनी को वापस लेनी होगी सभी गाड़ियां

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uttarakhand transport corporation tata company will change the gear  lever of new buses

विस्तार

परिवहन निगम की बसों में आए दिन गीयर लीवर टूटने की घटनाओं के बाद टाटा कंपनी सभी 150 बसों के गीयर लीवर बदलने को राजी हो गई है। लेकिन प्रबंधन ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया है। प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान का कहना है कि सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ रोड ट्रांसपोर्ट (सीआईआरटी) के विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। प्रबंध निदेशक का कहना है कि यदि सीआईआरटी की जांच रिपोर्ट में गीयर लीवर के डिजाइन में खामियां मिलीं तो कंपनी को सभी बसें वापस लेनी हाेंगी।

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टाटा कंपनी की ओर से परिवहन निगम को मुहैया कराई गईं 150 में से तीन बसों के गीयर लीवर टूट चुके हैं। इसके बाद परिवहन निगम ने इन सभी बसों के संचालन पर रोक लगा दी है। साथ ही कंपनी का भुगतान भी रोक दिया गया है। इस बीच टाटा कंपनी के अधिकारियों ने सभी बसों के गीयर लीवर बदलने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन प्रबंध निदेशक ने इससे साफ इंकार कर दिया है। प्रबंध निदेशक का कहना है कि जांच में खामियां पाई जाती हैं तो बसों को लौटाया जाएगा।
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जहां तहां खड़ी कर दी गई बसें

प्रबंध निदेशक के निर्देश पर टाटा कंपनी से खरीदी गईं नई बसें जहां तहां खड़ी कर दी गई हैं। प्रबंध निदेशक ने अधिकारियों को हिदायत दी है कि बसों का संचालन किसी भी सूरत में न किया जाए। यदि बसें सड़कों पर दौड़ती पाईं गईं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर गाड़ियों के गीयर लीवर टूटने की घटनाओं को लेकर चालक भी दहशत में हैं। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं ऐसा न हो कि 100 किमी प्रति घंटा की गति में गीयर लीवर टूट जाए और कोई बड़ा हादसा हो जाए।
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रोडवेज ने हिमाचल, यूपी भेजीं टीमें

परिवहन निगम को टाटा कंपनी की ओर से मुहैया करायी गई 150 बसों में से कई के गीयर लीवर टूटने की घटनाओं के बाद अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों की दो टीमें हिमाचल प्रदेश व उत्तर प्रदेश भेजी गई हैं। ये टीमें दोनों राज्यों में परिवहन निगम के अधिकारियाें से संपर्क कर इस बात की जानकारी जुटाएंगी कि उनके यहां गीयर लीवर टूटने की घटनाएं तो नहीं हुई हैं?

प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि टाटा कंपनी ने उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश को 700 व हिमाचल प्रदेश को भी 400 नई बसोें की आपूर्ति की है। ऐसे में यदि यहां बसों के गीयर लीवर टूटने की घटनाएं हो रही है तो जाहिर है कि इन दोनाें राज्योें में भी बसों के गीयर लीवर टूट रहे होंगे। इसी की जानकारी जुटाने को विभागीय अधिकारियों, विशेषज्ञों की टीमें इन दोनों राज्यों में भेजी गई है। अधिकारियों, विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कंपनी ने छोटा किया गीयर लीवर

जांच में यह बात सामने आई है कि टाटा कंपनी ने गीयर चैंबर छोटा करने के लिए लीवर में बदलाव किया था। प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान का कहना है कि टाटा कंपनी के विशेषज्ञों का कहना है कि नई बसों का गीयर बाक्स एक ही व्यक्ति उतार सके, इसके लिए उसे छोटा कर दिया गया। इसी वजह से गीयर लीवर में भी बदलाव किया गया। जबकि चालकों का कहना है कि पूर्व मुहैया कराई गई बसों का गीयर लीयर कारों जैसा है, जबकि नई बसों का गीयर लीवर अजीबोगरीब है। गीयर लीवर पर तमाम विशेषज्ञ भी सवाल उठा रहे हैं।

खरीद से पहले अशोक लेलैंड की बसों की होगी जांच

परिवहन निगम प्रबंधन की ओर से नई बसों को खरीदते समय विभागीय अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों के साथ ही चालकों की टीम भी संबंधित कंपनी के प्लांट में भेजी जाएगी। चालकों की टीम गाड़ियों को चलाकर उनकी गुणवत्ता परखेगी। साथ ही यह जानकारी देंगे कि बसों के चलाने में उन्हें क्या दिक्कतें आ रही हैं।

प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि टाटा कंपनी की नई गाड़ियों में आए दिन गीयर लीवर टूटने की घटनाओं के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। प्रबंध निदेशक चौहान ने बताया कि टाटा कंपनी के साथ ही अशोक लेलैंड कंपनी से जो 150 बसें खरीदी जा रही हैं उनकी जांच को भी निगम के बेहद तेजतर्रार चालकों की टीम भेजी जाएगी। यह टीम बताएगी कि बसोें को लिया जाना उचित है या नहीं।


बता दें कि टाटा कंपनी की बसों को खरीदते समय महाप्रबंधक दीपक जैन की अगुवाई में विभागीय अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गोवा भेजी गई थी। टीम ने गाड़ी की जांच भी की थी। अब एक-एक करके गाड़ियों में खामियां उजागर हो रही हैं तो इन अधिकारियों के दौरे को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। 

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