फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Uttarakhand Salt by-election 2021: Five candidates including regional parties Election security deposit forfeited

उत्तराखंड सल्ट उपचुनाव नतीजे 2021: क्षेत्रीय दलों समेत पांच प्रत्याशियों की जमानत जब्त

Sun, 02 May 2021 10:49 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 02 May 2021 10:49 PM IST
विज्ञापन
Uttarakhand Salt by-election 2021: Five candidates including regional parties Election security deposit forfeited
सल्ट सीट पर चुनाव के नतीजे घोषित - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड के सल्ट उप चुनाव में क्षेत्रीय दलों समेत कुल पांच प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। चुनाव में यदि प्रत्याशी कुल पड़े मतों का छठा हिस्सा (यानी 16.6 फीसदी) मत हासिल नहीं कर पाता है तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है। सल्ट उप चुनाव में कुल 41735 मत पड़े। जमानत बचाने के लिए प्रत्येक प्रत्याशी को कम से कम 6956 मतों की जरूरत थी, लेकिन कांग्रेस को छोड़कर शेष पांच प्रत्याशी उक्रांद के पान सिंह, उपपा के जगदीश चंद्र, पीपीई डेमोक्रेटिव के नंद किशोर, सर्वजन स्वराज पार्टी के शिव रावत, निर्दलीय सुरेंद्र सिंह जमानत नहीं बचा सके। इन पांचों प्रत्याशियों को कुल मिलाकर मात्र 2134 वोट मिले।

विज्ञापन


उत्तराखंड सल्ट उपचुनाव 2021: सहानुभूति की लहर से भाजपा ने लगाई जीत की हैट्रिक, कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न, तस्वीरें...
विज्ञापन


इस बार के प्रत्याशी
भाजपा- महेश जीना 
कांग्रेस- गंगा पंचोली
सर्वजन स्वराज पार्टी- शिव रावत
उक्रांद समर्थित- पान सिंह
पीपीई डेमोक्रेटिव-नंद किशोर
उपपा-जगदीश चंद्र
निर्दलीय-सुरेंद्र सिंह

किस प्रत्याशी को कितने मिले मत
महेश जीना-भाजपा-21874
गंगा पंचोली-कांग्रेस-17177
सुरेंद्र सिंह- निर्दलीय-620
जगदीश चंद्र-उपपा-493
शिवसिंह रावत-एसएसपी-466
पान सिंह-उक्रांद-346
नंद किशोर-पीपीडी-209
नोटा-721
रद्द-63

क्षेत्रीय दल और निर्दलीयों को पछाड़कर नोटा तीसरे नंबर पर

सल्ट उप चुनाव में नोटा ने क्षेत्रीय दलों और निर्दलीयों को भी पीछे छोड़ दिया। 721 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। चार क्षेत्रीय दल और एक निर्दलीय प्रत्याशियों को नोटा ने इस चुनाव भी में पछाड़ दिया। कुल 12 चक्र की गणना में भाजपा, कांग्रेस के बाद नोटा तीसरे नंबर पर रहा। 

जनता ने क्षेत्रीय दलों को फिर बुरी तरह नकारा
सल्ट विधानसभा उप चुनाव में एक बार फिर जनता ने क्षेत्रीय दलों को बुरी तरह नकार दिया है। अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय में उक्रांद का अच्छा खासा दबदबा रहता था, लेकिन सल्ट उप चुनाव में उक्रांद प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। उक्रांद प्रत्याशी 346 वोट पाकर छठे स्थान पर रहे।

अविभाजित उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय दल उत्तराखंड उक्रांद दल का अच्छा खासा दबदबा रहा था। तब जिले में दो विधानसभा सीटें थी। उक्रांद के संस्थापक सदस्यों में रहे जसवंत सिंह बिष्ट वर्ष 1980 और 1989 में रानीखेत विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने गए, जबकि अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद उक्रांद के संस्थापक और थिंक टैंक केंद्रीय अध्यक्ष रहे स्व. विपिन त्रिपाठी 2002 में द्वाराहाट विधानसभा सीट से विधायक रहे।

उनके निधन के बाद द्वाराहाट सीट के उप चुनाव में उनके पुत्र पुष्पेश त्रिपाठी 2005 में विजयी हुए और 2007 में भी वह विधायक रहे। लेकिन पिछले करीब एक दशक से क्षेत्रीय दल उक्रांद का जिले में जनाधार लगातार खिसकता जा रहा है और लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनाव में तक उक्रांद के मत प्रतिशत में लगातार काफी गिरावट आ रही है। सल्ट उप चुनाव में भी इस बार प्रमुख क्षेत्रीय दल उक्रांद प्रत्याशी की जमानत तक नहीं बच सकी है। 

