रोडवेज की खटारा बसों में अर्द्घकुंभ यात्रा करेंगे यात्री
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हरिद्वार डिपो को नई बसें नहीं मिलने के कारण अब अर्द्धकुंभ मेले के दौरान खटारा बसों से ही तीर्थयात्री यात्रा करेंगे।
ऐसे में परिवहन निगम को अर्द्धकुंभ मेले से ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है। जबकि दूसरे प्रदेशों की बसें बेहतर राजस्व कमाएंगी। करीब तीन साल से डिपो के बेड़े को ज्यादा बसें नहीं मिल पाई हैं।
तीन साल पहले रोडवेज मुख्यालय की ओर से 150 नई बसें मंगाई गई थी। जिसमें से हरिद्वार डिपो के हिस्से में महज चार बसे आई थीं।
करीब नौ माह पहले भी रोडवेज मुख्यालय की ओर से पहाड़ी क्षेत्रों में बसों के संचालन के 46 छोटी बसें मंगाई, लेकिन हरिद्वार डिपो के हिस्से में महज दो ही बसें आई। जबकि रोडवेज की आय बढ़ाने में हरिद्वार डिपो भी प्रमुख डिपो की सूची में आता है।
रोडवेज की 92 और जेएनएनयूआरएम की 59 बसें
उत्तराखंड शासन की ओर से बसों का इंतजाम न करने से डिपो की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है। जिससे बसों की आय प्रभावित हो रही है। वहीं यात्री भी खटारा हो चुकी बसों में सफर करने से तौबा कर रहे हैं।
2010 के कुंभ में आई जेएनएनयूआरएम की बसें भी अब खटारा हो चुकी हैं। 2010 के कुंभ मेले में जेएनएनयूआरएम की नई बसें आने से रोडवेज को बसों की जरूरत महसूस नहीं हुई थी।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
हरिद्वार रोडवेज डिपो की अनदेखी करना ठीक नहीं है। सरकार को हरिद्वार को प्राथमिकता के आधार बसें उपलब्ध करानी चाहिए।
- रवि धींगड़ा, पार्षद
2010 में तो केंद्र सरकार की ओर से जेएनएनयूआरएम की 85 बसें दी गई थीं। जिससे 2010 के कुंभ मेले में यात्रियों को राहत मिली थी । नई बसें नहीं मिलने से यात्रियों को दिक्कतें होंगी।
- विनीत धीमान, उद्यमी