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उत्तराखंड की बेटी शीतल ने फतह किया माउंट एवरेस्ट, इससे पहले बना चुकी हैं विश्व रिकार्ड

Thu, 16 May 2019 09:54 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 16 May 2019 09:54 PM IST
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uttarakhand shital climb on Mount Everest
माउंट एवरेस्ट विजेता शीतल - फोटो : अमर उजाला

सोरघाटी (पिथौरागढ़) की बेटी शीतल ने बृहस्पतिवार को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को फतह कर जिले के साथ ही उत्तराखंड और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने नेपाल के दक्षिणी छोर से चढ़ाई कर बृहस्पतिवार सुबह 6 बजे माउंट एवरेस्ट में भारतीय ध्वज फहराया।

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शीतल से पहले पिथौरागढ़ जिले के लवराज धर्मशक्तू सात बार माउंट एवरेस्ट फतह कर चुके हैं। इस जिले के मोहन सिंह गुंज्याल, योगेश गर्ब्याल, सुमन कुटियाल दताल, रतन सिंह सोनाल, कविता बुढ़ाथोकी एवरेस्ट की चोटी को फतह कर चुकी हैं। 

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शीतल बुधवार की रात 9 बजे 8000 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-4 से एवरेस्ट की चोटी के लिए निकली थीं। बृहस्पतिवार सुबह 6 बजे उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर विजय पा ली। शीतल बीते एक मई को दिल्ली से एवरेस्ट अभियान पर निकली थीं। वह 5 मई को एवरेस्ट के बेस कैंप को रवाना हुईं। 15 मई तक बेस कैंप में क्लाइंबिंग का अभ्यास किया।

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शीतल के जुनून को मिला इनका साथ 

13 मई को शीतल 6300 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-2, 14 मई को 7400 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-3 और 15 मई को 8000 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-4 पहुंचीं। इसी दिन रात 9 बजे एवरेस्ट फतह के लिए निकल गईं थी। शीतल के कोच योगेश गर्ब्याल ने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह 6 बजे शीतल ने एवरेस्ट फतह कर ली।

 

वह कैंप-4 वापस लौट आईं हैं। 7 बार के एवरेस्ट विजेता लवराज धर्मशक्तू, नंदा देवी चोटी को फतह करने वाली विश्व की पहली महिला चंद्रप्रभा ऐतवाल को आदर्श मानने वाली शीतल अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता सपना देवी को देती हैं, जिन्होंने विषम परिस्थिति में उनका साथ दिया। 

शीतल की लगन, मेहनत और उसके जुनून को देखते हुए कई कंपनियों ने इस अभियान को पूरा करने में उनका साथ दिया। शीतल ओएनजीसी की स्कॉलर हैं। एवरेस्ट अभियान में उनको द हंस फाउंडेशन, सनपेट, एयूकेएमएस, सुपरटैक, क्लिफ क्लाइंबर्स, आईएलसी पिथौरागढ़, वोलांगोंग आस्ट्रेलिया के भारतीय समूह के साथ ही और कई कंपनियों का सहयोग मिला है।  

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