Amar Ujala Samvad: अध्यात्म गुरु गौरांग बोले- क्रोध सबकुछ खत्म कर देता है, सुनाई एक कहानी
Uttarakhand Samvad 2023: कार्यक्रम के दौरान मंच से अध्यात्म गुरु गौरांग प्रभु ने कहा विज्ञापन का जमाना हो गया है। नकल की जा रही है।
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Uttarakhand Samvad 2023: भारत के जाने-माने अध्यात्म गुरु गौरांग दास ने 'अमर उजाला संवाद उत्तराखंड' में संबोधित किया। इस्कॉन, मुंबई से जुड़े गौरांग दास आईआईटी स्नातक हैं। उन्होंने योग और अध्यात्म के विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि किस तरह ये दोनों विषय आज सबसे ज्यादा प्रासंगिक और जरूरी हैं। अमर उजाला संवाद उत्तराखंड कार्यक्रम के दौरान मंच से अध्यात्म गुरु गौरांग प्रभु ने कहा विज्ञापन का जमाना हो गया है, लोग दूसरों को देख कर नकल करने में लगे हैं। हम दूसरों को देखकर खुद को चला रहे हैं। कहा कि लोग आज एक दूसरे से तुलना कर रहे हैं। लेकिन हमें यह देखना है कि हम क्या कर सकते हैं। आगे कहा कि किसी भी काम को करने के लिए फोकस जरूरी है। लेकिन लोग आज एंजाइटी का शिकार हैं।
अध्यात्म गुरु गौरांग प्रभु ने कहा कि विज्ञापन का जमाना हो गया है, लोग दूसरों को देखकर नकल करने में लगे हैं। हम दूसरों को देखकर खुद को चला रहे हैं। लोग आज एक दूसरे से तुलना कर रहे हैं। लेकिन हमें यह देखना है कि हम क्या कर सकते हैं। जब तक भारत को भारत के दृष्टिकोण से नहीं देखेंगे तब तक हम भारत को समझ नहीं सकते। पैसे देकर हम कार खरीद सकते हैं लेकिन संस्कार नहीं खरीद सकते। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी कितनी भी आए, हम उस पर जीत पर सकते हैं। अगर अपने क्रोध पर काबू कर सके। गौरांग दास अपने जिंदगी के अनुभवों से बताया सही जीवन जीने का तरीका।
आध्यात्मिक गुरु ने सुनाई एक नंबर से पीछे रहने वाले दोस्त की कहानी
'उजाला देने वाली अग्नि होती है। यानी फायर। फायर का पहला एफ है फोकस। मन भटकता है, मन परेशान करता है। इसके लिए चाहिए फोकस। आज 30 करोड़ लोग अवसाद के शिकार हैं। प्रतिदिन 370 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। मैं जब आईआईटी में था, तब मेरा दोस्त टॉपर था। अचानक उसने एक दिन आत्महत्या की कोशिश की। मैं चकरा गया। मैंने कहा कि आप तो टॉपर हो, आपने यह प्रयास क्यों किया। वह कहता है कि हमेशा मुझे गोल्ड मेडल की आदत थी, इस बार सिल्वर मिला तो मुझसे रहा गया नहीं गया।
आज का समाज तुलना करने वाला बन गया
'यह विज्ञापन का जमाना हो गया है। एक हमारे मित्र किसी कॉन्फ्रेंस में गए। किसी ने बिजनेस कार्ड दिया। नाम के नीचे शिक्षा लिखी हुई थी पीएचडी, बीएफ। मतलब पूछा तो बताया कि पीएचडी बट फेल। पूछने पर कहा कि हमारे पिताजी की इच्छा थी कि हम पीएचडी बनें, लेकिन तीन साल बाद पता चला कि हमसे होगा नहीं। इसलिए हम निकल गए। फिर भी लोग बोलते थे तो मैंने कार्ड पर सच लिख दिया। अब लोगों को लगता है कि यह पीएचडी के आगे की कोई डिग्री है। जितना हम कम्पेयर करेंगे, उतना हम यह नहीं जान पाएंगे कि हम क्या कर सकते हैं। जो कर सकते हैं, वह भी ठीक तरह से नहीं कर पाएंगे।'
एक व्यक्ति ने कहा कि मेरे पास सागर के जल की तरह धन है, लेकिन समझ नहीं आता कि मन में असंतोष क्यों है। आपके पास कुएं जैसा मीठा जल है। भय और इच्छा से ऊपर तीसरा स्तर है, जिसे कहते हैं कर्तव्य। यह सत्वगुण से उत्पन्न होता है। चाहे मुझे यह काम अच्छा लगे, या न लगे, हम कर्तव्य परायण बने रहेंगे। यह आवश्यक है। इसलिए कहा गया है कि कर्म करो, फल की इच्छा मत करो।
क्रोध की एक कहानी सुनाई
'फायर में आर के मायने हैं रेजिलिएंस। एक बार जेल में प्रोग्राम हुआ तो कैदी ने कहा कि मंच पर आकर सवाल पूछूंगा। उसने 12 मर्डर किए थे। मैंने कहा कि इतनी कम उम्र में कैसे इतने जुर्म कर दिए। उसने कहा कि जब क्रोध का पारा चढ़ता है तो मन पर अंधकार छा जाता है। उस आवेश में आकर मैंने क्या-क्या कर दिया।