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उत्तराखंड: हर विकास प्राधिकरण में बनेगा अवैध निर्माण निगरानी डैशबोर्ड; शहरों में सिटी पार्क-पिंक टॉयलेट जरूरी

Wed, 02 Sep 2026 09:25 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Wed, 02 Sep 2026 09:25 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि इसी माह से सभी विकास प्राधिकरणों के तहत आने वाले क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण के कार्य शुरू किए जाएं।

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Uttarakhand CM Dhami Order Illegal construction monitoring dashboard set up in every development authority
समीक्षा बैठक करते सीएम धामी - फोटो : सूचना विभाग

विस्तार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में बिना अनुमति के होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए हर विकास प्राधिकरण में अवैध निर्माण निगरानी डैशबोर्ड बनाया जाएगा। इससे निर्माण से लेकर ध्वस्तीकरण तक की कार्रवाई की सही समय पर निगरानी हो सकेगी। इसके अलावा शहरों में सिटी पार्क व पिंक टॉयलेट अनिवार्य होंगे। पार्किंग सुविधा के लिए एमडीडीए व हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के माध्यम से पीपीपी मॉडल पर पार्किंग की कार्ययोजना बनाई जाए।

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बुधवार को सीएम आवास में मुख्यमंत्री ने आवास विभाग के अधीन विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। मास्टर प्लान, परियोजनाओं, नागरिक सुविधाओं, सौंदर्यीकरण, पार्किंग, आवासीय योजनाओं और अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई से जुड़े प्रत्येक कार्य के लिए समय सीमा निर्धारित कर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाए। योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभाव धरातल पर दिखाई देना चाहिए।
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मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि इसी माह से सभी विकास प्राधिकरणों के तहत आने वाले क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण के कार्य शुरू किए जाएं। इन कार्यों का स्वरूप और गुणवत्ता जी 20 समिट के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण कार्यों की तरह आकर्षक और प्रभावी होनी चाहिए। उन्होंने 15 अक्तूबर तक सौंदर्यीकरण के कार्य पूरे करने की समय सीमा तय की है। प्राधिकरणों के अधीन आने वाली सड़कों की स्थिति में तत्काल सुधार किया जाए। सड़कों की गुणवत्ता किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सीएम धामी ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्राप्त कर चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवारों की सूची तैयार कर 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराया जाए।
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मुख्यमंत्री ने सभी शहरों में सिटी पार्क व पिंक टॉयलेट की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवश्यकता के अनुसार पिंक टॉयलेट विकसित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अगली समीक्षा बैठक तक प्रदेश में इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हासिल कर लिया जाए। बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव विनय शंकर पांडेय, डॉ. आर राजेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

आधुनिक तकनीक से अवैध निर्माण को चिह्नित करें

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शुरुआती स्तर पर ही अवैध निर्माण चिह्नित करें। इसके लिए जीआईएस, सैटेलाइट चित्र और ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए। यदि किसी अवैध निर्माण के मामले में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। प्रत्येक विकास प्राधिकरण में अवैध निर्माण निगरानी डैशबोर्ड बना कर संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण की तारीख, जारी किए गए नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तक प्रत्येक चरण की रियल टाइम स्थिति उपलब्ध होनी चाहिए।

सिटीजन फ्रेंडली हो प्राधिकरण की वेबसाइट

मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट को नागरिकों के लिए अधिक सरल और उपयोगी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की वेबसाइट सिटीजन फ्रेंडली होनी चाहिए, जिससे आम नागरिकों को योजनाओं, मानचित्र स्वीकृति, शुल्क, नियमों और अन्य सेवाओं से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।

लैंड पूलिंग योजना तैयार करें

मुख्यमंत्री ने लैंड पूलिंग योजना के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दो या तीन विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में लैंड पूलिंग योजना लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। इस योजना के अंतर्गत किसानों और भूमि मालिकों को होने वाले लाभ का स्पष्ट एवं पारदर्शी मॉडल तैयार किया जाए और उन्हें योजना की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन ग्रामीण व अर्द्धशहरी क्षेत्रों में विकास प्राधिकरणों का क्षेत्र आता है, वहां भी नागरिक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए।

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