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Uttarakhand: ट्रैकिंग रूट पर पहाड़ की छानियां अब बनेंगी इको‑हट्स, पर्यटन और वन विभाग ने बनाई योजना

Sun, 10 May 2026 05:01 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 10 May 2026 05:01 PM IST
सार

इको हट्स में बायो‑टॉयलेट, जल उपचार और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि पहाड़ और जंगलों की स्वच्छता बनी रहे।

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Uttarakhand: Mountain Huts Will Now Become Eco-Huts For Increase Tourism Proposal ready
छानिया - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पर्यटन और वन विभाग मिलकर ट्रैकिंग रूट पर स्थित छानियों को इको‑हट्स के तौर पर विकसित करेंगे। इसके तहत पहले चरण में पौड़ी गढ़वाल के दूधातोली‑बिनसर और देहरादून जिले के जौनसार क्षेत्र के नागथात स्थित झुलका डांडा ट्रैक पर स्थानीय पारंपरिक छानियों को इको‑हट्स के रूप में विकसित करने का काम होगा। इसके बाद अन्य जगहों पर इसी मॉडल को अपनाया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।

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पर्यटन विभाग के अनुसार इन इको हट्स में बायो‑टॉयलेट, जल उपचार और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि पहाड़ और जंगलों की स्वच्छता बनी रहे। सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल बताते हैं कि इन इको हट्स का संचालन युवाओं का समूह बनाकर करेंगे। युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।
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इससे युवाओं को अपने गांवों में ही रोजगार मिलेगा और पलायन रुकेगा। इससे राजस्व का सबसे ज़्यादा हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में ही रहेगा। लोगों को होमस्टे अनुदान योजना के तहत उत्तराखंड पर्यटन विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। ट्रैकिंग रूट पर रात्रि विश्राम की सुविधा नियमित और नियंत्रित तरीके से उपलब्ध होगी।
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हिमालयी संस्कृति का प्रतीक हैं छानियां
पर्वतीय क्षेत्रों में छानियों या खरक की जीवनशैली हिमालयी संस्कृति का प्रतीक हैं। यह आमतौर पर पत्थर, लकड़ी और घास से बने साधारण झोपड़े होते हैं, जो चारागाहों के बीच स्थापित किए जाते हैं। ग्रामीण परिवार साल के लगभग छह महीने (अप्रैल से अक्तूबर तक) इन अस्थायी आवासों में पशुओं के साथ व्यतीत करते हैं, जो जंगलों और बुग्यालों में बसे होते हैं। यह प्रथा न केवल जीविका का आधार है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अन्य जगहों पर भी प्रयास होगा
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच के तहत ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार की मुहिम में शामिल करते हुए यह प्रयास किया जा रहा है। प्रस्तावित जगह पर सफल संचालन के बाद राज्य के अन्य सभी ट्रैकों के आसपास स्थित सभी छानियों को भी इसी मॉडल के तहत इको हट्स और होमस्टे शैली में बदला जाएगा। इससे कई तरह के रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। यह प्रयोग उत्तराखंड की ईको‑टूरिज्म नीति की महत्वपूर्ण कड़ी है।

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