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Uttarakhand: अब गलत तथ्यों के आधार पर CTET नहीं कर सकेंगे शिक्षक, विभाग ने पिछले दिनों जारी NOC पर लगाई रोक

Thu, 11 Jun 2026 07:43 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Thu, 11 Jun 2026 07:43 AM IST
सार

अब गलत तथ्यों के आधार पर शिक्षक सीटीईटी नहीं कर सकेंगे। विभाग ने पिछले दिनों जारी एनओसी पर रोक लगा दी है।

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Uttarakhand Teachers will no longer be able to take CTET exam based on false information NOC issued recently
शिक्षक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

प्रदेश में शिक्षकों की गलत तथ्यों के आधार पर सीटीईटी करने की तैयारी को झटका लगा है। रविवार सात जून को अमर उजाला में इससे संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने इन शिक्षकों को इस परीक्षा के लिए दी गई एनओसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

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सुप्रीमकोर्ट ने पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य किया है। पदोन्नति और नौकरी में बने रहने के लिए उन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी करना होगा। हालांकि जिन शिक्षकों की पांच साल या इससे कम नौकरी बची है वे इससे मुक्त रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षकों में अपनी नौकरी को लेकर संशय बना है।

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शिक्षकों की एनओसी पर रोक
यही वजह है कि बड़ी संख्या में शिक्षक वर्तमान नियम के हिसाब से सीटीईटी में बैठने के लिए पात्र न होने के बावजूद गलत तथ्यों के आधार पर सीटीईटी के लिए आवेदन कर रहे हैं। वर्ष 2010 से पहले के नियुक्त शिक्षक जो बीएड हैं, वे सीटीईटी के लिए विभाग से एनओसी के बाद सीबीएसई के पोर्टल में खुद को बीटीसी या डीएलएड दर्शा रहे हैं। विभाग ने अब इन शिक्षकों की एनओसी पर रोक लगा दी है।
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जिला शिक्षा अधिकारी हरिद्वार अमित कुमार चंद ने जारी आदेश में कहा, सीटीईटी प्रथम व द्वितीय के लिए विभिन्न तिथियों में जो एनओसी दी गई है, उसे लेकर संज्ञान में आया है कि आवेदन करने वाले शिक्षकों की अर्हता के संबंध में उप शिक्षा अधिकारी स्तर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। जिससे आवेदक शिक्षकों की पात्रता के संबंध में संशय है। इसे देखते हुए शिक्षकों को दी गई एनओसी अगले आदेश तक स्थगित की जाती है।


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उप शिक्षा अधिकारी को यह भी आदेश दिया गया है कि पात्र शिक्षकों के प्रकरण संस्तुति सहित कार्यालय में उपलब्ध कराएं। उधर, कुछ अन्य जिलों में भी यह स्थिति बनी है। जिनमें शिक्षकों ने गलत तथ्यों के आधार पर सीटीईटी के लिए आवेदन किया हुआ है।

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