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उत्तराखंड संस्कृति यात्रा: लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है मां पूर्णागिरि धाम

Sun, 28 Mar 2021 12:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत
सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 28 Mar 2021 12:52 PM IST
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Uttarakhand Sanskriti Yatra: Maa Purnagiri Dham is centre of faith of millions of devotees
मां पूर्णागिरि पीठ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

सब्बौ परि कृपा देखून्य वाली, मैयां छै तू पूर्णागिरि वाली, त्यर दरबार में जू लगे उंछ कभै न जांछ खाली (सब पर कृपा दिखाने वाली, मईया है पूर्णागिरि वाली, तेरे द्वार पर सब हैं आते, कभी न कोई जाए खाली)। चंपावत जिले का प्रवेश द्वार टनकपुर अतीत में प्राचीन मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव होने के साथ महाकवि कालिदास वर्णित अलकापुरी है।

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इसी क्षेत्र में स्थित मां पूर्णागिरि पीठ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री पार्वती (सती) ने अपने पति के अपमान के विरोध में दक्ष प्रजापति की ओर से आयोजित यज्ञ कुंड में स्वयं कूदकर प्राणों की आहुति दे दी थी।
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इसके बाद भगवान विष्णु ने अपने चक्र से महादेव के क्रोध को शांत करने के लिए सती पार्वती के शरीर के 64 टुकड़े कर दिए। जहां-जहां उनके शरीर के टुकड़े गिरे, वहां एक शक्ति पीठ स्थापित हुआ। इसी क्रम में पूर्णागिरि शक्तिपीठ स्थल पर सती पार्वती की नाभि गिरी थी।
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पूर्णागिरि शक्तिपीठ चंपावत जिले के टनकपुर क्षेत्र के पर्वतीय अंचल में स्थापित है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पूर्णागिरि धाम की तीर्थ यात्रा मात्र धार्मिक आस्था से ही नहीं, अपितु नैसर्गिक सौंदर्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। पूर्णागिरि धाम शारदा नदी के पास स्थित अन्नपूर्णा की चोटी पर लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां चैत्र मास में आयोजित होने वाले मेले में उमड़ने वाली भीड़ लघु कुंभ का रूप लेती है। इस वर्ष आगामी 30 मार्च को पूर्णागिरि मेले का शुभारंभ होगा। 

अंग्रेज शिकारी जिम कॉर्बेट को हुए थे दिव्य पुंज के दर्शन

पूर्णागिरि के आसपास का क्षेत्र अंग्रेज शिकारी जिम कॉर्बेट की कर्मस्थली भी रहा है। तल्लादेश क्षेत्र में वर्ष 1929 में नरभक्षी बाघ का शिकार करते समय जिम कॉर्बेट को पूर्णागिरी मंदिर के पास प्रकाश पुंज के दिव्य दर्शन हुए थे। जिम कॉर्बेट ने इस क्षेत्र में पूर्णागिरि से 12 किमी दूरी पर 1938 में टाक गांव में अपने जीवन के अंतिम नरभक्षी बाघ का शिकार किया था।

इस तरह पहुंचा जा सकता है पूर्णागिरि धाम

वर्तमान में पूर्णागिरि दर्शन के लिए टनकपुर रेल मार्ग से पहुंचा जा सकता है। टनकपुर सड़क मार्ग से बरेली से पीलीभीत खटीमा होकर पहुंचा जा सकता है।

टनकपुर से 16 किमी दूर स्थित भैरव मंदिर तक टैक्सी, प्राइवेट बस एवं रोडवेज बसों की नियमित सेवा के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। भैरव मंदिर से करीब चार किमी की दूरी श्रद्धालुओं को पैदल तय करनी होती है। 

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