उत्तराखंड: 105 आश्रमों व धर्मशाला संचालकों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नोटिस
- पंजीकरण नहीं कराने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शुरू की कार्रवाई
- अनिवार्य है गंगा-यमुना के किनारे बने होटलों, धर्मशालाओं, आश्रमों का बोर्ड में पंजीकरण
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उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण नहीं कराने पर धर्मशालाओं और आश्रमों के संचालकों पर बोर्ड के अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी की ओर से हरिद्वार और ऋषिकेश के 105 आश्रमों व धर्मशालाओं के संचालकों को नोटिस जारी कर दिया गया है।
बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल का कहना है कि यदि संचालकों ने जल्द पंजीकरण नहीं कर नहीं कराया तो ऐसे सभी आश्रमों, धर्मशालाओं को सील कर दिया जाएगा। बोर्ड की ओर से पंजीकरण शुल्क को भी माफ कर दिया गया लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद होटल, धर्मशाला और आश्रम के संचालक पंजीकरण नहीं करा रहे हैं।
एनजीटी ने भी दिए थे निर्देश
बता दें कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देशित किया है कि गंगा-यमुना के किनारे बने होटलों, धर्मशालाओं व आश्रमों को बोर्ड में पंजीकृत किया जाए। एनजीटी के इस आदेश के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सभी होटलों, धर्मशालाओं, आश्रमों के संचालकों को नोटिस जारी किया गया। जिसमें हिदायत दी गई कि बोर्ड में पंजीकरण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।
पोखरियाल ने बताया कि फिलहाल पहले चरण में हरिद्वार और ऋषिकेश के 57 आश्रमों और 48 धर्मशालाओं के संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस जारी होने के बावजूद यदि संचालकों द्वारा पंजीकरण की प्रक्रिया जल्द नहीं अपनाई जाती है तो ऐसे सभी होटल, धर्मशाला और आश्रमों को सील कर दिया जाएगा।