काम आई बूथ स्तरीय भाजपा की तैयारी

भाजपा ने बूथ स्तर पर पूरी तैयारी की थी। बूथ स्तर पर कैबिनेट मंत्रियों को चुनाव प्रचार में लगाया था। सांसद अजय टम्टा और अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल, राज्यमंत्री धन सिंह रावत और रेखा आर्या सहित अन्य बड़े नेता बूथ स्तर पर छोटी छोटी सभाएं करके जनता से वोट मांग रहे थे। इससे भाजपा के पक्ष में अच्छा माहौल बन गया। यही नहीं, भाजपा पूरी तरह से एकजुट भी रही।

सल्ट से भाजपा की ओर से टिकट के अन्य दावेदार डॉ. यशपाल सिंह रावत और दिनेश मेहरा टिकट न मिलने के बाद भी चुनाव प्रचार में जुटे रहे। इधर, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव और विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल के अलावा अन्य कोई बड़ा नेता यहां चुनाव प्रचार में नहीं पहुंचा। हरीश रावत बीमार थे। उपचार के बाद वह चुनाव प्रचार के अंतिम समय में आ पाए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश और रंजीत रावत चुनाव प्रचार से दूर रहे। इसका असर भी जनता पर पड़ा। 

अब 2022 में गंगा को टिकट मिलना मुश्किल
सल्ट से पूर्व कांग्रेस विधायक रंजीत रावत अपने बेटे और यहां के ब्लॉक प्रमुख विक्रम रावत के लिए टिकट मांग रहे थे लेकिन उनके बेटे को टिकट नहीं मिला। रंजीत रावत ने खुलकर नाराजगी जताई। लोगों का यह भी कहना है कि रंजीत की नाराजगी भी गंगा को भारी पड़ी है, अन्यथा इतने बड़े अंतर से यह हार नहीं होती। अब अगली बार विधानसभा चुनाव में गंगा को टिकट मिलना मुश्किल है। वह यहां से लगातार दूसरी बार हार गईं हैं।

भाजपा को 2017 से ज्यादा मिले वोट
भाजपा प्रत्याशी महेश जीना को कुल 21874 वोट मिले जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में उनके भाई सुरेंद्र जीना को 21581 वोट मिले थे। राज्य गठन के बाद इस सीट पर सबसे ज्यादा मत सुरेंद्र जीना को 2012 के विधानसभा चुनाव में 23956 मत मिले थे। इधर गंगा पंचोली को पिछले बार से कम वोट मिले हैं। उन्हें पिछले बार 18677 मत मिले थे। 

बंगाल ने कम कर दी सल्ट की खुशी
पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली करारी हार ने सल्ट में मिली जीत की खुशी कम कर दी। कोविड नियम और बंगाल में हार के कारण भाजपाइयों ने खुशी के तेवर कम ही रखे। ज्यादातर नेता सोशल मीडिया पर ही एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे। हालांकि कुछ जगहों पर मिष्ठान वितरण और आतिशबाजी हुई लेकिन फिर भी कर्फ्यू के चलते भाजपाई कम ही बाहर निकले।

विज्ञापन

दलित नेताओं के दम पर किया जीत का बड़ा अंतर

जहां एक समय दलित मतदाता कांग्रेस के लिए मजबूत आधार माने जाते थे वहीं इस समय भाजपा ने अपने दलित नेताओं के दम पर कांग्रेस के इस वोट बैंक पर सेंधमारी की है। कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्या, सांसद अजय टम्टा, राज्यमंत्री रेखा आर्या सल्ट विधानसभा के उपचुनाव में पूरे जोरशोर से जुटे थे। यही नहीं यशपाल आर्या ने तो खुलकर दलित मतदाताओं से भाजपा के पक्ष में वोट देने की अपील की थी। अब कुमाऊं में भाजपा के दलित चेहरों के बराबर कांग्रेस में नेता नहीं हैं। खास बात यह है कि यशपाल और रेखा आर्या को भाजपा कांग्रेस से ही लेकर आई है। इन बड़े दलित नेताओं के दम पर भाजपा ने कांग्रेस के कोर वोट बैंक में अच्छी सेंध लगाई है। जिस वजह से सल्ट में भाजपा ने कम मतदान के बाद भी इतने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। 

हरदा की अपील नहीं आई काम, कांग्रेस के अरमान हुए धड़ाम
इस चुनाव में हरीश रावत हरदा की भी साख दांव पर लगी थी। उन्होंने ही गंगा पंचोली को टिकट दिलवाने में अहम भूमिका निभाई थी। यही नहीं उन्होंने अपने पुराने साथी रंजीत रावत तक के साथ बैर ले लिया। उन्होंने एम्स में अपने उपचार के दौरान गंगा के समर्थन में सोशल मीडिया पर वीडियो भी डाला था, लेकिन उनका असर नहीं पड़ा। हरीश रावत का विरोधी खेमा अब पार्टी के अंदर इस हार को भुनाएगा और अगले विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय इस मुद्दे को उठाएगा। इधर, कांग्रेस की बुरी हार के बाद रंजीत रावत यह बात सही साबित करने में सफल हुए कि सल्ट में उनकी नाराजगी कांग्रेस को भारी पड़ गई है। खासतौर से ठाकुर मतदाताओं में उनकी पकड़ का असर देखने को मिला है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed