फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand state foundation day 2020 : twenty year or establishment

Uttarakhand State Foundation Day 2020 : उत्तराखंड के 20 साल, स्वास्थ्य और गांवों को मजबूत विकास की दरकार

Fri, 06 Nov 2020 04:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 06 Nov 2020 04:12 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand state foundation day 2020 : twenty year or establishment
- फोटो : AMAR UJALA FILE PHOTO

नौ नवंबर 2020 को उत्तराखंड पूरे 20 साल का हो जाएगा। किसी सजा की तरह मिलने वाली पोस्टिंग और झंगोरा-कोदा का उत्तराखंड अब ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक की अर्थव्यवस्था का राज्य है। इतना होने पर भी राज्य के सामने चुनौतियों का पहाड़ मौजूद है।

विज्ञापन


कुछ चुनौतियां का सामना राज्य ने जीवटता के साथ किया और कुछ की अनदेखी भी हुई। 2013 की केदारनाथ आपदा ने एक ऐसा ही घाव दिया। यह घाव अभी पूरी तरह से भरा नहीं है। अब 2020 में राज्य के सामने कोरोना संक्रमण एक और चुनौती लेकर आया है।
विज्ञापन


कोरोना से उबरने का संकेत राज्य दे ही रहा है, लेकिन इसके दो महत्वपूर्ण सबक भी हैं, जिन पर राज्य सरकार को मंथन करना होगा। पहला है जन स्वास्थ्य और दूसरा है ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार।
विज्ञापन
विज्ञापन


अब तक के कारोना काल का प्रदेश को मिला सबसे बड़ा सबक

नौ नवंबर 2020 को स्थापना के 21 वें साल में प्रवेश कर रहे उत्तराखंड को कोरोना से चेतावनी मिली है। यह चेतावनी है स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में सुधार की और गांवों के विकास को मजबूत आधार देने की।

कोरोना के कारण प्रदेश को अन्य राज्यों की तरह पांच लॉकडाउन का सामना करना पड़ा। इससे औद्योगिक उत्पादन और सेवा क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक योगदान उद्योगों का है और कोरोना के कारण इस क्षेत्र पर जो चोट पड़ी, उसका नुकसान प्रदेश सरकार को जीएसटी में भी उठाना पड़ा। अर्थव्यवस्था में दूसरा योगदान सेवा क्षेत्र का है और इस पर भी कोरोना का साया रहा।

ऐसे में सारा दारोमदार ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आ गया। प्रदेश में आज भी करीब 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में है। मुसीबत यह है कि ग्रामीण क्षेत्र का प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान लगातार कम ही होता जा रहा है। कृषि में विकास दर चार प्रतिशत से कम है। अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र का योगदान मात्र दस प्रतिशत है। असमान विकास, संपर्क की कमी के कारण यह सेक्टर बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है।

अभी हासिल करनी हैं कई मंजिलेें

दूसरी ओर, स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी प्रदेश को अभी कई मंजिलेें हासिल करनी हैं। नीति आयोग की हाल ही आई रिपोर्ट में उत्तराखंड 17 वें स्थान पर पहुंच गया था। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में करीब 700 डाक्टरों की कमी है। इनमें से कोरोना काल में ही प्रदेश सरकार ने करीब 483 डाक्टरों की तैनाती दी है। इसके बाद भी पर्वतीय और दूर दराज के इलाकों में डाक्टरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी अभी मौजूद है।

अर्थव्यवस्था की स्थिति

खेती किसानी - 10.57 प्रतिशत
उद्योग - 48.93
सेवा क्षेत्र- 40.50

कोरोना ने सिखाया, गांव, खेत  खलिहान पर हो तवज्जो 

यह बात सही है कि प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस करने की जरूरत है। हरिद्वार की प्रति व्यक्ति आय ढाई लाख रुपये है और पर्वतीय जिलों की प्रति व्यक्ति आय 80 हजार भी नहीं। प्रदेश में कृषि का बजट भी बहुत कम है। कोरोना ने यह तो सिखा ही दिया है कि इस क्षेत्र पर फोकस करना ही होगा। इसी तरह 71 प्रतिशत प्रवासी आकर रुके हैं और 34 प्रतिशत इसमें से कृषि से जृुड़े हैं। इस संभावना का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए।
- एसएस नेगी, उपाध्यक्ष पलायन एवं ग्रामीण विकास आयोग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed