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सैनिकों के कल्याण का हिसाब लेगा राजभवन
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 27 Jul 2016 10:18 AM IST
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गवर्नर केके पॉल
- फोटो : amar ujala
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राजभवन अब उत्तराखंड में सैनिकों के कल्याण के लिए संचालित हो रही सैनिक पुनर्वास संस्था का हिसाब किताब लेगा।
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10 लाख से अधिक पूर्वसैनिकों, वीर वारियों और आश्रितों के कल्याण की कई योजनाएं संस्था के माध्यम से चल रही हैं, लेकिन मौजूदा सरकार में संस्था का करोड़ों का फंड अन्यत्र इस्तेमाल किया गया है। संस्था के चेयरमैन राज्यपाल हैं, लेकिन कई मामलों में उनकी अनुमति के बगैर अन्य कामों के लिए फंड ट्रांसफर कर दिया गया।
अमर उजाला में मामले प्रकाशित होने के बाद संस्था संचालक सैनिक कल्याण निदेशालय अब सरकार से करोड़ों का फंड वापस मांग रहा है। इस बीच राज्यपाल केके पाल ने संस्था के प्रदेश व अन्य राज्यों में मौजूद पदाधिकारियों की 28 जुलाई को बैठक बुलाई है।
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इस संस्था के माध्यम से पूर्व सैनिकों, वीर नारियों व आश्रितों के विवाह, छात्रवृत्ति, आवास जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। संस्था को सरकार से कोई वित्तीय मदद नहीं मिलती है बल्कि संस्था अपने माध्यमों से आय के संसाधन सृजित करती है। संस्था का साढ़े चौदह सौ एकड़ का पत्थरचट्टा में सैनिक फार्म है, जिसे खेती के लिए लीज पर दिया गया है। इससे हर वर्ष औसतन चार से पांच करोड़ की आय होती है।
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इसी आय से योजनाएं संचालित होती रही हैं, लेकिन एक वर्ष पूर्व सरकार के निर्देश पर सैनिक कल्याण विभाग को संस्था के खाते से पांच करोड़ रुपये सैनिक स्कूल के लिए जारी किए गए थे। इसके बाद साढ़े चार लाख रुपये रुद्रप्रयाग में हुई एयरफोर्स की भर्ती रैली के लिए जिला प्रशासन को दिए गए। दो करोड़ रुपये रुद्रप्रयाग को और दिये जाने थे, लेकिन मामला अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद इसे रोक दिया गया।
सबसे हैरानी की बात यह है कि संस्था के चेयरमैन राज्यपाल हैं, लेकिन फंड ट्रांसफर से पहले उनकी सहमति नहीं ली गई। सूत्रों की माने तो राज्यपाल ने संस्था के फंड को सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास के अलावा अन्यत्र खर्च पर आपत्ति जताई है। वर्ष 2012-13 के बाद अब 28 जुलाई को राजभवन ने सैनिक कल्याण निदेशालय से संस्था के फंड, खर्च और आय को लेकर तमाम पत्रावलियां भी तलब की है।